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कूड़े के हवाले हुए करोड़ों

Sun, 10 Jul 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 10 Jul 2016 01:19 AM IST
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Crores are spend to remove garbage, but result is zero
इन्द्रानगर तिराहे के पास हाइवे पर पड़ा कूड़ा। - फोटो : rajesh kumar
आम शहरियों से विभिन्न करों के नाम पर अपनी पूंजी जुटाने वाले नगर निगम ने छोटे से ही अंतराल में बड़ी रकम निजी कंपनियों के हाथों गंवा दी। पहले शहरियों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ख्वाब दिखाकर काम की जिम्मेदारी संभालने से पहले ही एक कंपनी को करीब चार करोड़ थमा दिए तो अब हर दरवाजे से कूड़ा उठान सुनिश्चित कराने का वादा करके डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन स्कीम के नाम पर 1.19 करोड़ का दांव हारने की नौबत आ गई है। यही नहीं ठेके पर सफाई व्यवस्था से हर महीने लाखों की चपत और लग रही है।
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पिछले छह साल से नगर निगम शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए प्रयासरत है. हालांकि अब तक सफाई के नाम पर शहरियों को कुछ ठोस हासिल नहीं हुआ है। शहर की बेहतरी के नाम पर अच्छे ख्वाब दिखाकर खर्चे बढ़ाने का सिलसिला शुरू हुआ था साल 2009 से। कूड़े के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए यूआईडीएसएसएमटी (अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट स्कीम फॉर स्माल एंड मीडियम टाउंस) के तहत गोरखपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। बनवाने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को दी गई।
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इस योजना के नाम पर जमीन खरीदने से लेकर अब तक करीब 19.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। ऑडिट और जांच प्रक्रिया से साफ हुआ कि काम का नाम करने आगे आई कंपनी ने बहुत समझदारी से बैंक गारंटी का समय सीमा में भुगतान करा लिया। बैंक गारंटी के कुल 4.07 करोड़ रुपये निकाल लिए। हिसाब समझा तो साफ हुआ कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के नाम पर नगर निगम को चार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
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इसके बाद नगर निगम टीम ने मुस्कान ज्योति नामक संस्था की मदद से शहरियों को सफाई की मुस्कान देने का वादा किया। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा मुस्कान ज्योति के हवाले कर दिए। यही नहीं सफाई के लिए एक करोड़ से ज्यादा की लागत वाली गाड़ियों का बेड़ा खरीद कर मुस्कान ज्योति के हवाले किया। इसके अलावा 18.50 लाख रुपये का भी भुगतान किया गया है। इनमें से तकरीबन 3.50 लाख रुपये का हिसाब तो मुस्कान ज्योति संस्था दे रही है, लेकिन 15 लाख रुपये को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।

हालात देख शहरियों के बीच से सवाल यह उठ रहा है कि सख्त तेवर और विषय को अदालत तक ले जाकर नगर निगम इन निजी कंपनियों से डील में गंवाई रकम की वसूली की कोशिश भले कर ले लेकिन इंसेफेलाइटिस व अन्य बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील इस इलाके में सफाई के नाम पर गंवाए गए वक्त का हिसाब कौन देगा।


'मुस्कान ज्योति को एक करोड़ खर्च करके 20 गाड़ियां दी गई हैं। इन गाड़ियों को कूड़ा उठान में आज तक इस्तेमाल नहीं हुआ। गाड़ियों की चाभी नगर निगम के पास नहीं लौटी। 15 लाख रुपये का कोई हिसाब भी मुस्कान ज्योति ने नहीं दिया है। नगर निगम बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठक में यह मुद्दा रखकर अगली कार्य दिशा तय की जाएगी। जल्द ही अन्य किसी एजेंसी को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा दिया जाएगा।'
- डॉ. सतीश सिंह, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

शहर में कचरे व सफाई का खाका
गोरखपुर का कुल क्षेत्रफल- 147 वर्ग किलोमीटर
प्रतिदिन कूड़ा सिल्ट का निस्तारण- 598 मीट्रिक टन
सफाई दृष्टिकोण में 70 वार्ड पांच जोन में विभाजित- सिविल लाइन, गोरखनाथ, उर्दू बाजार, मियां बाजार और तिवारीपुर
सफाई कर्मचारी- 516 नियमित, 289 कैजुअल (25 वार्ड में)
ठेके पर सफाई कर्मचारी- 1164 (45 वार्ड में)
वाहनों की संख्या- 75
कूड़ेदानों की संख्या- 200
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