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बेटों की राह तकते तकते हमेशा के लिए बंद हो गईं बूढ़ी मां की आंखें, अंतिम संस्कार में भी न आए

Wed, 25 Dec 2019 11:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो महेंद्र तिवारी/शेषमणि पाण्डेय, पिपराइच/बेला।
महेंद्र तिवारी/शेषमणि पाण्डेय, पिपराइच/बेला। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 25 Dec 2019 11:46 AM IST
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insensitive in pipraich, leave to old and sike mother
छोहाड़ी देवी को खाना खिलाते ग्राम प्रधान प्रयाग सिंह।
कड़ाके की ठंड में दर्द से कराहती 82 साल की छोहाड़ी देवी ने मंगलवार की सुबह आखिरकार दम तोड़ दिया। यह मां की ममता ही थी, जिन बेटों ने उन्हें लावारिस मरने के लिए छोड़ दिया था, उन्हीं की एक झलक देखने को वे अंतिम सांस तक बेकरार रहीं।
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उनकी मौत पर गांव के लोगों में गम था और बेटों के प्रति उतना ही गुस्सा। बेटी और बेटे अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुंचे। लेकिन श्मशान घाट पर पौत्र कुलदीप सिंह पहुंचा तो उसी से मुखाग्नि दिलाई गई। अमर उजाला में मंगलवार को छपी खबर पर हरकत में आए प्रशासन ने अंतिम क्रिया-कर्म के लिए सरकारी मदद की पहल की, लेकिन गांव वालों ने मना कर दिया।
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पिपराइच क्षेत्र के गोविंदपुर गांव में सुबह से ही मातम था। ग्राम प्रधान प्रयाग सिंह के मुताबिक सुबह सात बजे जब वे सुबह छोहाड़ी देवी को चाय पिलाने पहुंचे तो उनकी सांसे थम चुकी थी और शरीर ठंडा पड़ चुका था। धीरे-धीरे गांव के लोग भी जुट गए। सभी लोग कुलयुगी बेटों को धिक्कारते रहे। कुछ लोगों ने उनके बेटों को फोन कर बूढ़ी मां के मौत की सूचना दी।
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इसके बाद देवरिया के गोनहसुरपुरा में मामा के घर रह रहे छोहाड़ी देवी के पौत्र को लोगों ने बताया कि अगर वह नहीं आया तो गांव के लोग ही अंतिम संस्कार कर देंगे। तीन घंटे इंतजार करने के बाद गांव के लोग शव लेकर माड़ापार श्मशान घाट पहुंचे। वहां भी लोगों ने कुलदीप से बात की।

काफी दबाव पड़ने पर कुलदीप ने आने की बात कही। लेकिन जब वहीं नहीं आया तो गांव वालों ने घाट पर चिता सजा दी। इसी बीच कुलदीप पहुंच गया। उसने दादी को मुखाग्नि दी। गांव के लोग कोसते रहे है कि बेटे-बेटी तो नहीं आए, पोता भी यहीं रहकर दादी से मिलने नहीं आया।

ईश्वर ऐसे बेटा-बेटी किसी को न दें

घाट पर मौजूद गांव के मित्रसेन, अजय, अनिल, महेंद्र, धीरेंद्र, सुरेश यादव, शर्मानंद समेत सभी की आंखें नम थी। वे अंतिम क्षणों में छोहाड़ी देवी की बेबसी पर गुस्सा में थे। उनकी प्रतिक्रिया थी, बूढ़ी मां बेटों और बेटी की बाट जोहते-जोहते मर गईं। कोई सगा रिश्तेदार भी  देखभाल करने नहीं पहुंचा। ईश्वर ऐसे बेटा-बेटी किसी को न दें।
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प्रधान ने कहा, खर्च गांव के लोग उठाएंगे
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार के निर्देश पर तहसीलदार सदर संजीव कुमार दीक्षित ने क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक अमेरिका सिंह को प्रशासनिक मदद के लिए गांव में  भेजा। लेकिन ग्राम प्रधान प्रयाग सिंह ने किसी भी सरकारी सहयोग लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा इस पुनीत काम के लिए हमारे गांव की जनता का सहयोग ही काफी है। हालांकि तहसीलदार संजीव कुमार दीक्षित ने बताया जब भी जरूरत होगी, प्रशासन पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है।
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संपत्ति जब्त कर छोहाड़ी देवी के नाम से खुले अस्पताल
श्मशान घाट पर पहुंचे गांव वालों ने कहा कि नालायक बेटों ने गांव का नाम कलंकित कर दिया। समाज में बहुत गलत संदेश गया है। इन बेटों पर कार्रवाई होनी चाहिए। घर पर बेटों का अधिकार भी खत्म कर इसे सरकारी संपत्ति घोषित किया जाए। इसमें छोहाड़ी देवी के नाम से सरकारी अस्पताल खोला जाए।
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