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कार्रवाई की सिफारिश कर बेगुनाहों को जेल भेजने का दाग धोएगी पुलिस
Wed, 04 Dec 2019 11:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2019 11:47 AM IST
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हथियार और फर्जी लाइसेंस
- फोटो : अमर उजाला
फर्जी लाइसेंस से शस्त्र खरीदने के आरोप में खोराबार के आबकारी सिपाही समेत दस लोगों को जेल भेजने के मामले में पुलिस अब प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार करने वालों पर कार्रवाई की सिफारिश कर दाग धोने की तैयारी में है। पूरे प्रकरण के विवेचना की निगरानी कर रहे सीओ कैंट ने रिपोर्ट भेजने वाले असलहा बाबू व प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
एसएसपी के माध्यम से पत्र डीएम को भेजा जाएगा। पूरे प्रकरण में डीएम को ही कार्रवाई करनी है। उधर, सात लोगों का मूल पत्र तो मिल गया लेकिन अभी विवेचक तक नहीं पहुंच सका है। विवेचक के पास प्रशासन की ओर से मूल पत्र आने के बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगाया जाएगा। 14 अगस्त को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद जहां पुलिस ने एसआईटी जांच गठित की थी, वहीं डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी गठित की थी।
जांच के क्रम में तीन अक्तूबर को प्रशासन की ओर से पुलिस को रिपोर्ट भेजी गई थी जिसमें दस लोगों के लाइसेंस फर्जी बताए गए थे। पुलिस ने छह नवंबर को रिपोर्ट के आधार पर सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब दोबारा सभी की पत्रावली मिलने के बाद प्रशासनिक रिपोर्ट आई है जिसके बाद पुलिस ने आरोपी प्रशासनिक टीम पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
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प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुलिस की ओर से गलत रिपोर्ट भेजने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। एसएसपी के माध्यम से डीएम को पत्र भेजा जाना है।
सुमित शुक्ला, सीओ कैंट
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एसएसपी के माध्यम से पत्र डीएम को भेजा जाएगा। पूरे प्रकरण में डीएम को ही कार्रवाई करनी है। उधर, सात लोगों का मूल पत्र तो मिल गया लेकिन अभी विवेचक तक नहीं पहुंच सका है। विवेचक के पास प्रशासन की ओर से मूल पत्र आने के बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगाया जाएगा। 14 अगस्त को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद जहां पुलिस ने एसआईटी जांच गठित की थी, वहीं डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी गठित की थी।
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जांच के क्रम में तीन अक्तूबर को प्रशासन की ओर से पुलिस को रिपोर्ट भेजी गई थी जिसमें दस लोगों के लाइसेंस फर्जी बताए गए थे। पुलिस ने छह नवंबर को रिपोर्ट के आधार पर सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब दोबारा सभी की पत्रावली मिलने के बाद प्रशासनिक रिपोर्ट आई है जिसके बाद पुलिस ने आरोपी प्रशासनिक टीम पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
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प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुलिस की ओर से गलत रिपोर्ट भेजने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। एसएसपी के माध्यम से डीएम को पत्र भेजा जाना है।
सुमित शुक्ला, सीओ कैंट