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वजीफे के लिए छात्राओं ने किया प्रदर्शन
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2016 01:46 AM IST
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छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभविप) के नेतृत्व में सीआरडीपीजी कालेज की छात्राओं ने डीएम को ज्ञापन दिया। परिषद के महानगर मंत्री उमेश कुमार सूर्यांश ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि शासन के बार-बार के निर्देशों के बाद भी कालेज की छात्राओं का डाटा कंप्यूटर में नहीं फीड कराया जा रहा है। इससे वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति लटका पड़ा है। प्रशासन की तरफ से सख्ती की गई तो कालेज ने अपना सारा दोष लिपिकों पर डाल दिया। कहा कि लिपिकों ने डाटा फीड नहीं किया।
परिषद की कालेज छात्रा इकाई की अध्यक्ष शिखा द्विवेदी ने कहा कि अगर कालेज ने वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति संबंधित डाटा फीड नहीं किया तो अभविप आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बता दें कि 10वीं के ऊपर के जिले के करीब 90 फीसदी कालेजों ने अपने छात्र-छात्राओं की फीडिंग नहीं कराई है जिससे उनका वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति दोनों ही फंस गया है। इस संबंध में प्रशासन ने कई बार बैठकें करने के अलावा पत्र जारी कर के भी हिदायत दी मगर कोई कालेज सक्रिय नहीं हुआ। वजीफे को लेकर हर साल शैक्षणिक सत्र शुरू होने से ही सक्रिय हो जाने वाले कालेजों की इस लापरवाही पर कालेज के विद्यार्थियों से लेकर सरकारी महकमों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कहा जा रहा है कि इसके पहले कालेजों के खाते में वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम जाती थी लिहाजा वे सक्रिय रहते थे मगर अब जबकि रकम सीधे विद्यार्थी के खाते में जानी है तो कालेज प्रशासन फीडिंग के काम में अपनी ऊर्जा नहीं खर्च करना चाहता।
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परिषद की कालेज छात्रा इकाई की अध्यक्ष शिखा द्विवेदी ने कहा कि अगर कालेज ने वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति संबंधित डाटा फीड नहीं किया तो अभविप आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बता दें कि 10वीं के ऊपर के जिले के करीब 90 फीसदी कालेजों ने अपने छात्र-छात्राओं की फीडिंग नहीं कराई है जिससे उनका वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति दोनों ही फंस गया है। इस संबंध में प्रशासन ने कई बार बैठकें करने के अलावा पत्र जारी कर के भी हिदायत दी मगर कोई कालेज सक्रिय नहीं हुआ। वजीफे को लेकर हर साल शैक्षणिक सत्र शुरू होने से ही सक्रिय हो जाने वाले कालेजों की इस लापरवाही पर कालेज के विद्यार्थियों से लेकर सरकारी महकमों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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कहा जा रहा है कि इसके पहले कालेजों के खाते में वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम जाती थी लिहाजा वे सक्रिय रहते थे मगर अब जबकि रकम सीधे विद्यार्थी के खाते में जानी है तो कालेज प्रशासन फीडिंग के काम में अपनी ऊर्जा नहीं खर्च करना चाहता।
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