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इबादत की, गले मिले फिर गूंजी ईद की मुबारकबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:31 AM IST
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ईद की नमाज के बाद एक दूसरे को बधाई देते
- फोटो : राजेश
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गोरखपुर। 30 रोजा रखने के बाद रोजेदारों को जब ईद मनाने का अवसर मिला तो बच्चे, बूढ़े और जवान सभी में इसे लेकर उल्लास दिखा। सुबह तय समय पर शहर के सात ईदगाहों और करीब 55 मस्जिदों में अकीदत और एहतराम के साथ नमाज अदा की गई। इसकेबाद शुरू हो गया जश्न का माहौल। देर रात तक मिलने-मिलाने, मुबारकबाद देने और दावतों का सिलसिला जारी रहा। सेवईं की मिठास में लोगों ने मुहब्बत का पैगाम दिया। कइयों ने ईद मिलन का कार्यक्रम आयोजित कर बाकायदा सामूहिक रूप से जश्न मनाया।
ईद के जश्न की शुरुआत बुधवार की देर शाम चांद दिखने के एलान के साथ ही हो गई। पूरी रात लोग जागते रहे और ईद की तैयारी करते रहे। अल सुबह ईद की नमाज की तैयारियां शुरू हो गईं। बच्चों को सजाने-संवारने के बाद लोगोें ने खुद भी नए कपड़े पहने, इत्र लगाए, सिर पर टोपी सजाई और हाथ में जानमाज लेकर ईदगाह और मस्जिदों की ओर चल पड़े। आठ बजते-बजते सभी ईदगाहों और मस्जिदों पर खासी भीड़ हो गई। नमाज शुरू होने के करीब आधा घंटा पहले ही अधिकतर मस्जिद और ईदगाह नमाजियों से भर गए। स्थिति यह थी कि जितने लोग मस्जिद के अंदर से उतने ही बाहर भी नजर आ रहे थे। मुकर्रर वक्त पर ईद-उल-फित्र की नमाज अदा की गई, ईदैन का खुत्बा पढ़ा गया और मुल्क में अमन, शांति और एकता की दुआएं की गईं। मुबारक खां शहीद, सेहरा बाले का मैदान, बेनीगंज, इमामबाड़ा इस्टेट, चिलमापुर, पुलिस लाइन सहित सभी ईदगाह, शाही जामा मस्जिद समेत सभी जामा मस्जिद और सभी छोटे-बड़े मस्जिदों में तय समय पर ईद की नमाज अदा की। नमाज के खत्म होते ही मुबारकबाद की गूंज सुनाई पड़ने लगी। खुदा का फैज लेकर लोग घर वापस लौटे और शुरू हुआ मेहमाननवाजी का दौर। मीठी सेवइयों के साथ लजीज व्यंजनों का सभी ने खूब लुत्फ उठाया। लोग देर रात तक एक-दूसरे के घर जाते रहे और मुबारकबाद और मेहमानवाजी का सिलसिला चलता रहा।
ईदी में किसी को नगद तो किसी को तोहफा
गोरखपुर। नमाज खत्म होने के बाद मुबारकबाद देने के बीच ईदी बंटने का सिलसिला भी शुरू हो गया। बड़े-बूढ़ों ने परिवार के बच्चों को अलावा मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर खड़े बच्चों को ईदी बांटी। किसी को ईदी में नकद मिला तो किसी को तोहफा। ईदी पाकर बच्चों का उत्साह और बढ़ चला और वे दुकानों की ओर बढ़ लिए अपने मनपसंद सामान खरीदने के लिए। उधर युवकों ने तोहफों के आदान-प्रदान के साथ ईद की मुबारकबाद दी।
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सामर्थ्य के अनुसार बंटा जकात और फितरा
गोरखपुर। इस्लाम के मुताबिक खुदा का हुक्म है कि हर मुसलमान रमजान और ईद के दिन असहाय और गरीब जनों को जितना संभव हो सके दान करे, जिससे वे भी अपना जीवन सकुशल जी सकें बल्कि त्यौहार को भी औरों की तरह मना सके। यही दान जकात और फितरा है, जिसे इबादत के बाद नमाजियों ने किया। सभी ईदगाहों व मस्जिदों पर लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार जकात व फितरा करते दिखे।
मेले सरीखा रहा शहर का माहौल
गोरखपुर। बृहस्पतिवार की सुबह से ही शहर के कई मोहल्ले मेले में तब्दील हो गए। कई मोहल्लों में सड़क को रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया था। इसे देखकर खास दिन का अहसास खुद-ब-खुद हो रहा था। रसूलपुर, गोरखनाथ, सिधारीपुर, दरिया चक, जमुनहिया, चक्सा हुसैन, इलाहीबाग, तिवारीपुर, पीपरापुर, बहादुर शाह जफर कॉलोनी, नसीराबाद, मिर्जापुर, बक्शीपुर, नखास, खुनीपुर, रेती, तुर्कमान, घंटा घर छोटे काजीपुर, शाहमारुफ , बसंतपुर, आजाद चौक, चिलमापुर आदि मोहल्लों में खास उत्साह देखा गया। लोगों के गले मिलकर बधाई देने का नजारा सड़क से लेकर गलियों तक नजर आया।
खूब चला एसएमएस व वाट्सऐप का दौर
गोरखपुर। नमाज के बाद, जहां एक ओर लोग गले मिलकर मुबारकबाद देते दिखे तो दूसरी ओर उनमें युवाओं की अंगुली मोबाइल फोन पर थिरकती दिखी। सभी में वाट्सऐप, एसएमएस और फेसबुक जैसे माध्यमों से मुबारकबाद देने की जद्दोजहद दिखी। हालांकि मोबाइल का नेटवर्क उनके इस प्रयास में कई बार बाधा बना लेकिन हार न मानते हुए सभी लगे रहे। यह दौर भी पूरे दिन और देर रात तक चलता रहा।
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ईद के जश्न की शुरुआत बुधवार की देर शाम चांद दिखने के एलान के साथ ही हो गई। पूरी रात लोग जागते रहे और ईद की तैयारी करते रहे। अल सुबह ईद की नमाज की तैयारियां शुरू हो गईं। बच्चों को सजाने-संवारने के बाद लोगोें ने खुद भी नए कपड़े पहने, इत्र लगाए, सिर पर टोपी सजाई और हाथ में जानमाज लेकर ईदगाह और मस्जिदों की ओर चल पड़े। आठ बजते-बजते सभी ईदगाहों और मस्जिदों पर खासी भीड़ हो गई। नमाज शुरू होने के करीब आधा घंटा पहले ही अधिकतर मस्जिद और ईदगाह नमाजियों से भर गए। स्थिति यह थी कि जितने लोग मस्जिद के अंदर से उतने ही बाहर भी नजर आ रहे थे। मुकर्रर वक्त पर ईद-उल-फित्र की नमाज अदा की गई, ईदैन का खुत्बा पढ़ा गया और मुल्क में अमन, शांति और एकता की दुआएं की गईं। मुबारक खां शहीद, सेहरा बाले का मैदान, बेनीगंज, इमामबाड़ा इस्टेट, चिलमापुर, पुलिस लाइन सहित सभी ईदगाह, शाही जामा मस्जिद समेत सभी जामा मस्जिद और सभी छोटे-बड़े मस्जिदों में तय समय पर ईद की नमाज अदा की। नमाज के खत्म होते ही मुबारकबाद की गूंज सुनाई पड़ने लगी। खुदा का फैज लेकर लोग घर वापस लौटे और शुरू हुआ मेहमाननवाजी का दौर। मीठी सेवइयों के साथ लजीज व्यंजनों का सभी ने खूब लुत्फ उठाया। लोग देर रात तक एक-दूसरे के घर जाते रहे और मुबारकबाद और मेहमानवाजी का सिलसिला चलता रहा।
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ईदी में किसी को नगद तो किसी को तोहफा
गोरखपुर। नमाज खत्म होने के बाद मुबारकबाद देने के बीच ईदी बंटने का सिलसिला भी शुरू हो गया। बड़े-बूढ़ों ने परिवार के बच्चों को अलावा मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर खड़े बच्चों को ईदी बांटी। किसी को ईदी में नकद मिला तो किसी को तोहफा। ईदी पाकर बच्चों का उत्साह और बढ़ चला और वे दुकानों की ओर बढ़ लिए अपने मनपसंद सामान खरीदने के लिए। उधर युवकों ने तोहफों के आदान-प्रदान के साथ ईद की मुबारकबाद दी।
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सामर्थ्य के अनुसार बंटा जकात और फितरा
गोरखपुर। इस्लाम के मुताबिक खुदा का हुक्म है कि हर मुसलमान रमजान और ईद के दिन असहाय और गरीब जनों को जितना संभव हो सके दान करे, जिससे वे भी अपना जीवन सकुशल जी सकें बल्कि त्यौहार को भी औरों की तरह मना सके। यही दान जकात और फितरा है, जिसे इबादत के बाद नमाजियों ने किया। सभी ईदगाहों व मस्जिदों पर लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार जकात व फितरा करते दिखे।
मेले सरीखा रहा शहर का माहौल
गोरखपुर। बृहस्पतिवार की सुबह से ही शहर के कई मोहल्ले मेले में तब्दील हो गए। कई मोहल्लों में सड़क को रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया था। इसे देखकर खास दिन का अहसास खुद-ब-खुद हो रहा था। रसूलपुर, गोरखनाथ, सिधारीपुर, दरिया चक, जमुनहिया, चक्सा हुसैन, इलाहीबाग, तिवारीपुर, पीपरापुर, बहादुर शाह जफर कॉलोनी, नसीराबाद, मिर्जापुर, बक्शीपुर, नखास, खुनीपुर, रेती, तुर्कमान, घंटा घर छोटे काजीपुर, शाहमारुफ , बसंतपुर, आजाद चौक, चिलमापुर आदि मोहल्लों में खास उत्साह देखा गया। लोगों के गले मिलकर बधाई देने का नजारा सड़क से लेकर गलियों तक नजर आया।
खूब चला एसएमएस व वाट्सऐप का दौर
गोरखपुर। नमाज के बाद, जहां एक ओर लोग गले मिलकर मुबारकबाद देते दिखे तो दूसरी ओर उनमें युवाओं की अंगुली मोबाइल फोन पर थिरकती दिखी। सभी में वाट्सऐप, एसएमएस और फेसबुक जैसे माध्यमों से मुबारकबाद देने की जद्दोजहद दिखी। हालांकि मोबाइल का नेटवर्क उनके इस प्रयास में कई बार बाधा बना लेकिन हार न मानते हुए सभी लगे रहे। यह दौर भी पूरे दिन और देर रात तक चलता रहा।