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...तो इसलिए समय पर नहीं पहुंच पा रही एंबुलेंस

Wed, 27 Dec 2017 12:48 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 27 Dec 2017 12:48 AM IST
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Due to traffic problem ambulance faced problem to reach its location
जाम में फंसने के कारण कई बार एंबुलेंस समय से घटनास्‍थल पर नहीं पहुंच पाती। - फोटो : Amar Ujala
सोचिए, नौसड़ के पास आपकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। आप चोट खाकर सड़क पर तड़प रहे हैं। 108 पर फोन करने के बाद भी एंबुलेंस आने में देर हो रही है। पीड़ा के बीच आपके साथ भीड़ भी व्यवस्था को कोस रही है। महसूस कीजिए, बेतियाहाता में जाम लगा है। इसमें एक एंबुलेंस भी फंसी है। सबको जल्दी निकलने की हड़बड़ी है। आप भी इसी भीड़ का हिस्सा हैं। सबकी तरह आप भी किसी को रास्ता देने को तैयार नहीं हैं चाहे वह एंबुलेंस ही क्यों न हो।
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आपके जेहन में कौंधी ये दो तस्वीरें असल जिंदगी में भी आपके सामने उभरी होंगी। ये हो सकता है कि आप पीड़ित न होकर भीड़ का हिस्सा रहे हों। आपके दिमाग में पहली तस्वीर उकेरने का मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि दूसरे दृश्य के प्रति गंभीर करना है। एक ओर जरूरत पर जिस एंबुलेंस की हम राह देखते हैं दूसरी ओर उसी का रास्ता रोकते रहते हैं। बात सिर्फ इतनी सी है कि हम अगर अपनी भी जिम्मेदारी मान लें तो जाने-अनजाने कइयों की जान बचा सकते हैं।
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ये सिर्फ काल्पनिक बात नहीं है, बल्कि कड़वी सच्चाई है। एंबुलेंस देर से पहुंचने के हर चार मामलों में से तीन के पीछे हमारा गैरजिम्मेदार व्यवहार ही कारण है। एंबुलेंस हेल्प डेस्क ऑफिसर अशोक पांडेय के मुताबिक एंबुलेंस देर से पहुंचने के अधिकतर मामले की वजह जाम है। लोग एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं देते। इसके चलते कई बार हम समय पर मरीज तक नहीं पहुंच पाते। देरी के चार में से एक मामले में नजदीकी एंबुलेंस की व्यस्तता वजह होती है।
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108 की जिले में 31 गाड़ियां
जिले में 108 एंबुलेंस की संख्या 31 है। जिला अस्पताल, सहजनवां, गोला, पिपराइच, जंगल कौड़िया आदि में दो-दो गाड़ियां लगी हुई हैं। इसके अलावा हर ब्लॉक में एक 108 एंबुलेंस लगी हुई है।

पड़ोसी जिले में तक दौड़
चौरीचौरा ब्लॉक में लगी 108 जरूरत के वक्त सटे हुए देवरिया जिले के ब्लॉक में दाखिल होकर मरीज की मदद करती है। इसी तरह बड़हलगंज की गाड़ी दोहरीघाट, पाली और सहजनवा की एंबुलेंस संतकबीरनगर, कैंपियरगंज की गाड़ी महराजगंज के सीमावर्ती ब्लॉक तक दौड़ कर मरीज को इलाज मुहैया कराती है।

20 मिनट में पहुंचने का वादा
शहरी क्षेत्र में सूचना मिलने के 20 मिनट में 108 एंबुलेंस पहुंचने की व्यवस्था है। वहीं देहात क्षेत्र में समय सीमा 30 मिनट है। नजदीकी एंबुलेंस में दूसरा मरीज होने पर गाड़ी दूसरे स्थान से भेजी जाती है। इस हालात में भी एंबुलेंस पहुंचने में देर हो जाती है।


बीते सप्ताह सामने आए थे दो मामले
शनिवार को बाइक सवार दंपती राजघाट पुल के पास तेज रफ्तार ऑटो की चपेट में आ गया। महिला का दाहिना हाथ टूट गया और पति को भी चोर्टें आइं। लोगों ने 108 नंबर पर फोन किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई तो ठेले पर लादकर महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। एक दिन पहले साइकिल से चुटहिल बच्चे को भी इसी तरह ठेले पर इलाज के लिए ले जाना पड़ा था।
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