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फर्जी आई कार्ड बनाने वाले को एसटीएफ ने दबोचा

Sat, 12 Nov 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 12 Nov 2016 01:19 AM IST
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STF arrested to the man who make fake idendity card of police officers
अरेस्‍ट
चंद रुपये में ही आई कार्ड के जरिए मनचाहे अफसर की पहचान देने वाले शख्स को एसटीएफ ने शुक्रवार को दबोच लिया। रेलवे स्टेशन के सामने 17 साल से एक छोटी सी गुमटी में बैठकर एमकॉम पास हरिओम इस काम को अंजाम दे रहा था। एसटीएफ गोरखपुर यूनिट ने छापा मारकर उसे पकड़ लिया। उसके पास से बड़ी संख्या में फर्जी आई कार्ड व अन्य दस्तावेज मिले हैं। बताया जाता है कि वह पुलिस की वर्दी भी मुहैया कराता था। इस काम के लिए वह मात्र 80 से 100 रुपये तक ही लेता था।
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मालूम हो कि एसटीएफ ने बुधवार को कैंट एरिया के बेतियाहाता से फर्जी डीजीपी रामनगीना को पकड़ा था। रामनगीना के पास मिले फर्जी पहचान पत्र के बाद ही पूछताछ में हरिओम का नाम सामने आया। उसने बताया कि रेलवे स्टेशन के सामने हरिओम की कुमार इंटरप्राइजेज नाम से पुलिस-सेना की वर्दी बेचने की दुकान है। वह 80 से लेकर 200 रुपए तक में किसी भी विभाग के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी का आई कार्ड बना देता है। पद और जरूरत के अनुसार वह आईकार्ड की कीमत लेता है।
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रामनगीना की सूचना पर पुलिस ने शाहपुर एरिया के आवास विकास कॉलोनी निवासी हरिओम अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि करीब 17 साल से वह रेलवे स्टेशन के सामने वर्दी बेचने का काम कर रहा है। 10 साल पहले उसने फर्जी तरीके से परिचय पत्र बनाने का काम शुरू किया। पास में ही पुलिस लाइंस होने का उसको सबसे ज्यादा फायदा मिला। आसानी से आई कार्ड बनाने के चक्कर में उसके कारोबार को पुलिस ने बढ़ा दिया। पुलिस के अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा वह रेलवे के टीटीई, गॉर्डस सहित कई विभागों के परिचय पत्र बनाने लगा। 
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बरामद हुए ये सामान

- उत्तर प्रदेश पुलिस और होमगार्ड्स के विभिन्न अधिकारियों-कर्मचारियों के पहचान पत्र
- एनई रेलवे के विभिन्न पदों के अधिकारियों और कर्मचारियों के आई कार्ड
- कंप्यूटर, पेन ड्राइव, आई कार्ड बनाने के सॉफ्टवेयर
- स्कैनर, प्रिंटर, कटर और लेमिनेशन मशीन
- एसपी सिटी के नाम से बनी रबर मुहर और मोबाइल फोन
- तीन पुलिस कर्मचारियों के पीएनओ नंबर से बने आई कार्ड

पुलिस वाले भी बनवाते थे आईकार्ड

हरिओम ने पुलिस को बताया कि उससे कई पुलिस वाले भी आई कार्ड बनवाते थे। इसके लिए वह मुंहमांगी कीमत भी देते थे। बड़ा सवाल यह कि पुलिस में रहकर फर्जीवाड़े से आई कार्ड लेने वाले कर्मचारियों ने इसे सुरक्षा के लिए कभी भी खतरा नहीं माना। न ही कभी कार्रवाई की पहल की। वर्ष 1999 में होमगार्ड्स के प्रतिबंधित बैज बेचने के चक्कर में कैंट पुलिस ने उसे अरेस्ट किया था। बावजूद इसके किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया।


हरिओम फर्जी तरीके से आई कार्ड बनाता था। उसके पास से बड़ी संख्या में आई कार्ड व इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान मिले हैं। सुरक्षा के लिए यह बड़ा खतरा था। 
- विकास चंद त्रिपाठी, सीओ, एसटीएफ
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