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फर्जी शस्त्र लाइसेंस : आखिरी आरोपी का भी अभिलेख मिला, नकल जारी
Sat, 07 Dec 2019 11:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 11:04 AM IST
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- फोटो : amar ujala
फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले में खोराबार थाने से जिन 10 बेगुनाहों को पुलिस ने जेल भेजा था, उनमें से अंतिम आरोपी जगदीश शुक्ला के भी मूल अभिलेख मिल गए हैं। बृहस्पतिवार को ही जिला प्रशासन ने उन्हें सत्यापित नकल भी जारी कर दी। उन्होंने नकल के लिए दो दिसंबर को एडीएम (सिटी) के पास आवेदन किया था।
जगदीश, बेतियाहाता स्थित यूनियन बैंक की शाखा पर सिक्योरिटी गार्ड हैं। इसके पहले वह पूर्व मेयर आशा देवी उर्फ अमरनाथ यादव, अंजू चौधरी और डॉ सत्या पांडेय के अलावा नगर निगम और जीडीए में भी सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात रह चुके हैं।
फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में खोराबार थाने से एक साथ 10 बेगुनाहों को छह अक्तूबर को जेल भेज दिया गया था। उधर इस मामले में एक अन्य आरोपी व सरदारनगर में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के प्रधान सहायक पद पर तैनात रामहित यादव का भी निलंबन जल्द निरस्त कर दिया जाएगा। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में फंसे दो सरकारी कर्मचारियों का निलंबन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। रामहित प्रार्थनापत्र दें, उनका निलंबन भी निरस्त कर दिया जाएगा। रामहित ने 14 अगस्त 2000 को सिंगल बैरल बंदूक (लाइसेंस संख्या3301/ खोराबार) ली थी।
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ये 10 लोग भेजे गए थे जेल
दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जंगल सिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी रामअशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी रामचन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था।
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जगदीश, बेतियाहाता स्थित यूनियन बैंक की शाखा पर सिक्योरिटी गार्ड हैं। इसके पहले वह पूर्व मेयर आशा देवी उर्फ अमरनाथ यादव, अंजू चौधरी और डॉ सत्या पांडेय के अलावा नगर निगम और जीडीए में भी सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात रह चुके हैं।
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में खोराबार थाने से एक साथ 10 बेगुनाहों को छह अक्तूबर को जेल भेज दिया गया था। उधर इस मामले में एक अन्य आरोपी व सरदारनगर में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के प्रधान सहायक पद पर तैनात रामहित यादव का भी निलंबन जल्द निरस्त कर दिया जाएगा। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में फंसे दो सरकारी कर्मचारियों का निलंबन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। रामहित प्रार्थनापत्र दें, उनका निलंबन भी निरस्त कर दिया जाएगा। रामहित ने 14 अगस्त 2000 को सिंगल बैरल बंदूक (लाइसेंस संख्या3301/ खोराबार) ली थी।
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ये 10 लोग भेजे गए थे जेल
दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जंगल सिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी रामअशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी रामचन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था।