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शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में मठ-मंदिरों का अहम योगदान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 11 Dec 2016 12:35 AM IST
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गोरखनाथ मंदिर में विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते मानव संसाधन एवं विकास राज्यमंत्री डाॅ. महेंद्र पांडेय। साथ में सदर सांसद आदित्यनाथ।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों का देश रहा है। मठ और मंदिर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते रहे हैं। गोरक्ष पीठ द्वारा संचालित संस्थाएं वैसे ही युवा गढ़ रही हैं जैसी देश को आवश्यकता है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि संस्कार और तकनीक के समन्वय का दर्शन महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में दिखाई दे रहा है। वर्तमान सरकार की नई शिक्षा नीति के निर्धारण में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नीतियों व अनुभवों को महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोरखपुर की पहचान नाथ पंथ के वैश्विक केंद्र और लोक कल्याण के पर्याय गोरक्षनाथ मंदिर से है। एमपी शिक्षा परिषद द्वारा साढ़े छह सौ प्रतिभाओं को सम्मानित करने का अनुष्ठान अद्वितीय है। पुरस्कृत होने वाले प्रतिभागियों से उन्होंने कहा कि पुरस्कार सम्मान तो है पर मंजिल नहीं। यह लक्ष्य तक पहुंचने का सशक्त प्रोत्साहन है।
समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एक संत थे, पर वह राष्ट्र व समाज के लिए समर्पित थे। सेवा साधना से लेकर राजनीति तक के सभी क्षेत्रों में मातृभूमि और हिंदू समाज की एकता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। कहा कि लोकतंत्र लूटतंत्र का पर्याय बन चुका है। ऐसे वातावरण में गोरक्ष पीठ एवं उसके द्वारा संचालित संस्था महाराण प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा एक सप्ताह तक चलने वाला अकादमिक कार्यक्रम बेमिसाल है।
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विशिष्ट अतिथि एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हंागलू ने कहा कि इतना बड़ा अकादमिक कार्यक्रम उन्होंने पहली बार देखा। गोरक्ष पीठाधीश्वर का व्यक्तित्व शिक्षा, चिकित्सा सहित विविध सेवा के लिए प्रेरणादायी है। वे धर्म के प्रतिनिधि नहीं अपितु समाज एवं सेवा के भी प्रतिमान हैं। उन्होंने कहा कि देश को वैज्ञानिकों के साथ विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर, अरविंद जैसे धर्म और संस्कृति के ध्वज वाहक भी चाहिए।
कार्यक्रम में साढ़े छह सौ प्रतिभागियों को नकद, शील्ड और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गुजरात के एडीजे पुलिस विनोद कुमार मल्ल, धर्मेद्र नाथ वर्मा, डॉ. टीपी शाही, गोरख सिंह, मेयर सत्या पांडेय आदि भी मौजूद थीं।
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि संस्कार और तकनीक के समन्वय का दर्शन महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में दिखाई दे रहा है। वर्तमान सरकार की नई शिक्षा नीति के निर्धारण में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नीतियों व अनुभवों को महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोरखपुर की पहचान नाथ पंथ के वैश्विक केंद्र और लोक कल्याण के पर्याय गोरक्षनाथ मंदिर से है। एमपी शिक्षा परिषद द्वारा साढ़े छह सौ प्रतिभाओं को सम्मानित करने का अनुष्ठान अद्वितीय है। पुरस्कृत होने वाले प्रतिभागियों से उन्होंने कहा कि पुरस्कार सम्मान तो है पर मंजिल नहीं। यह लक्ष्य तक पहुंचने का सशक्त प्रोत्साहन है।
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समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एक संत थे, पर वह राष्ट्र व समाज के लिए समर्पित थे। सेवा साधना से लेकर राजनीति तक के सभी क्षेत्रों में मातृभूमि और हिंदू समाज की एकता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। कहा कि लोकतंत्र लूटतंत्र का पर्याय बन चुका है। ऐसे वातावरण में गोरक्ष पीठ एवं उसके द्वारा संचालित संस्था महाराण प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा एक सप्ताह तक चलने वाला अकादमिक कार्यक्रम बेमिसाल है।
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विशिष्ट अतिथि एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हंागलू ने कहा कि इतना बड़ा अकादमिक कार्यक्रम उन्होंने पहली बार देखा। गोरक्ष पीठाधीश्वर का व्यक्तित्व शिक्षा, चिकित्सा सहित विविध सेवा के लिए प्रेरणादायी है। वे धर्म के प्रतिनिधि नहीं अपितु समाज एवं सेवा के भी प्रतिमान हैं। उन्होंने कहा कि देश को वैज्ञानिकों के साथ विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर, अरविंद जैसे धर्म और संस्कृति के ध्वज वाहक भी चाहिए।
कार्यक्रम में साढ़े छह सौ प्रतिभागियों को नकद, शील्ड और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गुजरात के एडीजे पुलिस विनोद कुमार मल्ल, धर्मेद्र नाथ वर्मा, डॉ. टीपी शाही, गोरख सिंह, मेयर सत्या पांडेय आदि भी मौजूद थीं।