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गोरखनाथ मंदिर की तर्ज पर बनेगा चिड़ियाघर का प्रवेश द्वार
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फोटो
गोरखनाथ मंदिर की तर्ज पर बनेगा चिड़ियाघर का प्रवेशद्वार
31 दिसंबर तक कार्यदाई संस्था को करना है निर्माण पूरा
सेंट्रल जू अथारिटी के निरीक्षण के बाद जानवरों को लाने की प्रक्रिया की जाएगी शुरू
गरिमा शाही
गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्लाह प्राणि उद्यान व डायवर्सिटी पार्क का एंट्रेंस प्लाजा (प्रवेश द्वार) गोरखनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। निर्माण अंतिम चरण में हैं। दिसंबर तक कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम को काम पूरा कर वन विभाग को सौंपना हैं। उसके बाद जानवर लाने की प्रक्रिया को तेजी से शुरू किया जाएगा। हालांकि वन विभाग जून अंतिम तक इसे लोगों के मनोरंजन लिए शुरू करने की तैयारी में है।
नौका विहार के पास करीब 121 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में चिड़ियाघर का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय धार्मिक स्थलों और उसकी महत्ता को खास तौर पर ध्यान में रखकर इसका निर्माण कराया गया है। चिड़ियाघर के प्रवेश द्वार को देखकर एकबारगी पर्यटक खुद सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि गोरखनाथ मंदिर में आए हैं, या चिड़ियाघर में। इसका प्रवेशद्वार पूरी तरह गोरखनाथ मंदिर की संरचना का आकार का होगा। इसके अलावा साइनेज प्लाजा से लेकर कैफेटेरिया और अन्य संरचनाएं भगवान बुद्ध की थीम पर आधारित होंगी। निर्माण भी अंतिम चरण में है। बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा भी चिड़ियाघर में आ गई है। निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह ने बताया कि 31 दिसंबर तक हर हाल में चिड़ियाघर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद वन विभाग को सौंप देंगे।
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वन विभाग को लगेंगे छह माह
वन विभाग के रोहित सिंह ने बताया कि कार्यदाई संस्था के निर्माण कार्य पूरा कर वन विभाग को सौंपने के बाद छह माह का समय और लगेगा। इस दौरान सेंट्रल जू अथॉरिटी की टीम निरीक्षण कर इसकी खामियों को परखेगी। अगर सब कुछ सही रहा तो जनवरी अंतिम से ही जानवरों को लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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बरेली की टीम करेगी मेडिकल परीक्षण
भारतीय पशु चिकित्सकीय अनुसंधान संस्थान बरेली के वेटेनरी डॉक्टरों की टीम पशुओं के स्वास्थ्य की परीक्षण करेगी। इसमें पशुओं की पैदाइश से लेकर कब कब बीमार रहा, इंजेक्शन लगा या नहीं, कौन-कौन सी बीमारी हो चुकी है, समेत अन्य जानकारियों के लिए परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद सर्टिफिकेट जारी करने के बाद जानवरों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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21 दिन दिन रहेंगी रिहैबिलिटेशन सेंटर में
वन विभाग से जुड़े रोहित ने बताया कि जानवरों को अलग अलग देश, प्रदेश से लाया जा रहा है। यहां के मौसम के हिसाब से ढालने के लिए जानवरों को 21 दिन तक इस रिहैबिलिटेशन सेंटर, फैरंटीन सेंटर में रखा जाएगा। उसके बाद जानवरों को चिड़ियाघर में बने उनके स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।
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गोरखनाथ मंदिर की तर्ज पर बनेगा चिड़ियाघर का प्रवेशद्वार
31 दिसंबर तक कार्यदाई संस्था को करना है निर्माण पूरा
सेंट्रल जू अथारिटी के निरीक्षण के बाद जानवरों को लाने की प्रक्रिया की जाएगी शुरू
गरिमा शाही
गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्लाह प्राणि उद्यान व डायवर्सिटी पार्क का एंट्रेंस प्लाजा (प्रवेश द्वार) गोरखनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। निर्माण अंतिम चरण में हैं। दिसंबर तक कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम को काम पूरा कर वन विभाग को सौंपना हैं। उसके बाद जानवर लाने की प्रक्रिया को तेजी से शुरू किया जाएगा। हालांकि वन विभाग जून अंतिम तक इसे लोगों के मनोरंजन लिए शुरू करने की तैयारी में है।
नौका विहार के पास करीब 121 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में चिड़ियाघर का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय धार्मिक स्थलों और उसकी महत्ता को खास तौर पर ध्यान में रखकर इसका निर्माण कराया गया है। चिड़ियाघर के प्रवेश द्वार को देखकर एकबारगी पर्यटक खुद सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि गोरखनाथ मंदिर में आए हैं, या चिड़ियाघर में। इसका प्रवेशद्वार पूरी तरह गोरखनाथ मंदिर की संरचना का आकार का होगा। इसके अलावा साइनेज प्लाजा से लेकर कैफेटेरिया और अन्य संरचनाएं भगवान बुद्ध की थीम पर आधारित होंगी। निर्माण भी अंतिम चरण में है। बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा भी चिड़ियाघर में आ गई है। निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह ने बताया कि 31 दिसंबर तक हर हाल में चिड़ियाघर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद वन विभाग को सौंप देंगे।
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वन विभाग को लगेंगे छह माह
वन विभाग के रोहित सिंह ने बताया कि कार्यदाई संस्था के निर्माण कार्य पूरा कर वन विभाग को सौंपने के बाद छह माह का समय और लगेगा। इस दौरान सेंट्रल जू अथॉरिटी की टीम निरीक्षण कर इसकी खामियों को परखेगी। अगर सब कुछ सही रहा तो जनवरी अंतिम से ही जानवरों को लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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बरेली की टीम करेगी मेडिकल परीक्षण
भारतीय पशु चिकित्सकीय अनुसंधान संस्थान बरेली के वेटेनरी डॉक्टरों की टीम पशुओं के स्वास्थ्य की परीक्षण करेगी। इसमें पशुओं की पैदाइश से लेकर कब कब बीमार रहा, इंजेक्शन लगा या नहीं, कौन-कौन सी बीमारी हो चुकी है, समेत अन्य जानकारियों के लिए परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद सर्टिफिकेट जारी करने के बाद जानवरों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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21 दिन दिन रहेंगी रिहैबिलिटेशन सेंटर में
वन विभाग से जुड़े रोहित ने बताया कि जानवरों को अलग अलग देश, प्रदेश से लाया जा रहा है। यहां के मौसम के हिसाब से ढालने के लिए जानवरों को 21 दिन तक इस रिहैबिलिटेशन सेंटर, फैरंटीन सेंटर में रखा जाएगा। उसके बाद जानवरों को चिड़ियाघर में बने उनके स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।