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दो फर्जी शिक्षक बर्खास्त, तीन पर कार्रवाई की तलवार
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दो फर्जी शिक्षक बर्खास्त, तीन पर कार्रवाई की तलवार
गोरखपुर। फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी करने वाले दो शिक्षकों को बीएसए ने शनिवार को बर्खास्त कर दिया है। वहीं तीन अन्य शिक्षकों पर जल्दी ही कार्रवाई होगी। जिले में 2010 से नियुक्ति हासिल करने वाले दोनों शिक्षकों के प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए।
बेलघाट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुरी बाजार पर कार्यरत सहायक अध्यापक अनिल कुमार सिंह के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने की शिकायत की गई थी। एसटीएफ की टीम ने भी अनिल का नाम विभाग को संदिग्ध शिक्षक के रूप में दिया था। विभाग ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्रों की जांच कराई तो वे सही पाए गए। स्नातक और बीएड के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए जब संबंधित संस्था के पते पर पेपर भेजे गया तो यह बात स्पष्ट हुई कि पता फर्जी है। अनिल की नियुक्ति अगस्त 2010 में हुई थी।
वहीं जंगल कौड़िया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भम्भौर में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत राकेश सिंह ने 2008 में वेतन बिल के साथ जो पैन कार्ड लगाया था, उसे हाल ही में बदल दिया था। जन्मतिथि व अपना नाम तो यथावत रखा लेकिन पिता के नाम में आंशिक संशोधन के साथ ही पैन कार्ड का नंबर भी बदल दिया। वित्त एवं लेखाधिकारी के यहां पैन कार्ड बदलने के लिए आवेदन किया तो उसे जांच के लिए बीएसए को भेज दिया गया। जांच में पता चला कि पैन कार्ड फर्जी था। गहराई से जांच में राकेश के प्रमाण पत्र भी कूटरचित मिले। दोनों के ऊपर एफआइआर दर्ज कराकर वेतन एवं भत्तों की वसूली की जाएगी।
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गोरखपुर। फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी करने वाले दो शिक्षकों को बीएसए ने शनिवार को बर्खास्त कर दिया है। वहीं तीन अन्य शिक्षकों पर जल्दी ही कार्रवाई होगी। जिले में 2010 से नियुक्ति हासिल करने वाले दोनों शिक्षकों के प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए।
बेलघाट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुरी बाजार पर कार्यरत सहायक अध्यापक अनिल कुमार सिंह के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने की शिकायत की गई थी। एसटीएफ की टीम ने भी अनिल का नाम विभाग को संदिग्ध शिक्षक के रूप में दिया था। विभाग ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्रों की जांच कराई तो वे सही पाए गए। स्नातक और बीएड के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए जब संबंधित संस्था के पते पर पेपर भेजे गया तो यह बात स्पष्ट हुई कि पता फर्जी है। अनिल की नियुक्ति अगस्त 2010 में हुई थी।
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वहीं जंगल कौड़िया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भम्भौर में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत राकेश सिंह ने 2008 में वेतन बिल के साथ जो पैन कार्ड लगाया था, उसे हाल ही में बदल दिया था। जन्मतिथि व अपना नाम तो यथावत रखा लेकिन पिता के नाम में आंशिक संशोधन के साथ ही पैन कार्ड का नंबर भी बदल दिया। वित्त एवं लेखाधिकारी के यहां पैन कार्ड बदलने के लिए आवेदन किया तो उसे जांच के लिए बीएसए को भेज दिया गया। जांच में पता चला कि पैन कार्ड फर्जी था। गहराई से जांच में राकेश के प्रमाण पत्र भी कूटरचित मिले। दोनों के ऊपर एफआइआर दर्ज कराकर वेतन एवं भत्तों की वसूली की जाएगी।
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