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पूर्व मंत्री के सियासी सफर पर लग गया विराम
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:04 AM IST
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पूर्व मंत्री
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टीपी शाही
पिपराइच विधानसभा से लगातार तीन बार निर्दलीय विधायक तथा दो मुख्यमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भैया का सियासी सफर आजीवन कारावास की सजा के साथ फिलहाल खत्म हो गया। सपा के कद्दावर नेता रहे जमुना निषाद को पटखनी देने के साथ ही उन्होंने दस्यु सुंदरी फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह को भी 1996 के चुनाव में हराया था। 2007 के चुनाव में जब वह हाथी पर सवार हुए तो जमुना से मात खा गए। वर्तमान समय में उनकी नजदीकी भाजपा से थी और माना जा रहा था कि वह इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।
जितेंद्र जायसवाल के सियासी सफर की शुरुआत 1993 से हुई। तब ओमप्रकाश पासवान विधायक थे। उन्होंने ही उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था। वह पहले ही चुनाव में प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य बन गए। तब से वह लगातार तीन बार 1993, 1996, 2002 में विधायक चुने गए। वह रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में राज्यमंत्री भी बनाए गए थे। निर्दल विधायकों का नेतृत्व करने वाले राजा भैया के संपर्क में आने के बाद वह उनके भी करीबी हो गए थे। उनके पिता शराब के बड़े कारोबारियों में आज भी जाने जाते हैं।
पिपराइच में पप्पू का हर बार मुकाबला जमुना निषाद से ही होता था। जमुना निषाद लगातार छह बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा का चुनाव हारने के बाद 2007 के चुनाव में हाथी पर सवार हो गए। इस बार सहानुभूति की आधी में पप्पू का किला ध्वस्त हो गया। 2010 में जब जमुना का मार्ग दुर्घटना में निधन हुआ तो उस समय पप्पू भी बसपा में आ गए थे। 2011 में हुए उपचुनाव में जमुना की पत्नी राममति ने सपा का दामन थाम लिया। इस चुनाव में पप्पू निर्दल प्रत्याशी के रूप में लड़े, मगर हार गए। यही नहीं, 2012 का चुनाव पप्पू ने बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन इस बार फिर उन्हें जमुना निषाद की पत्नी से हार का सामना करना पड़ा।
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2007 से ही पप्पू के सितारे गर्दिश में थे। कभी महंत आदित्यनाथ के विरोधियों में शामिल रहे पप्पू की इधर बीच भाजपा से नजदीकी बढ़ गई थी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जगह-जगह उनकी होर्डिंग और पोस्टर लगे थे। माना जा रहा था कि इस बार वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। पिपराइच में भाजपा के कई दावेदार हैं, पर उनकी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी।
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पिपराइच विधानसभा से लगातार तीन बार निर्दलीय विधायक तथा दो मुख्यमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भैया का सियासी सफर आजीवन कारावास की सजा के साथ फिलहाल खत्म हो गया। सपा के कद्दावर नेता रहे जमुना निषाद को पटखनी देने के साथ ही उन्होंने दस्यु सुंदरी फूलन देवी के पति उम्मेद सिंह को भी 1996 के चुनाव में हराया था। 2007 के चुनाव में जब वह हाथी पर सवार हुए तो जमुना से मात खा गए। वर्तमान समय में उनकी नजदीकी भाजपा से थी और माना जा रहा था कि वह इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।
जितेंद्र जायसवाल के सियासी सफर की शुरुआत 1993 से हुई। तब ओमप्रकाश पासवान विधायक थे। उन्होंने ही उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था। वह पहले ही चुनाव में प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य बन गए। तब से वह लगातार तीन बार 1993, 1996, 2002 में विधायक चुने गए। वह रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में राज्यमंत्री भी बनाए गए थे। निर्दल विधायकों का नेतृत्व करने वाले राजा भैया के संपर्क में आने के बाद वह उनके भी करीबी हो गए थे। उनके पिता शराब के बड़े कारोबारियों में आज भी जाने जाते हैं।
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पिपराइच में पप्पू का हर बार मुकाबला जमुना निषाद से ही होता था। जमुना निषाद लगातार छह बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा का चुनाव हारने के बाद 2007 के चुनाव में हाथी पर सवार हो गए। इस बार सहानुभूति की आधी में पप्पू का किला ध्वस्त हो गया। 2010 में जब जमुना का मार्ग दुर्घटना में निधन हुआ तो उस समय पप्पू भी बसपा में आ गए थे। 2011 में हुए उपचुनाव में जमुना की पत्नी राममति ने सपा का दामन थाम लिया। इस चुनाव में पप्पू निर्दल प्रत्याशी के रूप में लड़े, मगर हार गए। यही नहीं, 2012 का चुनाव पप्पू ने बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन इस बार फिर उन्हें जमुना निषाद की पत्नी से हार का सामना करना पड़ा।
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2007 से ही पप्पू के सितारे गर्दिश में थे। कभी महंत आदित्यनाथ के विरोधियों में शामिल रहे पप्पू की इधर बीच भाजपा से नजदीकी बढ़ गई थी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जगह-जगह उनकी होर्डिंग और पोस्टर लगे थे। माना जा रहा था कि इस बार वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। पिपराइच में भाजपा के कई दावेदार हैं, पर उनकी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी।