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जवाहर हत्याकांड: दबाव बनाने व तहरीर बदलवाने का आरोपी दरोगा लाइनहाजिर

Tue, 12 Nov 2019 09:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 09:54 PM IST
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jawahar murder case, SI attach to policeline
जवाहर हत्याकांड: दबाव बनाने व तहरीर बदलवाने का आरोपी दरोगा लाइनहाजिर
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पीपीगंज(गोरखपुर)। पीपीगंज कस्बे के वार्ड नंबर तीन निवासी जवाहर यादव की मौत के मामले में एडीजी दावा शेरपा के निर्देश के बाद सोमवार रात एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने मामले में तहरीर बदलवाने और सुलह का दबाव बनाने के आरोपी दरोगा विनय पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया। पहले ही दिन से अमर उजाला ने दरोगा की लापरवाही की खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उधर, पुलिस की जांच अब लगभग पूरी हो गई है। सोमवार तक इसे गला घोंटकर हत्या बताने वाले सीओ कैंपियरगंज ने मंगलवार को मामले का पर्दाफाश करते हुए कहा कि जांच में मारपीट और प्रताड़ित करने के बाद आत्महत्या की बात ही सामने आई है। उन्होंने बताया कि मामले में दो आरोपी वार्ड नंबर तीन के पार्षद अताउल्लाह और ब्रोकर इश्तियाक की भूमिका मिली है। वहीं रामानंद मद्घेशिया और रजा उर्फ फैंसी का रोल सामने नहीं आ रहा है। दोनों आरोपियों को पुलिस ने अभी भी हिरासत में रखा है।
जमीन नहीं बेचने पर हुई थी जवाहर की पिटाई
पीपीगंज कस्बे के वार्ड नंबर तीन बापू नगर में अपने हिस्से की जमीन नहीं बेचने पर भूमाफिया ने 5 नवंबर की रात करीब नौ बजे घर में घुसकर मजदूर जवाहर यादव (46) की पिटाई की थी। पुलिस के अनुसार दबाव व मारपीट के कारण जवाहर ने आत्महत्या कर लिया। जबकि जवाहर की पत्नी ज्ञानमती ने गला दबाकर हत्या करने और शव को लटकाकर आत्महत्या दर्शाने का आरोप लगाया। आनन-फानन में पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर तीन लोगों को हिरासत में लिया था। जबकि शाम होते ही पोस्टमार्टम में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस पर सवाल उठने लगे।
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ये था मामला
जवाहर यादव ने पांच वर्ष पूर्व पीपीगंज कस्बे में स्थित जमीन 19 लाख में बेचकर महराजगंज जिले के फरेंदा में दस बीघा भूमि खरीदी। इस बैनामा में गवाही करने के नाम पर वार्ड नंबर 3 के सभासद अताउल्लाह और उनके प्रतिनिधि रामानंद मद्धेशिया ने अपना नाम डलवा लिया। इस पर किसी ने मुकदमा कर दिया। तीन माह पहले कोर्ट से उनके पक्ष में आर्डर आया। आरोप है कि आर्डर आने के बाद अताउल्लाह, रामानंद मद्धेशिया (वार्ड सात के पूर्व सभासद) 22 अक्तूबर को उनके बच्चों को मारने की धमकी दी और जवाहर यादव, उनकी पत्नी ज्ञानमती को जबरदस्ती फरेंदा ले जाकर उनके हिस्से की भूमि का एग्रीमेंट करा लिया। एग्रीमेंट में 13.25 लाख रुपये देने की बात कहीं गई, लेकिन आरोप है कि एक भी रुपया नहीं दिया गया। इस बीच आरोपी भूमि की रजिस्ट्री करने का दबाव बनाने लगे। जवाहर ने एग्रीमेंट की रकम मिलने के बाद ही भूमि रजिस्ट्री करने की बात कही। पत्नी ज्ञानमती ने पुलिस को बताया कि पांच नवंबर की रात अताउल्लाह, और ब्रोकर इश्तियाक उनके घर पहुंचे और पति को कमरे की खिड़की में बांध कर मारने-पीटने लगे। देर रात पत्नी जवाहर के कमरे की तरफ गई तो उनका शव खिड़की में फंदे के सहारे लटका हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने रामानंद मद्धेशिया, ब्रोकर इश्तियाक, गवाह मोहम्मद रजा उर्फ फैंसी और अताउल्लाह पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था।
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