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भाई की हत्या में मुखबिरी के शक में की थी सपा नेता की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Mar 2017 09:14 PM IST
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पुलिस लाइन में खोराबार क्षेत्र के संजय यादव के हत्या का खुलासा करते एसएसपी रामलाल वर्मा, एसपीसीटी हेमराज ,एसपी क्राइम,सीओ कैंट व अन्य।
- फोटो : rajesh
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सपा नेता और प्रॉपर्टी डीलर संजय यादव की हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर शव के अवशेष को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा है। मुख्य अभियुक्त दान बहादुर ने बताया कि भाई माफिया लाल बहादुर यादव की हत्या में संजय की मुखबिरी का शक था। वहीं दूसरे अभियुक्त रंजन का रुपये बकाए थे। पुलिस मामले में अभी अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी को दबिश डाल रही है।
एसएसपी रामलाल वर्मा ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि कजाकपुर निवासी संजय यादव 24 अक्टूबर को घर से कचहरी के लिए निकले थे और अचानक लापता हो गए थे। घरवालों की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की तो लाल बहादुर यादव के भाई दान बहादुर यादव का नाम सामने आया। दानबहादुर को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ की तो पूरा मामला साफ हो गया। उसके बताए जगह से सोमवार की शाम चेरिया गांव के पास खेत से संजय का शव बरामद हो गया। दान बहादुर ने पुलिस को बताया कि उसने अपने गांव के अजय यादव उर्फ गुड्डू यादव, बेलघाट के मीरपुर निवासी मोहित यादव, गोपालगंज के मीरपुर, एकडंगा निवासी रंजन यादव, खजनी एरिया के बसडीला निवासी सुभाष शर्मा और अन्य के साथ मिलकर संजय की हत्या की थी।
सुभाष शर्मा ने दान बहादुर को बताया था कि लाल बहादुर की हत्या संजय की मुखबिरी से हुई थी। लाल बहादुर हत्या के मुख्य आरोपी विनोद उपाध्याय से संजय के करीबी संबंध हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि प्रॉपर्टी के कारोबार में सुभाष शर्मा ने संजय से चार लाख रुपए कर्ज लिए थे। संजय के हत्या में शामिल होकर सुभाष शर्मा ने एक तीर से दो निशाने साधे। लाल बहादुर के भाई दान बहादुर का भरोसा कमाया साथ ही संजय की चार लाख की देनदारी से बच गया। एसएसपी ने घटना की पर्दाफाश करने वाली टीम को पांच हजार पुरस्कार दिया।
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एसएसपी रामलाल वर्मा ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि कजाकपुर निवासी संजय यादव 24 अक्टूबर को घर से कचहरी के लिए निकले थे और अचानक लापता हो गए थे। घरवालों की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की तो लाल बहादुर यादव के भाई दान बहादुर यादव का नाम सामने आया। दानबहादुर को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ की तो पूरा मामला साफ हो गया। उसके बताए जगह से सोमवार की शाम चेरिया गांव के पास खेत से संजय का शव बरामद हो गया। दान बहादुर ने पुलिस को बताया कि उसने अपने गांव के अजय यादव उर्फ गुड्डू यादव, बेलघाट के मीरपुर निवासी मोहित यादव, गोपालगंज के मीरपुर, एकडंगा निवासी रंजन यादव, खजनी एरिया के बसडीला निवासी सुभाष शर्मा और अन्य के साथ मिलकर संजय की हत्या की थी।
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सुभाष शर्मा ने दान बहादुर को बताया था कि लाल बहादुर की हत्या संजय की मुखबिरी से हुई थी। लाल बहादुर हत्या के मुख्य आरोपी विनोद उपाध्याय से संजय के करीबी संबंध हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि प्रॉपर्टी के कारोबार में सुभाष शर्मा ने संजय से चार लाख रुपए कर्ज लिए थे। संजय के हत्या में शामिल होकर सुभाष शर्मा ने एक तीर से दो निशाने साधे। लाल बहादुर के भाई दान बहादुर का भरोसा कमाया साथ ही संजय की चार लाख की देनदारी से बच गया। एसएसपी ने घटना की पर्दाफाश करने वाली टीम को पांच हजार पुरस्कार दिया।
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