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बकाया नहीं मिला तो ठेकेदारों ने नए कामों से खीच लिया हाथ
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बकाया नहीं मिला तो ठेकेदारों ने नए कामों से खीच लिया हाथ
गोरखपुर। बिजली निगम में स्थानीय ठेकेदारों के करीब 110 करोड़ के लंबित भुगतान का असर अब दिखने लगा है। चार से पांच साल पहले कराए गए काम के भुगतान के लिए लगातार चक्कर लगाने वाले ठेकेदार अब निगम की निविदा में ही भाग नहीं ले रहे हैं। बकाएदारों का कनेक्शन काटने के ठेके में भी उनके रुचि नहीं दिखाने के चलते निगम का करोड़ों रुपये बकाएदारी वसूलने का मामला अटक गया है।
बिजली निगम की तरफ से विभिन्न वितरण खंडों में विद्युतीकरण, उपकेंद्र निर्माण, क्षमता वृद्धि, भवन निर्माण, 33 केवी, 11 केवी लाइन निर्माण का काम जिले के 25 ठेकेदारों ने किया था। इन सभी का भुगतान करीब चार साल से रुका हुआ है। निगम की तरफ से महानगरीय वितरण मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में दिवाली से पहले छोटे-छोटे सुधार का काम किए जाने थे। ठेकेदार द्वारा लक्ष्य तय कर बकाएदारों का कनेक्शन भी काटना था। सभी काम 30 लाख रुपये का था। इसके लिए बाकायदा निविदा निकली। दो बार डेट भी बढ़ाया गया। बावजूद इसके किसी भी ठेकेदार ने निविदा फ ार्म तक नहीं भरा। दशहरा, दिवाली सकुशल संपन्न होने के बाद अधिकारियों ने भी अब फाइल बंद कर दी।
कोट
मुख्य अभियंता को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भुगतान स्थानीय स्तर पर नहीं किया जाता। शासन की तरफ से ठेकेदारों का भुगतान डिस्काम करता है। - यूसी वर्मा, अधीक्षण अभियंता शहरी
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गोरखपुर। बिजली निगम में स्थानीय ठेकेदारों के करीब 110 करोड़ के लंबित भुगतान का असर अब दिखने लगा है। चार से पांच साल पहले कराए गए काम के भुगतान के लिए लगातार चक्कर लगाने वाले ठेकेदार अब निगम की निविदा में ही भाग नहीं ले रहे हैं। बकाएदारों का कनेक्शन काटने के ठेके में भी उनके रुचि नहीं दिखाने के चलते निगम का करोड़ों रुपये बकाएदारी वसूलने का मामला अटक गया है।
बिजली निगम की तरफ से विभिन्न वितरण खंडों में विद्युतीकरण, उपकेंद्र निर्माण, क्षमता वृद्धि, भवन निर्माण, 33 केवी, 11 केवी लाइन निर्माण का काम जिले के 25 ठेकेदारों ने किया था। इन सभी का भुगतान करीब चार साल से रुका हुआ है। निगम की तरफ से महानगरीय वितरण मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में दिवाली से पहले छोटे-छोटे सुधार का काम किए जाने थे। ठेकेदार द्वारा लक्ष्य तय कर बकाएदारों का कनेक्शन भी काटना था। सभी काम 30 लाख रुपये का था। इसके लिए बाकायदा निविदा निकली। दो बार डेट भी बढ़ाया गया। बावजूद इसके किसी भी ठेकेदार ने निविदा फ ार्म तक नहीं भरा। दशहरा, दिवाली सकुशल संपन्न होने के बाद अधिकारियों ने भी अब फाइल बंद कर दी।
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मुख्य अभियंता को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भुगतान स्थानीय स्तर पर नहीं किया जाता। शासन की तरफ से ठेकेदारों का भुगतान डिस्काम करता है। - यूसी वर्मा, अधीक्षण अभियंता शहरी
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