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तेजाब हत्याकांड में वादी ने मुकदमा वापसी की इच्छा जताई
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 09 Mar 2017 01:17 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बड़हलगंज तिराहे पर विंध्यवासिनी देवी की हत्या मामले में पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी में है। वादी के मुकर जाने के बाद पुलिस के पास भी अब कोई आधार नहीं बचा है जिससे इसकी जांच पूरी की जाए। हत्या के बाद तेजाब से विंध्यवासिनी देवी को जलाया गया था। इस मामले में पुलिस ने मृतक की बहू शिल्पी को मुल्जिम बनाया था। मगर आज तक पुलिस पूछताछ नहीं कर सकी है। इसी बीच वादी ने शपथ पत्र देकर मुकदमा वापस लेने की इच्छा जता दी है।
9 मार्च 2015 को विंध्यवासिनी देवी की हत्या हुई थी। तब घर में बहू शिल्पी और ढाई साल के पोते के अलावा कोई दूसरा नहीं था। तब शिल्पी ने पुलिस केा बताया था कि डकैती के नीयत से घर में घुसे बदमाशों ने तेजाब डालकर सास की हत्या कर दी और उसके ऊपर भी तेजाब फेंका। पहले तो पुलिस ने बताए अनुसार मुकदमा दर्ज कर लिया था और घायल शिल्पी को इलाज के लिए शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मगर पोस्टमार्टम में गला दबाने की बात उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच की और बहू को मुल्जिम बनाया।
जांच में सामने आया था कि विंध्यवासिनी देवी के पति की दो शादी हुई थी। शिल्पी का पति पहली पत्नी का बेटा है। विंध्यवासिनी देवी के पति ने मौत से पहले अपनी संपत्ति तीन हिस्सों में बांट दी थी। एक हिस्सा पहली पत्नी के बेटे और एक. हिस्सा दूसरी पत्नी और उसके बेटे के नाम कर दिया था। शिल्पी और उसका पति विंध्यवासिनी देवी के नाम की गई जायदाद में आधा हिस्सा मांग रहे थे। इसको लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में विंध्यवासिनी देवी की हत्या होने की बात मानते हुए पुलिस ने शिल्पी को इस मामले में अभियुक्त बनाया था।
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कुर्की का हो चुका है आदेश
तेजाब कांड के इस मामले में फरार घोषित शिल्पी के खिलाफ कुर्की की नोटिस जारी हो चुकी है। इस बीच विंध्यवासिनी देवी के दूसरे बेटे व अन्य रिश्तेदार शपथ पत्र के साथ आईजी से मिलकर मुकदमा वापस लेने की इच्छा जताई। उन्होंने शिल्पी के निर्दोष होने का भी दावा किया। आईजी ने शपथ पत्र के आधार पर कार्रवाई करने के लिए एसएसपी को निर्देशित किया। एसएसपी के निर्देश पर बड़हलगंज पुलिस ने शपथ पत्र देन वालों का बयान दर्ज किया है। पुलिस को दिए गए बयान में भी उन्होंने मुकदमा खत्म करने की बात कही है।
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9 मार्च 2015 को विंध्यवासिनी देवी की हत्या हुई थी। तब घर में बहू शिल्पी और ढाई साल के पोते के अलावा कोई दूसरा नहीं था। तब शिल्पी ने पुलिस केा बताया था कि डकैती के नीयत से घर में घुसे बदमाशों ने तेजाब डालकर सास की हत्या कर दी और उसके ऊपर भी तेजाब फेंका। पहले तो पुलिस ने बताए अनुसार मुकदमा दर्ज कर लिया था और घायल शिल्पी को इलाज के लिए शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मगर पोस्टमार्टम में गला दबाने की बात उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच की और बहू को मुल्जिम बनाया।
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जांच में सामने आया था कि विंध्यवासिनी देवी के पति की दो शादी हुई थी। शिल्पी का पति पहली पत्नी का बेटा है। विंध्यवासिनी देवी के पति ने मौत से पहले अपनी संपत्ति तीन हिस्सों में बांट दी थी। एक हिस्सा पहली पत्नी के बेटे और एक. हिस्सा दूसरी पत्नी और उसके बेटे के नाम कर दिया था। शिल्पी और उसका पति विंध्यवासिनी देवी के नाम की गई जायदाद में आधा हिस्सा मांग रहे थे। इसको लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में विंध्यवासिनी देवी की हत्या होने की बात मानते हुए पुलिस ने शिल्पी को इस मामले में अभियुक्त बनाया था।
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कुर्की का हो चुका है आदेश
तेजाब कांड के इस मामले में फरार घोषित शिल्पी के खिलाफ कुर्की की नोटिस जारी हो चुकी है। इस बीच विंध्यवासिनी देवी के दूसरे बेटे व अन्य रिश्तेदार शपथ पत्र के साथ आईजी से मिलकर मुकदमा वापस लेने की इच्छा जताई। उन्होंने शिल्पी के निर्दोष होने का भी दावा किया। आईजी ने शपथ पत्र के आधार पर कार्रवाई करने के लिए एसएसपी को निर्देशित किया। एसएसपी के निर्देश पर बड़हलगंज पुलिस ने शपथ पत्र देन वालों का बयान दर्ज किया है। पुलिस को दिए गए बयान में भी उन्होंने मुकदमा खत्म करने की बात कही है।