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राख से सामान समेटते रहे दुकानदार  

Sat, 27 May 2017 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 27 May 2017 12:56 AM IST
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Fire in Baldev plaza
आग से नुकसान के बाद सफाई कराते दुकानदार। - फोटो : Amar Ujala
बलदेव प्लाजा में लगी आग की घटना दूसरे दिन भी शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था। आठ दुकानों के अंदर सामान लगभग राख हो चुके थे, फिर भी नुकसान से उभरने की कोशिश में लगे दुकानदार राख में से बचाखुचा सामान समेटते दिखे।
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24 घंटे के बाद भी शुक्रवार को बलदेव प्लाजा में आग से हुए नुकसान का मंजर साफ नजर आ रहा था। निचले तल में पानी भरा हुआ था। दुकानदार एवं कर्मचारी इस पानी को निकालने में लगे रहे। जलने की दुर्गंध लगातार प्लाजा में बनी हुई थी। सफाई कर्मचारी भी जुटे हुए थे। दुकानदारों ने किसी तरह से जली हुई दुकानों के अंदर रोशनी की व्यवस्था की और राख में बचाखुचा सामान ढूंढकर इकट्ठा करने लगे। इसके बाद राख को बड़े पतीलों में भरकर ऑटो में लोड कराया। जगह-जगह जूतों के निशान से राख के काले धब्बे अपनी छाप छोड़ रहे थे। हर कोई इस घटना से काफी दुखी था। ग्राहकों के अलावा दूरदराज से आए लोग भी प्लाजा के हालात देखकर आग की भयावहता का अंदाजा लगा रहे थे। प्लाजा में आग से राधेश्याम ज्वैलर्स की दुकान में 1 करोड़ की क्षति हुई है। दुकान का इंश्योरेंस नहीं है। इसे लेकर दुकान के मालिक नारायण खेमका और व्यापारी परेशान हैं।
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दुकानदारों में अव्यवस्था को लेकर खासा रोष  
गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा में आग बुझाने के लिए लगाए गए सुरक्षा उपकरण अगर सही होते तो अग्निकांड में हुए नुकसान को कम किया जा सकता था। लेकिन प्लाजा में सुरक्षा इंतजाम इतने कमजोर हैं कि जरूरत के वक्त सभी फेल साबित हुए। टंकियों में पानी न होना और बचाव के संसाधन जुटाने के दौरान आग को इतना वक्त मिल गया कि उसने आठ दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। कमोवेश शहर के विभिन्न इलाकों में बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का यही हाल है। 
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असुरन चौक स्थित राप्ती कॉम्प्लेक्स, टाउनहाल स्थित भालोटिया मार्केट, शाही मार्केट, छाया कॉम्प्लेक्स सहित कई ऐसे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सेंटर हैं, जहां आग से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इन सभी में सुरक्षा मानकों से जबरदस्त खिलवाड़ किया जा रहा है। बिजली के तार मकड़जाल की तरह लटके हुए हैं। अधिकांश कॉम्प्लेक्स में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं और जहां हैं तो एक्सपायर्ड। ऐसे में अगर कहीं आग लगती है तो इन पर काबू पाना फायर ब्रिगेड के लिए काफी मुश्किल होगा। 
बलदेव प्लाजा में भी आग से बचाव के इंतजाम न होने से कई दुकानदारों को लाखों का नुकसान हुआ है। इससे उनमें प्लाजा की अव्यवस्था को लेकर खासा रोष है। उनका कहना था कि
गोरखपुर का इतना विस्तार हो गया है कि उनके मुकाबले सुविधाएं जीरो हैं। 

कई दिनों से खराब थी मोटर
भगवान का शुक्र है कि आग उनकी दुकान पर आकर थम गई। उनका रेडीमेड कपड़ों का कारोबार है। आग बढ़ती तो बलदेव प्लाजा को भी कोई नहीं बचा सकता था। प्लाजा की मोटर कई दिनों से खराब थी। टंकी में पानी नहीं था, अगर पानी होता तो नुकसान कम होता।
- अभिषेक

समय पर उपकरण ने नहीं दिया साथ
प्लाजा में सेफ्टी सिस्टम है, लेकिन समय पर सब फेल हो गए। 4 वर्षों में ये कभी चेक नहीं किए गए। बिजली की लाइन कहां से जा रही है, कैसे जानी चाहिए, नहीं देखा गया है। टंकी में पानी न होने पर दमकल भी जवाब दे गया था, ऐसे में उन्हें खुद पानी के टैंकर की व्यवस्था करनी पड़ी थी। 
- नारायण खेमका

आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी तो थे ही, फायर ब्रिगेड के इंतजाम थोड़े कम पड़ गए। दमकल की ओर से 2 पाइप के बजाय अगर आठ पानी की पाइप आग बुझाने में लगाई जाती तो आग को बढ़ने से रोका जा सकता था।

- दीपक छापड़िया 

फायर ब्रिगेड के पास भी उपकरण कम
दमकल कर्मियों के पास आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे। न मॉस्क था, न वैसी ड्रेस थी, जिसकी मदद से वे आगे बढ़कर आग को रोक पाते। इससे आग पर काबू पाने में थोड़ी देर लग गई। 
- अनूप कुमार
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