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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Lok Sabha Chunav 2019: basti constituency of UP, Triangular Fight in BJP, Gathbandhan and Congress

बस्ती में टूट रहा जात-पात का बंधन, भाजपा, गठबंधन और कांग्रेस में त्रिकोणीय संघर्ष

Fri, 10 May 2019 05:37 AM IST
देव कश्यप महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, बस्ती
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, बस्ती Published by: देव कश्यप Updated Fri, 10 May 2019 05:37 AM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: basti constituency of UP, Triangular Fight in BJP, Gathbandhan and Congress
हरीश द्विवेदी (भाजपा), राजकिशोर सिंह (कांग्रेस) और राम प्रसाद चौधरी (गठबंधन) - फोटो : अमर उजाला

बस्ती के पौराणिक मनोरमा नदी के तट पर स्थित मखभूमि मखौड़ा में ऋंगी ऋषि ने पुत्रेष्ठि यज्ञ के द्वारा राजा दशरथ की पुत्र की मनोकामना पूरी करवा दी थी। लेकिन कभी गुरु वशिष्ठ के कारण वाशिष्टी के नाम से जानी जाने वाली बस्ती की बदहाली अभी तक दूर नहीं हो पाई। बस्ती की बाढ़ से बर्बादी लगातार जारी है। बाढ़ यहां की स्थायी तो आवारा पशु नई समस्या बनकर सामने आए हैं। मगर, यह लोकसभा चुनाव क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत करता नजर आ रहा है। जाति के खांचे में रचे-बसे बस्ती के हरैया, कप्तानगंज से महादेवा और रुधौली तक के तमाम मतदाता इस बार जातीय बंधन तोड़कर वोट करने की बात कह रहे हैं। खास बात ये है कि इस तरह की बात करने वाले हर समूह व वर्ग के लोग मिल जाते हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय लड़ाई के आसार बन गए हैं।

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कांग्रेस प्रत्याशी राजकिशोर सिंह हरैया से कई बार विधायक और मंत्री बने। वहीं, भाजपा ने मौजूदा सांसद हरीश द्विवेदी को उतारा है जबकि गठबंधन के तहत बसपा से राम प्रसाद चौधरी मैदान में हैं। हरैया के मझौवा दूबे में टेंट का कारोबार करने वाले रघुनायक सिंह बताते हैं कि यहां लड़ाई मोदी और गठबंधन में है। राजकिशोर के आने से उलझी तस्वीर साफ हो रही है। पढ़े लिखे मिर्जा और पठान भाजपा का प्रचार कर रहे हैं। इनका दावा है कि 7-8% मुस्लिम वोट भाजपा को जा रहा है। वह कहते हैं कि इलाके में छुट्टा जानवर बड़ी समस्या हैं। लेकिन वोटर राष्ट्रवाद के जोर में इसे नजरंदाज कर रहा है। 
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रमघटिया में किसान हाजी हकीमुल्ला ने बताया कि गाय-बछड़ा खेती नष्ट कर रहे हैं। एक-एक, दो-दो बीघा खेत वालों को 4-5 हजार रुपये उसे बचाने के लिए घेराबंदी में लगाना पड़ रहा है। मुस्लिम गठबंधन के साथ हैं। केशवपुर में बढ़ई का काम करने वाले हौसिला प्रसाद शर्मा कहते हैं कि मुस्लिम वोट ज्यादा गठबंधन को जा रहा है लेकिन मंत्रीजी (राजकिशोर पूर्व मंत्री) भी मुस्लिम वोट पा रहे हैं। इन्हीं के साथ मौजूद अशोक शास्त्री कहते हैं कि मोदी लहर है। अमोड़ा में मिले ग्रेजुएट युवा अनिरुद्ध मौर्य ने कहा कि मंत्री अपने गांव चंगेरवा का ही विकास कराते हैं। यहां गठबंधन व बीजेपी की लड़ाई है। 
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कोई गैस, शौचालय, आवास के लिए मोदी, कोई कुछ न पाने से गठबंधन के साथ
आमा पाड़े में सोनू राजभर अपनी मां ज्ञानमती के साथ बैठे थे। चुनाव की बात शुरू होते ही  ज्ञानमती बिफर पड़ीं। कहा कि विधायक चुनाव में अजय सिंह (अब विधायक) आए थे। आवास दिलाने की बात कही थी। घर के पूरे 10 वोट दिए, लेकिन घूमकर देखने नहीं आए। वह कहती हैं कि इस चुनाव में फिर 10 वोट मोदी जी को देंगी। विधायक वाले में अजय से हिसाब पूछूंगी। गाढ़ा गौतम में बुद्धूगंज चौराहे पर चान की दुकान चलाने वाले बुद्धिराम निषाद का दावा है कि लड़ाई में पंजा, फूल व हाथी की खिचड़ी है लेकिन गैस चूल्हा, आवास, शौचालय और किसानों को रुपये का असर है।

अभी तो तगड़ी लड़ाई

रुधौली के सोनारजोत में गन्ने का रस बना रहे राम मूरत की दुकान पर रवि सोनकर ने बताया कि इधर लड़ाई राम प्रसाद और हरीश में है। पंजा मामूली है, लेकिन बीजेपी को हर जात में वोट मिल रहा है। राममूरत भी हां में हां मिलाने लगते हैं। पैड़ा में शिव बचन ने बताया कि यहां हाथी और मोदी का जोर है। औरतें आवास और शौचालय अपने नाम से पाकर बहुत खुश हैं। महादेवा विधानसभा क्षेत्र के बकुनारे में 80 साल के शिव बरन चौधरी और संपत पेड़ के नीचे छंहाते मिल गए। संपत ने दावा किया कि राम प्रसाद की जीत पक्की है। गठबंधन के वोट के साथ कुर्मी एकजुट हैं। लेकिन शिव बरन ने बताया कि उनके गांव में ही कुर्मी आधे-आधे हो गए। कैसे हाथी निकल जाएगा?

आवास मिला नहीं, पट्टा मिला तो कब्जा नहीं मिला
कप्तानगंज क्षेत्र के गढ़हा गौतम में अनुसूचित जाति की बस्ती में शिव प्रसाद 5 भाई हैं। कहते हैं कि शौचालय मिला लेकिन प्रधान आवास नहीं दिला रहे। सालों पहले पट्टा मिला लेकिन कब्जा आज तक नहीं मिला। शिव प्रसाद अपना व भाइयों का फूस का घर दिखाते हुए कहते हैं कि यहां बीजेपी, कांग्रेस और हाथी तीनों की लड़ाई है। गांव से बाहर आते हुए छात्र अनिकेत मिल गए। अनिकेत ने बताया कि उनके आसपास मायावती का वोट है। गांव में मोदी का जोर है।

पांच नदियों वाले बस्ती की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ 
घाघरा, कुआनो, मनोरमा, आमी और गारिया, पांच बड़ी नदियां बस्ती के बड़े हिस्से को प्रभावित करती हैं। यहां के लोग बताते हैं कि नदियाें में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। घाघरा हर साल तबाही लाती है और किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। अन्य नदियां भी मुश्किल बढ़ाती हैं। मगर, जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं देते।

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