मधवलिया गो सदन में मरती गई गायें, बढ़ती रही खेती, जानिए पूरी कहानी
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वर्ष 1969 में वनविभाग द्वारा 711 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने के बाद अस्तित्व में आए जिला गोसदन मधवलिया को जून 1970 में 500 एकड़ भूमि भी उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन भूमि उपलब्ध होने के 27 बरस बाद 1997 में जिला गोसदन मधवलिया ने आकार लिया और 35 गोवंशीयों के साथ गोसदन का संचालन तत्कालीन कमिश्नर राजीव गुप्ता के आदेश पर शुरु हुआ।
तब गोसदन के पास महज एक झोपड़ी और पशुओं के लिए शेड बनाया गया था। पशुओं के चारे और पानी के बेहतर इंतेजाम के लिए पांच एकड़ में शुरु हुई। चारे की खेती दो दशक बाद 328 एकड़ तक पहुंच गईं। लेकिन गोसदन के हालत नहीं बदले। सुबे में योगी सरकार बनने से पूर्व तक गोसदन में महज 145 एकड़ खेती होती थी। तब गोसदन में करीब 400 गोवंशीय रहते थे।
सुबे में योगी सरकार बनने और गौ संरक्षण सरकार की शीर्ष प्राथमिक्ता में शामिल किए जाने के साथ ही गोसदन के बेहतरी की बातें जोर पकड़ने लगी। इस बीच भारी अव्यवस्थाओं का हवाला दें तत्कालीन डीएम ने सितंबर 2017 में गोसदन के प्रबंधक विमल पांडेय की छुट्टी कर दी। उनके स्थान पर भाजपा नेता जितेन्द्र पाल सिंह को गोसदन का नया प्रबंधक बनाया गया।
2019 के पहले सप्ताह में हुई 60 से अधिक गोवंशीयों के मौत
इस बीच मंडल के विभिन्न जनपदों से छुट्टा गोवंशीय पशुओं को गोसदन लाए जाने लगा और अगले कुछ महीनों में गोसदन में पशुओं की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गईं। इस बीच आनन-फानन में तीन नये शेड भी बने और नए गो सेवकों की नियुक्ति भी हुई। लिहाजा खेती भी बढ़ी और 180 एकड़ में परम्परागत खेती की जाने लगी। इस बीच फरवरी 2019 में डीएम ने गोसदन प्रबंधक को हटा दिया।
अब पूरी व्यवस्था की कमान अफसरों ने खुद संभाल ली। इस बीच जून 2019 के पहले सप्ताह में हुई 60 से अधिक गोवंशीयों के मौत के बाद व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने गोसदन का कामकाज देख रहे एसडीएम निचलौल देवेन्द्र कुमार का स्थानांतरण कर दिया। उनके स्थान पर सत्यम मिश्रा को निचलौल का नया एसडीएम बनाया गया। एसडीएम निचलौल ने डीएम की पहल पर व्यवस्था के बेहतरी के नाम पर करीब 148 एकड़ भूमि महज दो व्यक्तियों को आवंटित कर दिया।
मोटी रकम देकर भूमि का आवंटन लेने वाले नामदारों ने गोसदन की शर्तों को दरकिनार कर गोसदन की भूमि पर व्यवसायिक खेती शुरु कर दी है। इधर खेती का रकबा बढ़ता गया, उधर गोवंशीयों की सांसे थमती चली गईं। सीएम के आदेश पर मामले की जांच कर रहे कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने गोसदन के सभी अभिलेखों को तलब कर अपनी कस्टडी में ले लिया है। जांच के क्रम में मंगलवार को बीडीओ निचलौल रविंद्र वीर को भी निलंबित कर दिया गया हैं।