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समुद्री लुटेरों से मुक्त होकर घर पहुंचे संतोष
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 12 May 2016 01:16 AM IST
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नाइजीरिया के लुटेरों से छूटे इंजीनियर संतोष भारद्धाज (बाएं से दूसरे) रिहा होकर कंदवा में निवास पहुंचे।
- फोटो : amar ujala
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बड़हलगंज (गोरखपुर)। नाइजीरिया में 26 मार्च को अगवा किए गए सिंगापुर की शिपिंग कंपनी ट्रांसओशन प्राइवेट लिमिटेड के पांच कर्मचारियों को नौ मई को मुक्त करा लिया गया। शिपिंग कंपनी के प्रबंध निदेशक बड़हलगंज के ग्राम शुक्लपुरी निवासी लक्ष्मीशंकर शुक्ल ने बताया कि इनमें शामिल संतोष कुमार भारद्वाज बुधवार को अपने परिवार वालों के बीच पहुंच गए।
मूल रूप से समस्तीपुर (बिहार) के रहने वाले संतोष कुमार भारद्वाज का परिवार मडुआडीह (वाराणसी) की राजतिलक नगर कालोनी में रहता है। संतोष सहित पांच क्रू मेंबरों को 26 मार्च को नाइजीरिया में समुद्री डकैतों ने अगवा कर जहाज कब्जे में ले लिया था। पांच सदस्यों में से दो यूक्रेन और दो बांग्लादेश के रहने वाले हैं। लक्ष्मीशंकर शुक्ल ने बताया कि घटना के बाद संतोष की पत्नी के संपर्क साधने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रिहाई में मदद का भरोसा दिलाया था।
इस बीच कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी समुद्री लुटेरों से संपर्क किया। बातचीत में रिहाई के एवज में बड़ी रकम की मांग हुई। लंबे समय बातचीत का सिलसिला जारी रखकर नौ मई को सभी को मुक्त करा लेने में कामयाबी मिल गई। मुक्ति के बाद पांचों को लागोश के अस्पताल में जरूरी उपचार दिलाकर 10 मई को स्वदेश रवाना कर दिया गया। इसी क्रम में संतोष भी घर वालों के बीच पहुंच गए। लक्ष्मीशंकर शुक्ल ने सभी की सुरक्षित रिहाई पर खुशी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की भूमिका की सराहना की है।
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मूल रूप से समस्तीपुर (बिहार) के रहने वाले संतोष कुमार भारद्वाज का परिवार मडुआडीह (वाराणसी) की राजतिलक नगर कालोनी में रहता है। संतोष सहित पांच क्रू मेंबरों को 26 मार्च को नाइजीरिया में समुद्री डकैतों ने अगवा कर जहाज कब्जे में ले लिया था। पांच सदस्यों में से दो यूक्रेन और दो बांग्लादेश के रहने वाले हैं। लक्ष्मीशंकर शुक्ल ने बताया कि घटना के बाद संतोष की पत्नी के संपर्क साधने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रिहाई में मदद का भरोसा दिलाया था।
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इस बीच कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी समुद्री लुटेरों से संपर्क किया। बातचीत में रिहाई के एवज में बड़ी रकम की मांग हुई। लंबे समय बातचीत का सिलसिला जारी रखकर नौ मई को सभी को मुक्त करा लेने में कामयाबी मिल गई। मुक्ति के बाद पांचों को लागोश के अस्पताल में जरूरी उपचार दिलाकर 10 मई को स्वदेश रवाना कर दिया गया। इसी क्रम में संतोष भी घर वालों के बीच पहुंच गए। लक्ष्मीशंकर शुक्ल ने सभी की सुरक्षित रिहाई पर खुशी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की भूमिका की सराहना की है।
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