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विभागाध्यक्ष के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों ने खोला मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:03 AM IST
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मेडिकल कालेज मे चस्पा किए गए पोस्टर
- फोटो : mahesh kumar
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मेडिकल कॉलेज के सोशल एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष के खिलाफ उनके ही छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। जूनियर डॉक्टरों ने विभाग में पोस्टर लगाकर विभागध्यक्ष को तानाशाही बंद करने की चेतावनी दे डाली है। छात्रों का आरोप है कि क्लास और लैब बंद करके उनसे घरेलू काम कराए जाते हैं और इन्कार करने पर मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। जूनियर डॉक्टर प्राचार्य से इसकी शिकायत पहले ही कर चुके हैं।
जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह सरेआम गाली देते हैं। घर की सब्जी, दूध लाने को कहते हैं और मना करने पर फेल करने की धमकी देते हैं। छात्रों का कहना है कि घर बुलाकर आधी रात तक व्यक्तिगत किताब लेखन का काम कराया जाता है। महिला जूनियर डाक्टरों को फोन पर ही पुस्तक लेखन का निर्देश देकर उसे जल्द पूराकर ईमेल से तुरंत भेजने का दवाब बनाया जाता है। साल में छह महीने तो इसी में बीत जाता है। पूर्व में एक जूनियर डाक्टर इसके चलते मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो गया और उसे काम छोड़कर घर भागना पड़ा। इसका प्रभाव उसके परीक्षाफ ल पर भी पड़ा और वह फेल हो गया। ऐसा विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कांफ्रेंस के लिए जूनियर डाक्टरों पर फंड इकट्ठा करने का दबाव बनाया गया। इससे उस वर्ष में चार महीने पठन-पाठन प्रभावित हुआ। छात्रोें का कहना है कि विभागाध्यक्ष उपस्थिति पंजिका को अपने कमरे में बंद कर अवकाश पर चले जाते हैं। व्हाइटनर का इस्तेमाल कर पंजिका से छेड़छाड़ करते हैं। इस मामले में प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है।
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जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह सरेआम गाली देते हैं। घर की सब्जी, दूध लाने को कहते हैं और मना करने पर फेल करने की धमकी देते हैं। छात्रों का कहना है कि घर बुलाकर आधी रात तक व्यक्तिगत किताब लेखन का काम कराया जाता है। महिला जूनियर डाक्टरों को फोन पर ही पुस्तक लेखन का निर्देश देकर उसे जल्द पूराकर ईमेल से तुरंत भेजने का दवाब बनाया जाता है। साल में छह महीने तो इसी में बीत जाता है। पूर्व में एक जूनियर डाक्टर इसके चलते मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो गया और उसे काम छोड़कर घर भागना पड़ा। इसका प्रभाव उसके परीक्षाफ ल पर भी पड़ा और वह फेल हो गया। ऐसा विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ।
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छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कांफ्रेंस के लिए जूनियर डाक्टरों पर फंड इकट्ठा करने का दबाव बनाया गया। इससे उस वर्ष में चार महीने पठन-पाठन प्रभावित हुआ। छात्रोें का कहना है कि विभागाध्यक्ष उपस्थिति पंजिका को अपने कमरे में बंद कर अवकाश पर चले जाते हैं। व्हाइटनर का इस्तेमाल कर पंजिका से छेड़छाड़ करते हैं। इस मामले में प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है।
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