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चित्रों के सहारे बच्चों को पौराणिक व बाल कथाएं पढ़ाने की तैयारी

Mon, 26 Dec 2016 01:04 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Mon, 26 Dec 2016 01:04 AM IST
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Gita prees now prepared childrens literarture
गीता प्रेस मे तैयार हो रहा बाल साहित्य । - फोटो : Rajesh Kumar
गीताप्रेस बाल साहित्य के क्षेत्र में नए अंदाज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। बच्चों को अपने बाल साहित्य से जोड़ने के लिए उसने चित्रों के साथ पुस्तकें छापनी शुरू कर दी हैं। रंग-बिरंगे चित्रों वाली ये पुस्तकें अमर चित्रकथा की तरह लुभा रही हैं। पहली खेप में 40 हजार किताबें छप रही हैं। गीताप्रेस प्रबंधन 15 जनवरी तक नए कलेवर में बाल साहित्य बाजार में उतार सकता है।
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इन पुस्तकों की डमी छापकर इसे फाइनल किया जा चुका है। अब पुस्तकों की छपाई का काम चल रहा है। आदर्श बाल कथाएं, आदर्श बाल कहानियां आदि नामों वाली ये पुस्तकें कवर छोड़कर 32 पेज की हैं। कवर से लेकर भीतर तक रंगीन चित्रों का भरपूर उपयोग हुआ है। भीतर के पेज आर्ट पेपर पर छपे हैं। सभी कहानियों के साथ उससे जुड़े रंगीन चित्र छापे गए हैं। इसका मकसद बच्चों को कहानियों की विषय वस्तु के प्रति आकर्षित करना है। एक पुस्तक की कीमत 25 रुपये है। उत्पाद प्रबंधक लालमणि त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों को हिंदू संस्कृति का परिचय कराने एवं उन्हें संस्कारवान बनाने की दिशा में गीताप्रेस रंगीन चित्रों वाला बाल साहित्य लाने जा रहा है। पहली कड़ी में गीताप्रेस आठ पुस्तकों की 40 हजार प्रतियां तैयार करने में जुटा है। फिलहाल अभी बाल साहित्य हिंदी भाषा में ही उपलब्ध कराया जाएगा। इसे अन्य भाषाओं में भी छापा जा सकता है।
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नए अवतार में ‘संस्कृति माला’
गीताप्रेस बच्चों को हिंदू संस्कृति के प्रेरक व्यक्तित्व और प्रसंगों से रू-ब-रू कराने के लिए पूर्व में संस्कृति माला पुस्तक प्रकाशित करता रहा है। इस पुस्तक के आठ भाग प्रकाशित हुए हैं। इसी पुस्तक को लेखक के नाम के साथ नए अंदाज में छापा जा रहा है। संस्कृति माला की जगह आदर्श बाल कहानियां, आदर्श बाल कथाएं आदि नाम से पुस्तकें छापी जा रही हैं। संस्कृति माला के हर भाग को नए नाम और नए कलेवर में पांच हजार प्रतियों में छापा जा रहा है।
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