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स्टेपिंग स्टोन स्कूल पर 34,700 रुपये का जुर्माना
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स्टेपिंग स्टोन स्कूल पर 34,700 रुपये का जुर्माना
गोरखपुर। बारहवीं में सीबीएससी से मान्यता बताकर विद्यार्थी का प्रवेश लेने और आईसीएससी बोर्ड का परीक्षा प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मसूद अली सिद्दीकी और सदस्य बृजेश कुमार मिश्र ने सूर्यकुंड सुभाष चंद्र बोस नगर स्थित स्टेपिंग स्टोन स्कूल के विरुद्ध निर्णय दिया है। फोरम ने स्कूल के प्रधानाचार्य को महुई सुघरपुर फुलवरिया शिवपुर कॉलोनी निवासी राम मिलन साहनी के पुत्र संजय साहनी की ली गई फीस 27 हजार दो सौ रुपये तथा 75 सौ रुपये वाद व्यय और क्षतिपूर्ति छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।
फोरम के समक्ष विद्यार्थी संजय के पिता राम मिलन साहनी ने परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया था कि पुत्र संजय साहनी ने हाईस्कूल की परीक्षा सीबीएसई से गोरखपुर पब्लिक स्कूल से उत्तीर्ण की थी। कक्षा-11 में प्रवेश के लिए उसने स्टेपिंग स्कूल में संपर्क किया तो वहां बताया गया कि स्कूल की बारहवीं के लिए मान्यता सीबीएससी से है। एडमिशन लेने के बाद चला कि स्कूल की मान्यता आईसीएससी बोर्ड से है। दोनों बोर्ड के पाठ्यक्रम में काफी अंतर होने पर संजय ने आगे पढ़ाई में असमर्थता व्यक्त करते हुए फीस वापस करने की मांग की। फोरम में विद्यालय ने आरोपों को गलत बताया। फोरम ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
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गोरखपुर। बारहवीं में सीबीएससी से मान्यता बताकर विद्यार्थी का प्रवेश लेने और आईसीएससी बोर्ड का परीक्षा प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मसूद अली सिद्दीकी और सदस्य बृजेश कुमार मिश्र ने सूर्यकुंड सुभाष चंद्र बोस नगर स्थित स्टेपिंग स्टोन स्कूल के विरुद्ध निर्णय दिया है। फोरम ने स्कूल के प्रधानाचार्य को महुई सुघरपुर फुलवरिया शिवपुर कॉलोनी निवासी राम मिलन साहनी के पुत्र संजय साहनी की ली गई फीस 27 हजार दो सौ रुपये तथा 75 सौ रुपये वाद व्यय और क्षतिपूर्ति छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।
फोरम के समक्ष विद्यार्थी संजय के पिता राम मिलन साहनी ने परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया था कि पुत्र संजय साहनी ने हाईस्कूल की परीक्षा सीबीएसई से गोरखपुर पब्लिक स्कूल से उत्तीर्ण की थी। कक्षा-11 में प्रवेश के लिए उसने स्टेपिंग स्कूल में संपर्क किया तो वहां बताया गया कि स्कूल की बारहवीं के लिए मान्यता सीबीएससी से है। एडमिशन लेने के बाद चला कि स्कूल की मान्यता आईसीएससी बोर्ड से है। दोनों बोर्ड के पाठ्यक्रम में काफी अंतर होने पर संजय ने आगे पढ़ाई में असमर्थता व्यक्त करते हुए फीस वापस करने की मांग की। फोरम में विद्यालय ने आरोपों को गलत बताया। फोरम ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
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