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नेट मीटर से सोलर एनर्जी ‘कैश’ करेगा जीडीए
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 24 May 2017 01:46 AM IST
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सौर ऊर्जा
- फोटो : डेमो पिक
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में जुट गया है। अब जीडीए अपने दफ्तर को रौशन करने के लिए सोलर पैनल के जरिए बिजली पैदा करेगा। सब ठीक रहा तो निकट भविष्य में सौर पैनल से पैदा हुई बिजली को जीडीए नेट मीटर से ग्रिड को भेजकर कैश भी करेगा। जीडीए ने इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया है। शुरुआती चरण में 10 किलोवाट का सोलर पैनल जीडीए दफ्तर की छत पर लगाया जा चुका है।
जीडीए के इस प्रयोग से दफ्तर में उपयोग होने वाली बिजली का खर्च काफी कम हो जाएगा। लंबे समय तक सोलर पैनल जीडीए का बिजली बिल कम करने के काम आएगा। इसके साथ ही बिजली कटने की सूरत में बिना जेनरेटर चलाए दफ्तर के बत्ती-पंखे चल सकेंगे। जीडीए बिजली शाखा के अधिशासी अभियंता पंकज तिवारी ने बताया कि बिजली पैदा करने के परंपरागत स्रोत सीमित हैं। ऐसे में आने वाला दौर गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का है। शासन की भी मंशा गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की है। इसी कड़ी में जीडीए उपाध्यक्ष ने दफ्तर की बिजली के लिए सोलर पैनल लगाने के लिए कहा था। अभी ट्रायल के तौर पर 10 किलोवाट का सोलर पैनल दफ्तर की छत पर लगाया गया है। भविष्य में इसे बढ़ावा देने की योजना है।
जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने मंगलवार को दफ्तर के छत पर लगे सोलर पैनल की प्रगति जांची। इस दौरान उन्होंने अधिशासी अभियंता को सोलर पैनल को नेट मीटर से जोड़ने की व्यवस्था करने को कहा। ताकि सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली ग्रिड को भेजी जा सके।
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ये है नेट मीटर
नेट मीटर सोलर पैनल और बिजली कनेक्शन को एक साथ जोड़ता है। बिजली गुल होने की सूरत में नेट मीटर सोलर एनर्जी को इस्तेमाल में लाता है और बिजली होने पर सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड को भेज देता है। इसके बदले बिजली विभाग बिल में छूट देता है।
सौर ऊर्जा से होंगे रौशन होगा वसुंधरा इनक्लेव
गोरखपुर। जीडीए ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अपनी एक कॉलोनी की स्ट्रीट लाइट और पार्क में लगी लाइटों को सोलर पैनल से ऊर्जीकृत करने की योजना बनाई है। इसके लिए टेंडर निकाला गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। कॉलोनी की स्ट्रीट लाइटें और पार्क की बत्तियों को रौशन करने के लिए जीडीए यहां 10 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाने जा रहा है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगी सोलर एनर्जी
सोलर एनर्जी न सिर्फ बिजली के खर्च पर काबू पाने का बेहतर विकल्प है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बेहद उपयोगी है। सूबे में बिजली उत्पादन कोयले से होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन भी खूब होता है। वहीं, सोलर एनर्जी में इस तरह का उत्सर्जन नहीं होता। इसलिए केंद्र और सूबे की सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में जुटी है।
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जीडीए के इस प्रयोग से दफ्तर में उपयोग होने वाली बिजली का खर्च काफी कम हो जाएगा। लंबे समय तक सोलर पैनल जीडीए का बिजली बिल कम करने के काम आएगा। इसके साथ ही बिजली कटने की सूरत में बिना जेनरेटर चलाए दफ्तर के बत्ती-पंखे चल सकेंगे। जीडीए बिजली शाखा के अधिशासी अभियंता पंकज तिवारी ने बताया कि बिजली पैदा करने के परंपरागत स्रोत सीमित हैं। ऐसे में आने वाला दौर गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का है। शासन की भी मंशा गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की है। इसी कड़ी में जीडीए उपाध्यक्ष ने दफ्तर की बिजली के लिए सोलर पैनल लगाने के लिए कहा था। अभी ट्रायल के तौर पर 10 किलोवाट का सोलर पैनल दफ्तर की छत पर लगाया गया है। भविष्य में इसे बढ़ावा देने की योजना है।
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जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने मंगलवार को दफ्तर के छत पर लगे सोलर पैनल की प्रगति जांची। इस दौरान उन्होंने अधिशासी अभियंता को सोलर पैनल को नेट मीटर से जोड़ने की व्यवस्था करने को कहा। ताकि सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली ग्रिड को भेजी जा सके।
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ये है नेट मीटर
नेट मीटर सोलर पैनल और बिजली कनेक्शन को एक साथ जोड़ता है। बिजली गुल होने की सूरत में नेट मीटर सोलर एनर्जी को इस्तेमाल में लाता है और बिजली होने पर सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड को भेज देता है। इसके बदले बिजली विभाग बिल में छूट देता है।
सौर ऊर्जा से होंगे रौशन होगा वसुंधरा इनक्लेव
गोरखपुर। जीडीए ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अपनी एक कॉलोनी की स्ट्रीट लाइट और पार्क में लगी लाइटों को सोलर पैनल से ऊर्जीकृत करने की योजना बनाई है। इसके लिए टेंडर निकाला गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। कॉलोनी की स्ट्रीट लाइटें और पार्क की बत्तियों को रौशन करने के लिए जीडीए यहां 10 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाने जा रहा है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगी सोलर एनर्जी
सोलर एनर्जी न सिर्फ बिजली के खर्च पर काबू पाने का बेहतर विकल्प है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बेहद उपयोगी है। सूबे में बिजली उत्पादन कोयले से होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन भी खूब होता है। वहीं, सोलर एनर्जी में इस तरह का उत्सर्जन नहीं होता। इसलिए केंद्र और सूबे की सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में जुटी है।