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466 करोड़ से मिलेगी तारों के जाल से निजात
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 06 May 2017 01:30 AM IST
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तारों का जाल।
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बिजली महकमे ने शहर को तारों के जंजाल से मुक्ति दिलाने की योजना तैयार की है। 12 उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बिजली के तार भूमिगत कराए जाएंगे। इस पर कुल 466 करोड़ की लागत आएगी। महकमे की ओर से इसका डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री का शहर होने के नाते यहां की बिजली व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए काम तेज हो गया है। शासन स्तर पर होने वाली बैठकों में इसकी समीक्षा भी हो रही है। इसी कड़ी में पिछले दिनों शहर को तारों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया था। बिजली महकमे ने इस दिशा में तेजी से काम करते हुए 12 उपकेंद्रों से जुड़े क्षेत्रों में सर्वे के बाद डीपीआर तैयार कर लिया है। योजना के तहत इन क्षेत्रों में 201 किलोमीटर 11 केवी और 385 किलोमीटर एलटी तार भूमिगत किए जाएंगे। 11 केवी लाइन भूमिगत करने में 190 करोड़ रुपये खर्च होंगे तो वहीं एलटी लाइन अंडरग्राउंड करने पर 376 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
चोरी रुकेगी, सुंदर दिखेगा शहर
एलटी लाइन का तार भूमिगत होने से बिजली चोरी रुक जाएगी। भूमिगत तारों से कटिया कनेक्शन संभव नहीं होगा। इससे विभाग को बेहतर राजस्व भी मिल सकेगा। एलटी के साथ 11 केवी लाइन भूमिगत होने से शहर में जगह-जगह नजर आने वाले बिजली के तारों का मकड़जाल भी खत्म होगा और नगर सुंदर दिखेगा।
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इन उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में होगा काम
इंडस्ट्रियल इस्टेट, मोहद्दीपुर, यूनिवर्सिटी, राप्तीनगर, टाउनहाल, शाहपुर, रुस्तमपुर, सूरजकुंड, दुर्गाबाड़ी, बक्शीपुर, नार्मल और लालडिग्गी उपकेंद्र से जुड़े इलाकों के 11 केवी और एलटी तार अंडरग्राउंड किए जाएंगे। उपभोक्ताओं के मीटर भी घर के बाहर लगाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने शहर में बिजली के तार भूमिगत करने को लेकर प्रस्ताव बनाने के लिए कहा था। 12 उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में तार भूमिगत करने के लिए 466 करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद इस पर काम शुरू करा दिया जाएगा।
- एके सिंह, चीफ इंजीनियर
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मुख्यमंत्री का शहर होने के नाते यहां की बिजली व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए काम तेज हो गया है। शासन स्तर पर होने वाली बैठकों में इसकी समीक्षा भी हो रही है। इसी कड़ी में पिछले दिनों शहर को तारों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया था। बिजली महकमे ने इस दिशा में तेजी से काम करते हुए 12 उपकेंद्रों से जुड़े क्षेत्रों में सर्वे के बाद डीपीआर तैयार कर लिया है। योजना के तहत इन क्षेत्रों में 201 किलोमीटर 11 केवी और 385 किलोमीटर एलटी तार भूमिगत किए जाएंगे। 11 केवी लाइन भूमिगत करने में 190 करोड़ रुपये खर्च होंगे तो वहीं एलटी लाइन अंडरग्राउंड करने पर 376 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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चोरी रुकेगी, सुंदर दिखेगा शहर
एलटी लाइन का तार भूमिगत होने से बिजली चोरी रुक जाएगी। भूमिगत तारों से कटिया कनेक्शन संभव नहीं होगा। इससे विभाग को बेहतर राजस्व भी मिल सकेगा। एलटी के साथ 11 केवी लाइन भूमिगत होने से शहर में जगह-जगह नजर आने वाले बिजली के तारों का मकड़जाल भी खत्म होगा और नगर सुंदर दिखेगा।
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इन उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में होगा काम
इंडस्ट्रियल इस्टेट, मोहद्दीपुर, यूनिवर्सिटी, राप्तीनगर, टाउनहाल, शाहपुर, रुस्तमपुर, सूरजकुंड, दुर्गाबाड़ी, बक्शीपुर, नार्मल और लालडिग्गी उपकेंद्र से जुड़े इलाकों के 11 केवी और एलटी तार अंडरग्राउंड किए जाएंगे। उपभोक्ताओं के मीटर भी घर के बाहर लगाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने शहर में बिजली के तार भूमिगत करने को लेकर प्रस्ताव बनाने के लिए कहा था। 12 उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में तार भूमिगत करने के लिए 466 करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद इस पर काम शुरू करा दिया जाएगा।
- एके सिंह, चीफ इंजीनियर