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शहर से सटे गांवों में भी इज्जत घर बदहाल
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पिपरौली ब्लाक के ग्राम पंचायत बसुधा के दूधनाथ का अर्ध निर्मित शौचालय।
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जिले के आखिरी छोर पर बसे बेलघाट ब्लॉक ही नहीं शहर से सटे ब्लॉकों के कई गांवों में भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने इज्जत घरों की स्थिति बदहाल है। कहीं शौचालय पर छत नहीं है तो कहीं दरवाजा। तमाम शौचालयों के दरवाजों पर पर्दे और कपड़े टांगकर ग्रामीण इज्जत बचा रहे है। कई का कहना है कि ऐसे शौचालय का क्या फायदा जो खुले मैदान की ही तरह हैं?
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पादरी बाजार प्रतिनिधि शत्रुघ्न चौहान के मुताबिक जंगल हकीम नंबर दो की दलित बस्ती में 70 वर्षीय किसमती देवी के चार लड़के हैं। सभी का अपना परिवार है, लेकिन किसी के पास शौचालय नही है, जिससे सभी बाहर जाने को मजबूर हैं। चुन्नीपुर टोला निवासी गुड्डी का कहना है कि छह महीने से अधूरा शौचालय बनाकर छोड़ दिया गया है। वहीं सबिता, गीता के इज्जत घर के लिए सिर्फ सोकपिट के लिए महीनों से गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया है। हरसेवकपुर नंबर दो के लक्ष्मीपुर टोला में अनारकली का कहना है कि उसने अपने खर्च पर शौचालय बनाया, लेकिन प्रधान ने उसपर स्वच्छ भारत मिशन पेंट कराकर बकायदा क्रम संख्या अंकित कर दी। पिपराइच ब्लॉक के बहरामपुर गांव में भी गड्ढे ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
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गगहा ब्लॉक के बैकुंठपुर की राधिका का कहना है कि गड्ढा खोद कर अभी तक उसे ढका नहीं गया। प्रधान प्रतिनिधि ने बरसात बाद ढकने का आश्वासन दिया था, मगर अभी तक न तो शौचालय का निर्माण पूरा हुआ न ही ढक्कन लगाया गया। पिपरौली ब्लॉक मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत बसुधा गांव में पहला ही घर दूधनाथ का है। उनका शौचालय तो बन गया मगर सोकपिट के लिए बना गड्ढा महीनों से खुला ही है। कौड़ीराम ब्लॉक के मिश्रौली गांव के टोला देउरबीर के गोविंद और बबलू कहते हैं कि शौचालय सिर्फ नाम के हैं। उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। किसी में भी फाटक नहीं है। सीट टूट चुकी है।
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बारानगर : ब्लॉक कर्मचारियों ने किया निरीक्षण
गोला ब्लॉक के बारानगर गांव में कई शौचालय अधूरे होने की सूचना पर ब्लॉक के अधिकारियों- कर्मचारियों की एक टीम ने मंगलवार को गांव का निरीक्षण किया। साथ ही लाभार्थियों को आश्वस्त किया कि जल्द ही सभी का निर्माण पूरा करा दिया जाएगा। बारानगर गांव की आबादी दो हजार से अधिक है। इनमें से कई के पास शौचालय नहीं है तो कई के घर के समाने महीनों से सोकपिट का गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। यही नहीं काफी दिनों बाद भी जब शौचालय नहीं बना तो कई ने गड्ढे पाट दिए। निरीक्षण करने वालों में मुख्य रुप से खंड प्रेरक नवीन कुमार श्रीवास्तव, गुलशन कुमार सिंह, गरिमा दस्ता के सुरेश गौड़, बलराम , राममिलन , सुभनाथ, रामकिसुन, सरोज कुमार, सचिव अजीत मौजूद रहे।
धुरियापार: महीनों से खुले गड्ढे बने आफत
उरुवां ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों में भी शौचालय की स्थिति बहुत बदहाल है। हमीरपुर गांव के रज्जाक का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद शौचालय तो बना लेकिन सोकपिट के लिए खोदा गया गड्ढा अभी तक नहीं ढका गया। गड्ढे में तीन बार बकरी गिर गई जिससे प्रधान ने उसे पटवा दिया। इससे शौचालय बनने के बाद भी उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। जाने आलम के भी शौचालय से गड्ढे तक न तो पाइप बिछाई गई और न ही उसे ढका गया। प्रधान प्रथ्वीनाथ का कहना है कि खाते पर रोक लगी है। रोक हटते ही निर्माण पूरा करा दिया जाएगा।
राजेश शर्मा
बड़हलगंज: कहीं एक ही घर में दो कहीं एक भी शौचालय नहीं
बड़हलगंज ब्लॉक के गांव बुढनपुरा, कल्यानपुर, चिल्लूपार व धोबहिया टोला में कहीं एक ही घर में दो शौचालय दे दिए गए हैं तो किसी को भी एक भी शौचालय नहीं मिला है। कई शौचालयों में छत नहीं लगी है तो कई के फाटक नहीं है। इन गांवों के पिंटू यादव, गुलशन कुमार, अशोक यादव, अनिल यादव, कमलेश यादव का आरोप है कि प्रधान और सचिव शौचालयों की रकम हड़प कर गए और कई घरों के सामने सिर्फ सोकपिट का गड्ढा खोदकर छोड़ दिया।
संजय श्रीवास्तव