फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Doctors denied to admit the children in medical college

इलाज तो दूर, भर्ती करने से ही कर दिया इन्कार

Sun, 29 May 2016 01:33 AM IST
बृजेश कुमार गुप्ता, अमर उजाला, गोरखपुर।
बृजेश कुमार गुप्ता, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sun, 29 May 2016 01:33 AM IST
विज्ञापन
Doctors denied to admit the children in medical college
मेडिकल कॉलेज
यूं तो जच्चे और बच्चे के इलाज के लिए शासन से प्रशासन तक योजनाएं और आदेश जारी होते रहते हैं मगर मेडिकल कॉलेज पर इसका कोई असर नहीं दिखता। शनिवार को दो मासूमों के घर वाले कुछ यही कहानी बयां कर रहे थे। दोनों ही घर वाले अपने मासूमों को गोद में लेकर मेडिकल कॉलेज गए तो थे इलाज के लिए, मगर बेहतर इलाज को कौन कहे, डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने से ही मना कर दिया। दोनों ही परिवार के लोगों को मजबूरन उनकी जिंदगी बचाने के लिए प्राइवेट नर्सिंग होम का रुख करना पड़ा। एक ने तो यहां तक कह दिया कि अब रुपये नहीं है, भगवान ने चाहा तो जान बचेगी नहीं तो जो होगा...होगा?
विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपये का बजट चिल्ड्रेन वार्ड को मिलता है, ताकि बच्चों को बेहतर इलाज मिल सके। मगर यहां कई डॉक्टर ऐसे हैं जो मरीज को भर्ती करने से ही मना कर दे रहे हैं। बीते एक हफ्ते में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब बच्चों को भर्ती करने से इन्कर दिया गया। बड़ी बात तो यह कि शनिवार को आए घर वालों ने मरीज को लखनऊ रेफर करने तक की गुहार लगा दी कि अगर यहां उपचार नहीं हो सकता तो रेफर ही कर दें। लेकिन डॉक्टरों ने यह भी नहीं किया। उल्टे उन्हें अपशब्द कहते हुए भगा दिया।
विज्ञापन


केस 1.
द्धार्थनगर ढेबरुआ निवासी अंगद वर्मा की पत्नी को शुक्रवार शाम सिद्धार्थनगर सरकारी अस्पताल में बच्चा हुआ। मलद्वार के रास्ते में समस्या होने पर डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। शनिवार की सुबह 108 एंबुलेंस से घर वाले उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। मगर डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। बाद में प्राइवेट नर्सिंग होम में उसका इलाज हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस 2.
रुस्तमपुर के रहने वाले संजीत कुमार भी अपने पांच साल के बच्चे को लेकर शुक्रवार रात मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहा था। वह सीधे मेडिकल कॉलेज ही पहुंचे थे। उनके भी बच्चे को डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद एक प्राइवेट नर्सिंग होम में उसका उपचार कराया गया। इलाज में पांच हजार रुपये खर्च हो गए।

डॉक्टर होने के बावजूद मरीज को भर्ती नहीं करना गंभीर बात है। इसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कालेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed