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24 घंटे में पांच और मासूमों ने दम तोड़ा

Wed, 03 Aug 2016 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Wed, 03 Aug 2016 01:23 AM IST
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Five more children died due to encephalytis in 24 hrs
मेडिकल कालेज के इंसेफलाइटिस इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक ही बेड पर दो मरीज । - फोटो : Mahesh Kumar
इंसेफेलाइटिस से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। 24 घंटे के भीतर पांच और मासूमों की मौत हो गई, जबकि छह नए मरीज भर्ती किए गए। एक दिन में इतनी मौतों पर अस्पताल प्रशासन ने भी कई निर्देश जारी किए हैं। न सिर्फ दवाओं की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है बल्कि कुछ दवाएं मंगाई भी गई हैं। मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष इस बीमारी से अब तक 104 लोगों की मौत हो चुकी है।
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इंसेफेलाइटिस से जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें कुशीनगर खड्डा की नंदनी (6) पुत्री अशोक, खजनी के विपिन (10) पुत्र बृजनाथ, राहुल (13), पुत्र दरोगा कप्तानगंज कुशीनगर, फरमान (2) पुत्र अनवर अली ब्रिजमनगंज महराजगंज और एक अन्य शामिल है। इसके अलावा गोरखपुर, देवरिया से एक-एक, कुशीनगर और बिहार से दो-दो मरीजों को कराया किया गया है। बाल रोग विभाग में भर्ती इंसेफेलाइटिस के मरीजों को वार्ड नंबर छह में शिफ्ट कर दिया गया है ताकि ये डॉक्टरों की निगरानी में रहें।
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इस वर्ष अब तक 393 मरीज भर्ती कराए जा चुके हैं। इनमें 104 लोगों की मौत हो चुकी है। 68 मरीजों का इलाज चल रहा है। मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस पीड़ितों की संख्या बढ़ने से इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। ऊपर से एसी खराब होने से मरीजों को दिक्कत भी उठानी पड़ रही है। कई तीमारदारों ने खुद ही पंखे की व्यवस्था की है ताकि उन्हें आराम पहुंच सके। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने एसी मरम्मत का काम शुरू करा दिया है मगर देर शाम तक उसे दुरुस्त नहीं कराया जा सका था।
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बदइंतजामी बढ़ा रही मरीजों का दर्द

बरसात के साथ जहां इंसेफेलाइटिस का दंश पूर्वांचल के लिए बड़ी समस्या बन जाता है, वहीं इस संकट की आमद का अंदाजा पहले से होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा मजबूत होमवर्क की मिसाल पेश करने में हमेशा ही चूकता है। इस दफा भी जहां इंतजामों की कमी से सीएचसी और कई जनपदों के जिला अस्पताल इंसेफेलाइटिस मरीजों के मामले में रेफर यूनिट की भूमिका ही निभा रहे हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज पहुंचने वालों को भी तुरंत राहत दे पाने का इंतजाम अधूरा है।


इस साल अभी तक 393 इंसेफेलाइटिस पीड़ित मेडिकल कॉलेज पहुंच चुके हैं तो 68 मरीजों को इस वक्त इलाज चल रहा है। बेड कम पड़ने से जहां कई अभिभावकों को एक बेड पर दो इंसेफेलाइटिस पीड़ितों को लिटाने की चुनौती का सामना करना पड़ा, वहीं इमरजेंसी के खराब एसी ने बीमार बच्चों की तकलीफ और बढ़ा दी। गर्मी और उमस के बीच बच्चों को राहत देने के लिए कोई अभिभावक हाथ के पंखे का बंदोबस्त करने को मजबूर हुआ तो कुछ बाजार अथवा रिश्तेदारी से टेबल फेन लाने के लिए।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अचानक तकनीकी खामी से एसी ने काम करना बंद कर दिया। मरम्मत का काम शुरू करा दिया है, जल्द दुरुस्त हो जाएगा। 
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