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नैनो को मिला उसका मालिक
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 24 Jun 2016 08:36 PM IST
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परिवहन विभाग में नैनो कार के दो दावेदारों का मामला शुक्रवार को सुलझा लिया गया। कार असली मालिक शिकायतकर्ता मनोज कुमार सिंह के नाम ही पंजीकृत होगी। शुक्रवार को वह अपनी गाड़ी लेकर परिवहन दफ्तर पहुंचे थे। उन्होंने पूरे मामले में दोषी लिपिकों और साजिश करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि शाहपुर क्षेत्र के बशारतपुर निवासी दीनानाथ सिंह के पुत्र मनोज कुमार सिंह ने अपनी नैनो कार बेच दी थी। उसका ट्रांसफर कराने नौ जून को जब वह आरटीओ पहुंचे तो पता चला कि गाड़ी उनके नाम पर नहीं है और इसे दो बार बेचा भी जा चुका है। मनोज का आरोप था कि 19 जनवरी 2012 को गाड़ी का रजिस्ट्रेशन आरटीओ में हुआ था। गाड़ी का नंबर यूपी 53 एवाई 7028 मिला था। उनका दावा था कि नैनो कार उन्हीं के पास है। मामले की जांच में पता चला कि इस नंबर की गाड़ी आरटीओ कैंपस निवासी चंद्रमौली मणि के पुत्र राम प्रवेश मणि के नाम पर दर्ज है।
‘अमर उजाला’ की पड़ताल में मामला सामने आया था कि 11 अक्टूबर 2013 को गाड़ी कैंट क्षेत्र के नहर रोड मोहद्दीपुर निवासी रामाशंकर सिंह के पुत्र अशोक सिंह के नाम पर ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद 11 जुलाई 2014 को गाड़ी आरटीओ कैंपस राम प्रवेश मणि के नाम पर ट्रांसफर हुई। आरटीओ विभाग ने तीनों को नोटिस जारी किया था। नोटिस मिलने के बाद मनोज ने गाड़ी के सभी सबूत पेश किए और शुक्रवार को गाड़ी लेकर कार्यालय भी पहुंचे। लेकिन दूसरे दावेदार चंद्र मौली मणि से कोई भी जवाब नहीं मिला। इसके बाद मनोज के नाम पर ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करने का निर्णय लिया गया।
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मनोज की शिकायत के बाद मामले की जांच की गई थी। उनकी शिकायत सही मिली। गाड़ी उनके नाम पर शनिवार को कर दी जाएगी।
- सूरज राम पाल, एआरटीओ प्रशासन
इसे पूरे प्रकरण में जो लिपिक दोषी हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा बचाया जा रहा है। जबकि पूरे मामले में साजिश करने वालों को अधिकारियों ने चिह्नित भी किया है।
- मनोज, वाहन स्वामी
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बता दें कि शाहपुर क्षेत्र के बशारतपुर निवासी दीनानाथ सिंह के पुत्र मनोज कुमार सिंह ने अपनी नैनो कार बेच दी थी। उसका ट्रांसफर कराने नौ जून को जब वह आरटीओ पहुंचे तो पता चला कि गाड़ी उनके नाम पर नहीं है और इसे दो बार बेचा भी जा चुका है। मनोज का आरोप था कि 19 जनवरी 2012 को गाड़ी का रजिस्ट्रेशन आरटीओ में हुआ था। गाड़ी का नंबर यूपी 53 एवाई 7028 मिला था। उनका दावा था कि नैनो कार उन्हीं के पास है। मामले की जांच में पता चला कि इस नंबर की गाड़ी आरटीओ कैंपस निवासी चंद्रमौली मणि के पुत्र राम प्रवेश मणि के नाम पर दर्ज है।
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‘अमर उजाला’ की पड़ताल में मामला सामने आया था कि 11 अक्टूबर 2013 को गाड़ी कैंट क्षेत्र के नहर रोड मोहद्दीपुर निवासी रामाशंकर सिंह के पुत्र अशोक सिंह के नाम पर ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद 11 जुलाई 2014 को गाड़ी आरटीओ कैंपस राम प्रवेश मणि के नाम पर ट्रांसफर हुई। आरटीओ विभाग ने तीनों को नोटिस जारी किया था। नोटिस मिलने के बाद मनोज ने गाड़ी के सभी सबूत पेश किए और शुक्रवार को गाड़ी लेकर कार्यालय भी पहुंचे। लेकिन दूसरे दावेदार चंद्र मौली मणि से कोई भी जवाब नहीं मिला। इसके बाद मनोज के नाम पर ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करने का निर्णय लिया गया।
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मनोज की शिकायत के बाद मामले की जांच की गई थी। उनकी शिकायत सही मिली। गाड़ी उनके नाम पर शनिवार को कर दी जाएगी।
- सूरज राम पाल, एआरटीओ प्रशासन
इसे पूरे प्रकरण में जो लिपिक दोषी हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा बचाया जा रहा है। जबकि पूरे मामले में साजिश करने वालों को अधिकारियों ने चिह्नित भी किया है।
- मनोज, वाहन स्वामी