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पीएचडी : मौखिक परीक्षा की अब ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग
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पीएचडी : मौखिक परीक्षा की अब ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग
राजन राय
गोरखपुर। विश्वविद्यालयों में अब पीएचडी की मौखिक परीक्षा (वाइवा) की ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग होगी। जरूरत पड़ने पर राजभवन रिकार्डिंग को मंगाकर देखेगा। पारदर्शिता लाने के लिए राज्यपाल (कुलाधिपति) की पहल पर विश्वविद्यालयों ने नया सिस्टम लागू करने की तैयारी की है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में सभी डीन और विभागाध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं। यह व्यवस्था इसी सत्र से शुरू हो जाएगी।
राज्यपाल ने छह सितंबर को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ बैठक की और उन्हें शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर कराने का सुझाव दिया। तय किया गया कि वाइवा की आडियो और वीडियो रिकार्डिंग भी होगी। इस नई व्यवस्था से शोध में पारदर्शिता तो आएगी ही नए शोधार्थियों को फायदा होगा। वे रिकॉर्डिंग की मदद से यह देख सकेंगे कि संबंधित रिसर्च स्कॉलर ने किसी विषय में वायवा कैसे दिया।
स्थानीय समस्या पर होंगे ज्यादा शोध
गोरखपुर। शोध का दायरा अब बढ़ाया जाएगा। इतिहास आधारित शोध बंद होंगे। स्थानीय समस्याओं पर ज्यादा फोकस होगा। सामाजिक महत्व वाले मुद्दे शोध में शामिल होंगे। सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर पर शोध किए जाएंगे। ताकि पता चल सके कि नीतियां कितनी कारगर हैं।
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कोट
कुलाधिपति के निर्देशानुसार अब पीएचडी वाइवा की वीडियो और ऑडियो रिकार्डिंग कराई जाएगी। इस संबंध में डीन और विभागाध्यक्षों को सूचनाएं भेज दी गईं हैं।
डॉ ओम प्रकाश, कुलसचिव गोविवि
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राजन राय
गोरखपुर। विश्वविद्यालयों में अब पीएचडी की मौखिक परीक्षा (वाइवा) की ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग होगी। जरूरत पड़ने पर राजभवन रिकार्डिंग को मंगाकर देखेगा। पारदर्शिता लाने के लिए राज्यपाल (कुलाधिपति) की पहल पर विश्वविद्यालयों ने नया सिस्टम लागू करने की तैयारी की है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में सभी डीन और विभागाध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं। यह व्यवस्था इसी सत्र से शुरू हो जाएगी।
राज्यपाल ने छह सितंबर को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ बैठक की और उन्हें शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर कराने का सुझाव दिया। तय किया गया कि वाइवा की आडियो और वीडियो रिकार्डिंग भी होगी। इस नई व्यवस्था से शोध में पारदर्शिता तो आएगी ही नए शोधार्थियों को फायदा होगा। वे रिकॉर्डिंग की मदद से यह देख सकेंगे कि संबंधित रिसर्च स्कॉलर ने किसी विषय में वायवा कैसे दिया।
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स्थानीय समस्या पर होंगे ज्यादा शोध
गोरखपुर। शोध का दायरा अब बढ़ाया जाएगा। इतिहास आधारित शोध बंद होंगे। स्थानीय समस्याओं पर ज्यादा फोकस होगा। सामाजिक महत्व वाले मुद्दे शोध में शामिल होंगे। सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर पर शोध किए जाएंगे। ताकि पता चल सके कि नीतियां कितनी कारगर हैं।
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कोट
कुलाधिपति के निर्देशानुसार अब पीएचडी वाइवा की वीडियो और ऑडियो रिकार्डिंग कराई जाएगी। इस संबंध में डीन और विभागाध्यक्षों को सूचनाएं भेज दी गईं हैं।
डॉ ओम प्रकाश, कुलसचिव गोविवि