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लेखपालों की हड़ताल खत्म करने के लिए शासन सख्त, बर्खास्त हो जाएंगे पर पीछे नहीं हटेंगे

Wed, 18 Dec 2019 06:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 18 Dec 2019 06:35 PM IST
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lekhpal protest at gorakhpur
मांगों को लेकर धरना देते लेखपाल। - फोटो : अमर उजाला
लेखपालों की हड़ताल खत्म करने के लिए शासन-प्रशासन ने जहां एक तरफ सख्ती शुरू कर दी है वहीं लेखपाल भी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। जिला लेखपाल संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि समस्याएं सुनने और पीड़ा समझने के बजाए शासन जबरन आवाज दबाने में जुट गई है।
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संघ के अध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश प्रसाद ने कहा कि बर्खास्त हो जाएंगे मगर पीछे नहीं हटेंगे। लेखपालों की मांग जायज है और अगर नहीं है तो शासन तर्क समेत बताए कि हम गलत कैसे हैं। कई बार की वार्ता, चेतावनी, धरने के बाद सूचना देकर लेखपालों ने शांतिपूर्वक हड़ताल शुरू की मगर शासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए एस्मा लगा दिया।
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उधर शासन स्तर से कार्रवाई शुरू होने के बाद जिला प्रशासन ने भी सख्ती शुरू कर दी है। जिला लेखपाल संघ के साथ ही तहसील स्तरीय कार्यकारिणी के प्रमुख पदाधिकारियों और सक्रिय लेखपालों को काम पर लौटने के लिए नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। 40 से अधिक लेखपालों के खिलाफ नोटिस जारी किया जा चुका है। बुधवार को कई लेखपालों के पास नोटिस पहुंची लेकिन उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया।
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हड़ताल से 18 हजार आवेदन फंसे

लेखपालों के करीब नौ दिन की हड़ताल से जिले में संकट गहरा गया है। जाति, आय और निवास के करीब 18 हजार आवेदन लंबित पड़े हैं तो इसी तरह समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) और मुख्यमंत्री संदर्भ से जुड़े हुए भी करीब एक हजार मामले लंबित हैं।

ये हैं लेखपालों की मांगें
वेतन विसंगति को ठीक करने, वेतनमान बढ़ाने, राजस्व निरीक्षक के पदों में वृद्धि, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति एवं विभागीय परीक्षा के माध्यम से लेखपालों को अधिक अवसर प्रदान करने, पदनाम परिवर्तित कर लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक किए जाने, मोटर साइकिल भत्ता देने, पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थियों के सत्यापन के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध कराना आदि।

क्या है एस्मा-
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पूर्व इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्य माध्यम से सूचित किया जाता है। एस्मा का नियम अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध एवं दंडनीय है। इसमें किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
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