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कागज में खा रहे दाना

Tue, 20 Aug 2019 10:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 20 Aug 2019 10:45 PM IST
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eaten food in paper
कागज में खा जा रहे दाना, खेत में घूम रहे पशु
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फोटो-54, 55, 56, 57, 58, 59, 60, 61
अस्थाई गोशाला में छोड़ दिए गए पशु, सड़क और खेतों में डेरा
- महरिया गांव की गोशाला में दो दिन में पांच गोवंश की मौत
कमिश्नर करेंगे गोशाला की व्यवस्था का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले में गोवंश संरक्षण के इंतजाम का बुरा हाल है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना का पलीता लगाने में अफसर कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अस्थाई तो छोड़िए स्थाई गोशाला में न तो खाने के बेहतर इंतजाम हैं और न ही रहने के। जबकि कागजों में व्यवस्था एकदम चौकस है। उसका ब्लॉक के महरिया गांव में बनी स्थाई गोशाला की पड़ताल में मंगलवार को यह हकीकत सामने आई है। यही, हाल जोगिया के सिरसिया गांव के गोशाला में भी देखने को मिला। जहां पशुओं को खाने के लिए सूखा भूसा डालकर छोड़ दिया गया। साथ ही गोशाला के पशु भी किसानों के लिए संकट बने हैं।
योगी सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर रोक लगाई गई तो सड़क पर छुट्टा पशुओं की तादाद दिखने लगी। खेतों में भी पशुओं का आतंक बढ़ने लगा। किसान नाराज होने लगे। इस पर सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले न्याय पंचायत स्तर पर अस्थाई गोशाला बनाने का काम शुरू किया। हड़बड़ाहट में बनाई गई गोशाला में अव्यवस्था के बीच छुट्टा पशुओं को रखा गया। उसका ब्लॉक के महरिया गांव में एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से स्थाई गोशाला का निर्माण कराया गया है। मौजूदा समय में इसमें 300 से अधिक पशु हैं। मंगलवार दोपहर पौने एक बजे गोशाला की पड़ताल की गई तो यहां लगे बोर्ड पर लिखा है कि प्रति पशु को एक दिन में चार किलो भूसा और एक किलो दाना दिया जा रहा है। जबकि पशु केवल सूखा भूसा खाते नजर आए। स्थानीय लोगों ने बताया कि सोमवार को तीन पशुओं की मौत हो गई थी। जबकि मंगलवार को दो और पशुओं की मौत हुई थी, जो गोशाला में पड़े हुए थे। यहां कई पशु बीमार हैं। उन्हें कोई देखने वाला नहीं है।
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आज कमिश्नर करेंगे गोशाला का निरीक्षण
शासन की प्राथमिकता वाले स्थाई गोशाला का निरीक्षण आज कमिश्नर करेंगे। यही वजह है कि गोशाला में थोड़ी व्यवस्था की जा रही है। नाम न छपने की शर्त पर एक कर्मी ने बताया कि हालत बदतर है। लेकिन मजबूरी में नौकरी करनी पड़ रही है। बीमार पशुओं का इलाज तक नहीं होता है। यहां तक की सड़ांध से बुरा हाल है।
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सिरसिया का भी बुरा हाल
जोगिया ब्लॉक के सिरसिया गांव में बने गोशाला का भी कुछ यही हाल था। यहां पशुओं को खाने के लिए सूखा भूसा डाला गया था। इसके लिए उसमें दाना के नाम पर एक तिनका भी नहीं दिखा। लोगों ने बताया कि यहां पशुओं को पानी पीने की दिक्कत है। गोशाला में 70 से अधिक पशु मिले।
गोशाला से छोड़ दिए गए पशु, खा रहे फसल
भनवापुर ब्लॉक के बिस्कोहर मंगल बाजार गोशाला में 300 से अधिक पशुओं का टैंगिंग किया गया था। मगर कुछ दिन बाद से उन्हें गोशाला से छोड़ दिया गया। अब पशु खेतों में किसानों की फसल को खा रहे हैं। बीडीओ भनवापुर राम देव भारती ने बताया कि अगर ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी।
मर रहे थे पशु, इसलिए छोड़कर भगाया
इटवा ब्लॉक क्षेत्र के पेड़ाडी स्थित गोशाला की स्थिति देख ग्रामीण दव्रित हो उठे थे। यही वजह है कि ग्रामीणों ने पशुओं को खोल दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के खाने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उन्हें धीरे-धीरे छोड़ दिया गया है। अगर छोड़ा नहीं जाता तो कई पशु मर जाते। बीडीओ इटवा सौरभ कुमार पांडेय ने बताया कि 11 गोशाला क्षेत्र में बने हैं। गोशाला का निरीक्षण कर हकीकत जानी जाएगी।

कोट
महरिया में मृत पशुओं की जानकारी नहीं थी। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी। वह खुद गोशाला का निरीक्षण करेंगे। मौजूदा समय में जिले में 3200 से अधिक पशु गोशाला में हैं। जिनके खाने के इंतजाम के लिए रुपये दिए गए हैं। अगर इसके बाद भी कहीं कोई शिकायत मिलती है तो उस पर कार्रवाई होगी। मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - दीपक मीणा, जिलाधिकारी
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