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मजदूर का बेटा धनंजय बना 10वीं में गोरखपुर टॉपर

Sat, 10 Jun 2017 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 10 Jun 2017 02:09 AM IST
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Dhananjay did top the gorakhpur in 10th
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में जिला टॉप करने पर धनंजय को ‌मिठाई खिलाते उनके माता-पिता। - फोटो : Amar Ujala
एक छोटी सी फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले बेलघाट के राम प्रसाद साहनी के बेटे धनंजय साहनी ने 91.50 फीसदी मार्क्स हासिल कर कक्षा 10वीं में जिला टॉप किया है। मुफलिसी के बीच अपने सपनों को जमीनी हकीकत देने वाले धनंजय ने यह साबित कर दिखाया है कि लक्ष्य अगर केंद्रित है और कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो हर बाधा दूर कर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
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धनंजय ने घर की माली हालत ठीक न देख ट्यूशन नहीं लिया और सेल्फ स्टडी की। धनंजय कहते हैं, उन्होंने नौ घंटे घर पर पढ़ाई की। जब भी कुछ समझ में नहीं आता था तो स्कूल में ही टीचर्स से मदद ली। पढ़ाई के दौरान पिता उसका हर वक्त हौसला बढ़ाते रहे। आगे की पढ़ाई मैथ से करके धनंजय का लक्ष्य इंटरमीडिएट की परीक्षा बढ़िया मार्क्स से पास करना है। वह आईआईटी से बीटेक करना चाहते हैं। ग्रेजुएशन के बाद प्रशासनिक सेवा में जाने का उनका इरादा है। इसके लिए वह अभी से कड़ी मेहनत कर रहे हैं। धनंजय का कहना है कि अपने लक्ष्य में अभी पहली सीढ़ी पार की है, मंजिल दूर है और इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी है। धनंजय को गाना सुनने और पेंटिंग का शौक है। पढ़ाई से फुर्सत मिलने पर वे अपने शौक को पूरा करने में हिचकते नहीं हैं। बेटे की सफलता से माता-पिता गदगद हैं। सबने धनंजय को मिठाई भी खिलाई। बेलघाट स्थित शक्ति इंटर कॉलेज में भी जश्न का माहौल है। 
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प्रोफाइल
नाम : धनंजय साहनी
जन्म तिथि- 25 सितंबर 2003
पिता : राम प्रसाद साहनी
भाई : शिवानंद, आशुतोष
बहन : निशा साहनी
शौक : गाना सुनना, पेंटिंग बनाना
 


आईएएस बनना चाहती हैं सामान्य परिवार की सुमन

सामान्य परिवार की सुमन इंटरमीडिएट में 94.40 फीसदी अंक हासिल कर न सिर्फ जिले की टॉपर बनी हैं बल्कि प्रदेश में आठवां स्थान हासिल कर नाम रोशन किया है। बचपन से ही मेधावी सुमन ने 10वीं में भी 91.6 फीसदी अंक हासिल किया था। सुमन का सपना आईएएस बनकर देश की सेवा करना है। मूलत: महराजगंज जिले के परतावल ब्लॉक में हेमछापर गांव की सुमन के पिता मदन मोहन तमोली झुंगियां, गोरखपुर में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर और मां गृहिणी हैं। पिता ने अपनी बेटी को बेहतर तालीम देने के लिए कक्षा नौ से ही साथ बुला लिया। सुमन कहती हैं पापा चाहते थे कि मैं कोचिंग ज्वाइन कर लूं। लेकिन घर की माली हालत को देखते हुए केवल मैथ्स का ट्यूशन किया। दूसरे सब्जेक्ट की पढ़ाई घर पर की। रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की, इसके लिए कोई शेड्यूल तय नहीं किया। जब भी मन किया, पढ़ लेती थी। वह कहती हैं, पापा हमेशा कहते थे कि लगन और निष्ठा से अगर तैयारी की जाए तो सफलता जरूर मिलेेगी। इसी को मैंने जीवन का मूल मंत्र बना लिया। मुझे खुशी है कि अपने सपने को साकार करने की ओर सही दिशा में जा रही हूं। आईएएस बनकर ईमानदारी से काम करना चाहती हूं ताकि खराब हो चुके सिस्टम को ठीक करने में अपना योगदान दे सकूं।
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प्रोफाइल
नाम :  सुमन 
पिता :  मदन मोहन तमोली
मां  : कौशिल्या देवी
भाई : श्याम मोहन, कृष्ण मोहन 
जन्मतिथि : 14 मई 2002 
सपना : आईएएस बनना
शौक : घूमना
10वीं में पाया था 91.6 प्रतिशत अंक


डॉक्टर बनकर पापा का सपना पूरा करना चाहती हैं रवीना

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में गोरखपुर के कमला देवी इंटर कॉलेज की रवीना प्रजापति ने 91 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त कर अपने माता-पिता और विद्यालय का नाम रोशन किया है। रवीना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता वीके प्रजापति और कॉलेज के शिक्षकों को दिया जिनके मार्गदर्शन में उसने पढ़ाई की। बातचीत में रवीना प्रजापति कहती हैं कि वह डॉक्टर बनकर अपने पिता के सपने को पूरा करेंगी। इस दौरान उनका उद्देश्य समाज सेवा करना भी होगा। रवीना अपने पिता वीके प्रजापति को ही अपना आदर्श मानती हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलती हैं। रवीना ने हाईस्कूल की परीक्षा के लिए न तो ट्यूशन लिया और न ही कोई कोचिंग सेंटर ज्वाइन किया। जहां भी उन्हें पढ़ाई में दिक्कत हुई, उन्होंने अपने शिक्षकों से मार्गदर्शन लिया और फिर सेल्फ स्टडी के बल पर इस मुकाम को हासिल किया। रवीना अपनी आगे की पढ़ाई भी इसी तरह जारी रखना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत के बल पर वह लक्ष्य प्राप्त करके रहेंगी।

 

पिता की प्रेरणा ने दी दिव्या को आगे बढ़ने की ताकत 

कोऑपरेटिव इंटर कॉलेज, पिपराइच की कक्षा 10वीं की छात्रा दिव्या गुप्ता ने 90.8 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त कर विद्यालय के साथ ही जिले का मान बढ़ाया है। हरखापुर गांव में ही दिव्या के पिता अशोक गुप्ता की हार्डवेयर की दुकान है, जबकि मां गृहिणी हैं। बातचीत में दिव्या ने बताया कि वह इंजीनियर बनना चाहती हैं। इसी के मद्देनजर आगे की पढ़ाई करेगी। अपने माता-पिता को ही आदर्श मानने वाली दिव्या की प्रेरणा उनके पिता हैं, जिन्होंने हर वक्त उनका हौसला बढ़ाया। दिव्या बताती हैं कि वह रोजाना पांच से छह घंटे पढ़ती थीं। पिपराइच में उन्होंने एक कोचिंग ज्वाइन की थी, जिससे काफी मदद मिली। परीक्षा के दौरान जब भी वह नर्वस होती थीं तो पिता उनका हौसला बढ़ाते थे। उनकी प्रेरणा ने आगे बढ़ने की ताकत दी। दो भाई-दो बहन में बड़ी दिव्या बचपन से ही होनहार रही हैं। दिव्या को कहानी पढ़ने, गाना सुनने और फिल्में देखने का शौक है। 

 

मुफलिसी में वसुंधरा ने लिखी कामयाबी की इबारत

यूपी की बोर्ड परीक्षा में इंटर में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर 86.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली वसुंधरा कुशवाहा ने मुफलिसी में भी कामयाबी की इबारत लिखी है। वसुंधरा के पिता महाराजगंज के निचलौल में किराने की दुकान चलाते हैं। परिवार में पांच बच्चों को पढ़ाना-लिखाना आज के महंगाई भरे जमाने में किसी चुनौती से कम नहीं, मगर अपने हौसले से उन्होंने कभी अपने बच्चों के भविष्य को बिगड़ने नहीं दिया। उनके मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया उनकी पत्नी कुसुमलता कुशवाहा ने। घर की आर्थिक स्थिति को भांपते हुए बच्चों की कोचिंग का बीड़ा उन्होंने खुद ही उठाया। उसका परिणाम भी बेहतर रहा। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी सरस्वती शिशु मंदिर, आर्यनगर की छात्रा वसुंधरा ने बताया कि मेरी पढ़ाई में पूरे परिवार ने साथ दिया। घर से दूरी के चलते हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। हमेशा इस जिम्मेदारी का एहसास था कि यहां तक पहुंचाने में पिता का सहयोग मिला है। रिजल्ट भी बढ़िया होना चाहिए। कभी-कभी दूसरे बच्चों को देखकर मनोबल टूट जाता था कि बेहतर संसाधनों का मैं कैसे मुकाबला करूगीं, पर ऐसे वक्त में बड़े भइया ने उत्साहवर्धन किया। वसुंधरा ने बेहतर परिणाम केे लिए स्कूल प्रबंधन को भी श्रेय दिया और कहा कि स्कूल ने मुझे किताबें निशुल्क मुहैया कराई। टीचर्स ने हमेशा लीक से हटकर मेरा सहयोग किया।

 

टॉपर्स में शुमार होने की नहीं थी उम्मीद

परीक्षा के बाद अच्छे मार्क्स की तो उम्मीद थी. लेकिन टॉपर्स की लिस्ट में जगह मिल जाएगी, इसका भरोसा नहीं था। रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई कर तैयारी की। इसका रिजल्ट भी पॉजिटिव रहा। अगला टारगेट इंजीनियरिंग करने का है। इसके लिए कई जगह आवेदन किया है। रिजल्ट का इंतजार है। इंजीनियरिंग के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का मन बनाया है। यह कहना है आयुषी प्रकाश का जिन्होंने 12वीं कक्षा में 93.75 फीसदी मार्क्स हासिल कर गोरखपुर में दूसरा स्थान हासिल किया है। बशारतपुर के रामजानकी नगर की रहने वाली आयुषी प्रकाश के पिता सत्यप्रकाश दवा की मार्केटिंग का काम करते हैं, जबकि मां सोनिया हाउस वाइफ हैं। आयुषी ने बताया कि पढ़ाई में परिवार का हमेशा सहयोग मिला। मेरे परिवार में पढ़ाई को लेकर अच्छा माहौल है। मेरी सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता के साथ कार्मल स्कूल के टीचर्स को जाता है। इनके मार्गदर्शन से ही अच्छी रैंक हासिल हुई है। मां सोनिया ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। आयुषी  सबसे बड़ी है। अदिति क्लास 10 और सिद्धांत क्लास दो में पढ़ता है। उन्होंने बताया कि बेटी का सपना पूरा करना ही उनके  जीवन का मकसद है।

प्रोफाइल
नाम : आयुषी प्रकाश
जन्म तिथि- एक जुलाई 1999
पिता : सत्यप्रकाश
भाई : सिद्धांत
बहन : अदिति
शौक : किताबें पढना



साक्षी ने मान तो सृष्टि ने बढ़ाया पापा का गरुर 

शिक्षक पिता के पालन-पोषण में जुड़वा बहनें साक्षी और सृष्टि ने इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले में तीसरा और चौथा स्थान हासिल किया। एक-दूसरे से ज्यादा अंक लाने की होड़ में दोनों बहनें पिता अंगद यादव के उठाने पर सुबह तीन बजे उठती और रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करतीं थीं। कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करके साक्षी स्वरूप ने 92 फीसदी और सृष्टि स्वरूप नेे 91 फीसदी अंक हासिल किए। साक्षी ने जहां अपने पिता अंगद का पूरे क्षेत्र में मान बढ़ाया वहीं सृष्टि उनका गरुर बनी।

पिता अंगद यादव एमजी इंटर कॉलेज बक्शीपुर में फिजिक्स पढ़ाते हैं। उन्होंने अपनी जुड़वा बेटियों को खुद ही पढ़ाकर इस काबिल बनाया कि वो जिले में कमाल कर सकें। उन्होंने ऐसा करके भी दिखाया। दोनों बेटियों ने अपनी सफलता का क्रेडिट पापा को दिया। साक्षी और सृष्टि दोनों का कहना था कि उन्हें पढ़ाने में पापा की अहम भूमिका है। वह सुबह तीन बजे उठा देते थे और दोनों को पढ़ाते थे। इसके बाद योग करना और स्कूल जाना दोनों बहनों की दिनचर्या में शामिल था। साक्षी और सृष्टि मां को क्रेडिट देना भी नहीं भूलीं। उनका कहना है कि अगर पापा ने पढ़ाया तो मां उनकी सेहत का ख्याल रखती थीं। उन्होंने कभी घर का काम नहीं करने दिया। सुबह चाय से लेकर नाश्ता, लंच, और डिनर के बाद दूध पिलाकर मां समय पर सुला देती थीं। मां घर का सारा काम करती थीं, तभी तो उन्हें पढ़ाई के लिए समय मिल पाता था। 


साक्षी और सृष्टि दोनों इंजीनियर बनना चाहती हैं। दोनों का लक्ष्य सिविल इंजीनियरिंग में जाकर देश की सेवा करना है। सृष्टि पढ़ाई से कूल होने के लिए जनरल नॉलेज, एन्वायरमेंट, न्यूज पेपर और बुक्स पढ़ती हैं तो साक्षी फुर्सत के पलों में बैडमिंटन खेलना पसंद करती हैं। जुड़वा होने के साथ-साथ साक्षी सृष्टि से बढ़ी हैं। पिता अंगद दोनों की सफलता से काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि बेटियों की सफलता ने उनका सीना चौड़ा कर दिया। साक्षी ने दसवीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए थे, जबकि 12वीं में 92 फीसदी अंक प्राप्त किए। सृष्टि ने दसवीं में 94 फीसदी अंक हासिल किए थे, लेकिन 12वीं में उसके 91 फीसदी अंक आए, लेकिन उन्हें कोई मलाल नहीं है।

प्रोफाइल
नाम : साक्षी स्वरूप, सृष्टि स्वरूप
जन्म तिथि- 23 सितंबर 2001
पिता : अंगद यादव, फिजिक्स टीचर, एमजी इंटर कॉलेज, बक्शीपुर
मां: सारिका यादव, गृहिणी 
भाई : शिवेन स्वरूप यादव, सेकेंड ईयर स्टूडेंट, एमजी इंटर कॉलेज
शौक : साक्षी- बैडमिंटन, सृष्टि- किताबें और न्यूज पेपर पढ़ना
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