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बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स ही नहीं, खरीदार भी जांच की जद में

Wed, 18 Sep 2019 01:51 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 01:51 AM IST
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fraud in stamp duty gorakhpur
बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स ही नहीं, खरीदार भी जांच की जद में
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गोरखपुर। शहर के बड़े बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स ही नहीं, उनसे प्लॉट लेने वाले भी जांच की जद में है। कमिश्नर के निर्देश पर बनी तीन सदस्यीय जांच कमेटी इन बिल्डर एवं कॉलोनाइजर्स से प्लॉट लेने वालों के डीड की भी जांच करेगी। अगर किसी ने आवासीय जमीन को कृषि बताकर बैनामा कराया होगा तो उसके भी स्टांप ड्यूटी की कमी का निर्धारण कर रकम की वसूली जाएगी ।
शहर के एक बिल्डर द्वारा आवासीय जमीन को कृषि दिखाकर खरीदने और फि र उसे आवासीय में बेचने की शिकायत पर डीआईजी स्टांप रामानंद सिंह ने जांच की थी। जांच में पाया गया कि जीडीए से ले-आउट आवासीय स्वीकृत हुआ, जबकि कॉलोनाइजर्स ने जमीन कृषि दिखाकर बैनामा कराया, जिससे विभाग को स्टांप ड्यूटी के तौर पर चार करोड़ की चपत की आशंका है। कॉलोनाइजर्स पर स्टांप कमी के मामले में एआईजी स्टांप के कोर्ट में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं चार करोड़ की स्टांप कमी का चौंकाने वाला मामला सामने आने के बाद कमिश्नर जयंत नार्लीकर के निर्देश पर डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने शहर के सभी बड़े बिल्डर्स एवं कॉलोनाइजर्स द्वारा विकसित कॉलोनी और अपार्टमेंट की जमीनों के बैनामों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी ने बिल्डर्स एवं कॉलोनाइजर्स की जमीन के बैनामों के डीड के साथ ही सभी के जीडीए से ले-आउट संबंधी दस्तावेज जुटाना शुरू कर दिया है। इनकी जांच के बाद कमेटी उन सभी बैनामों की जांच करेगी, जिन्हें इन कॉलोनाइजर्स ने बेची है। अगर प्लाट लेने वाले भी बैनामों की डीड में जमीन का सही प्रकार और लोकेशन नहीं दर्शाया होगा तो उन पर भी केस दर्ज कर कम पाए जाने वाले स्टांप ड्यूटी की कमी का निर्धारण कर उनसे उसकी वसूली होगी ।
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सभी बड़े कॉलोनाइजर्स एवं बिल्डर्स के लेआउट जीडीए से प्राप्त कर लिए गए हैं। ज्यादातर बैनामों की डीड भी रजिस्ट्री दफ्तर से हासिल कर ली गई है। कुछ डीड बाकी हैं, उनके मिलते ही सभी की जांच एक साथ शुरू कर दी जाएगी। कॉलोनाइजर्स से जमीन खरीदने वालों के भी बैनामों की डीड जांची जाएगी।
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रामानंद सिंह, डीआईजी स्टांप व सदस्य जांच कमेटी
आवासीय से कृषि जमीन का सर्किल रेट आधा
आवासीय की तुलना में कृषि जमीन का डीएम सर्किल रेट ठीक आधा होता है। सर्किल रेट के ही मुताबिक स्टांप ड्यूटी तय होती है। यानी अगर किसी सामान क्षेत्रफ ल की आवासीय जमीन के बैनामे में एक लाख कीमत का स्टांप लगता है तो कृषि भूमि के लिए मात्र 50 हजार रुपये ही देने पड़ेंगे। यही वजह है कि बैनामों की डीड में आवासीय की जगह कृषि दर्ज कर स्टांप ड्यूटी बचाने का खेल होता है। प्रशासन को भी शहर के कुछ बड़े बिल्डर. कालोनाइजर द्वारा ऐसा ही खेल कर स्टांप ड्यूटी में 20 करोड़ की हेरफेर करने का संदेह है। सिर्फ एक कालोनाइजर के बैनामों की ही जांच में चार करोड़ की हेरफेर का मामला सामने आ चुका है।
तहसील, रजिस्ट्री दफ्तर और जीडीए के बीच झूल रहे कई
तहसील, रजिस्ट्री दफ्तर और प्राधिकरण में समन्वय नहीं होने से जिले के सैकड़ों लोग अपना भू-प्रयोग तो नहीं ही बदलवा पा रहे, बल्कि भ्रष्टाचार के भी शिकार हो रहे हैं। शहर के बीच ही जीडीए सीमा क्षेत्र में आने वाली कई जमीनों का भू-प्रयोग कृषि है। कई पर मकान भी बन चुके हैं। वहां रहने वाले कई बार अपनी जमीन का भू-प्रयोग बदलकर आवासीय कराने के लिए तहसील में आवेदन भी कर चुके हैं ,लेकिन सफ लता कुछ को ही मिल पाई। नियमानुसार समय समय पर राजस्व के अभिलेख दुरुस्त होने चाहिए मगर लेखपाल और तहसील प्रशाशन ही नहीं शासन भी इस तरफ ध्यान नहीं देता। नतीजतन कभी जो जमीन अभिलेखों में कृषि दर्ज थी वह शहर, कस्बों या आबादी बस जाने के बाद भी अभी तक कृषि ही बनी हुई है। तहसील से जमीन का भू-प्रयोग आसानी से बदलता नहीं और जब कोई व्यक्ति उस जमीन को खरीदने के लिए बैनामे की डीड में कृषि जमीन बताता है तो रजिस्ट्री महकमा उसकी गर्दन पकड़ लेता ।

दशक भर पहले डीएम आवास की जमीन भी थी कृषि की
तहसील प्रशासन की संजीदगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज एक दशक पहले तक डीएम आवास जिस जमीन पर बना है, अभिलेखों में वह जमीन भी कृषि के नाम दर्ज थी । बात 2008-2009 की है। मोहरीपुर का एक व्यक्ति आवास बनने के बाद भी जमीन का भू प्रयोग कृषि से आवासीय नहीं हो पाने से दुखी होकर तत्कालीन डीएम रणजीत सिंह पंकज के पास दरख्वास्त लेकर पहुंचाकर शिकायत की थी कि आसपास आबादी होने के बाद भी तहसील प्रशासन उसकी जमीन का भू-प्रयोग कृषि से आवासीय नहीं कर रहा। उसकी शिकायत की जांच पड़ताल के दौरान ही रणजीत सिंह पंकज के सामने यह बात आई की उनके आवास की जमीन भी अभिलेखों में कृषि भूमि दर्ज है। इस पर उन्होंने अभिलेख चेक कराए तो बात सही निकली। उन्होंने तत्काल तहसील के अफ सरों को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और तत्काल अभिलेख दुरुस्त करने का निर्देश दिया जिसके बाद डीएम आवास की जमीन राजस्व अभिलेखों में आवासीय दर्ज हो सकी ।
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