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यूनिवर्सिटी ने कहा, नहीं कराएंगे छात्रसंघ चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Fri, 12 Aug 2016 08:23 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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छात्रसंघ चुनाव को लेकर पिछले पखवारे जारी हुए शासनादेश को गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने चुनाव को लेकर अपने इस रुख के लिए हाईकोर्ट के स्थगनादेश की आड़ ली है। उसने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थिति में चुनाव कराना या इसकी मांग को लेकर प्रदर्शन करना भी हाईकोर्ट की अवमानना होगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वेबसाइट पर इस संबंध में अधिसूचना जारी कर चुनाव की सभी संभावनाओं पर विराम लगा दिया है। दरअसल पिछले सप्ताह शासनादेश जारी हुआ कि प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद से तमाम छात्र संगठनों की सक्रियता अचानक बढ़ गई थी। छात्रसंघ चुनाव को लेकर शासन के सकारात्मक रुख को देखते हुए कई छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से चुनाव के तिथि की घोषणा की मांग शुरू कर दी। इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को दर्जन भर ज्ञापन भी सौंपे गए। माहौल गर्म होता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस संबंध में अपनी स्थिति साफ करनी पड़ी।
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परिषद ने यह भी आरोप लगाया है कि इस एवज में प्रोफेसर की महाविद्यालय में तैनात पत्नी को नियम विरुद्ध वरिष्ठता दी गई। उन्होंने बताया कि कथित याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार से जब संगठन की ओर से संपर्क किया तो उन्होंने मुकदमे के विषय में अनभिज्ञता जाहिर की। राकेश मौर्या ने बताया कि अब परिषद प्रदीप से संपर्क कर मुकदमा वापसी की कोशिश करेगी।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वेबसाइट पर इस संबंध में अधिसूचना जारी कर चुनाव की सभी संभावनाओं पर विराम लगा दिया है। दरअसल पिछले सप्ताह शासनादेश जारी हुआ कि प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद से तमाम छात्र संगठनों की सक्रियता अचानक बढ़ गई थी। छात्रसंघ चुनाव को लेकर शासन के सकारात्मक रुख को देखते हुए कई छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से चुनाव के तिथि की घोषणा की मांग शुरू कर दी। इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को दर्जन भर ज्ञापन भी सौंपे गए। माहौल गर्म होता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस संबंध में अपनी स्थिति साफ करनी पड़ी।
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यह है हाईकोर्ट का आदेश
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के संबंध में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष वर्ष 2012 में एक शोधार्थी प्रदीप कुमार शुक्ला की ओर से याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए 6 दिसंबर 2012 को हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर स्थगनादेश दे दिया। इसी स्थगनादेश के सहारे यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रसंघ चुनाव को लेकर शासन के आदेश को दरकिनार कर रहा है।
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याचिका पर एबीवीपी ने उठाया सवाल
छात्रसंघ चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सवाल उठाया है। परिषद के पदाधिकारियों ने इसे षडयंत्र करार दिया है। परिषद के प्रदेश मंत्री राकेश मौर्या ने दावा किया है कि यह मुकदमा प्रदीप कुमार शुक्ला ने किया ही नहीं है, बल्कि तत्कालीन कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने विश्वविद्यालय के गणित विभाग के एक शिक्षक की मदद से शोधार्थी प्रदीप कुमार शुक्ला के परिचय पत्र का दुरुपयोग किया।परिषद ने यह भी आरोप लगाया है कि इस एवज में प्रोफेसर की महाविद्यालय में तैनात पत्नी को नियम विरुद्ध वरिष्ठता दी गई। उन्होंने बताया कि कथित याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार से जब संगठन की ओर से संपर्क किया तो उन्होंने मुकदमे के विषय में अनभिज्ञता जाहिर की। राकेश मौर्या ने बताया कि अब परिषद प्रदीप से संपर्क कर मुकदमा वापसी की कोशिश करेगी।