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कई सिपाही नहीं दाग पाए थे आंसू गैस के गोले, सिपाहियों को दोबारा दी गई ट्रेनिंग
Mon, 23 Dec 2019 10:11 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 23 Dec 2019 10:11 PM IST
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शहर की सुरक्षा का जायजा लेते पुलिस अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शहर में हुए बवाल के दौरान गोरखपुर पुलिस के कई सिपाही सात मिनट तक आंसू गैस के गोले ही नहीं दाग पाए थे। कुछ सिपाहियों के पास आंसू गैस के गोले ही नहीं थे। जिनके पास थे, वे चला ही नहीं पा रहे थे। हालत यह रही कि खुद एसपी सिटी डॉ कौस्तुभ व सीओ कोतवाली बीपी सिंह को सिपाहियों के हाथ से छीनकर आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। इसके बाद पुलिसकर्मी सक्रिय हुए।
जुमे की नमाज के बाद नखास चौराहे पर पथराव और बवाल से निपटने में पुलिस के अभ्यास और अनुभव में काफी कमी दिखी। सड़कों से ईंट-पत्थर तक नहीं हटाए गए थे। भीड़ के पथराव के दौरान अफसर आंसू गैस के गोले दागने के लिए चिल्ला रहे थे। पता चला कि आंसू गैस के गोले ही कम हैं। आननफानन में थाने से मंगवाने पड़ेे।
हद तो यह हो गई कि कई सिपाही मौके पर आंसू गैस के गोले ही नहीं दाग पाए। हालात बेकाबू होते देख अफसरों ने खुद आंसू गैस के गोले दागे तब जाकर उपद्रवियों पर काबू पाया जा सका था। सिपाहियों में प्रशिक्षण का अभाव साफ दिखाई दे रहा था। इस कमी को दुरुस्त करने के लिए सोमवार को कोतवाली के सभी चौकी के सिपाहियों को आंसू गैस के गोले दागने और दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया गया।
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जुमे की नमाज के बाद नखास चौराहे पर पथराव और बवाल से निपटने में पुलिस के अभ्यास और अनुभव में काफी कमी दिखी। सड़कों से ईंट-पत्थर तक नहीं हटाए गए थे। भीड़ के पथराव के दौरान अफसर आंसू गैस के गोले दागने के लिए चिल्ला रहे थे। पता चला कि आंसू गैस के गोले ही कम हैं। आननफानन में थाने से मंगवाने पड़ेे।
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हद तो यह हो गई कि कई सिपाही मौके पर आंसू गैस के गोले ही नहीं दाग पाए। हालात बेकाबू होते देख अफसरों ने खुद आंसू गैस के गोले दागे तब जाकर उपद्रवियों पर काबू पाया जा सका था। सिपाहियों में प्रशिक्षण का अभाव साफ दिखाई दे रहा था। इस कमी को दुरुस्त करने के लिए सोमवार को कोतवाली के सभी चौकी के सिपाहियों को आंसू गैस के गोले दागने और दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया गया।
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