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डॉक्टरों की रिपोर्ट में उलझा कतवारू की मौत का सच

Wed, 10 May 2017 01:11 AM IST
शिवम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
शिवम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 10 May 2017 01:11 AM IST
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Reason of death of Katwaru became mystery
मौत - फोटो : file
डॉक्टरों की अलग-अलग रिपोर्ट के चलते एक परिवार की न्याय की आस फंस गई है। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर जिस शख्स का खुद डॉक्टरों ने मारपीट से गंभीर घायल पाते हुए उपचार किया था, उसी की मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में डॉक्टर ने मामूली चोट लिखकर बिसरा सुरक्षित रख लिया। दो डॉक्टरों की अलग-अलग रिपोर्ट में पुलिस भी उलझ गई है। डीआईजी नीलाब्जा चौधरी ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ से इस मामले की जांच कराने के लिए कमेटी गठित करने को कहा है। उन्होंने दोनों रिपोर्ट के साथ ही पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की भी जांच कराके रिपोर्ट मांगी गई है।
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झंगहा के नीना टोला निवासी कतवारू यादव की बहन सुनीता यादव की तहरीर पर चौरीचौरा पुलिस ने मारपीट में गंभीर रूप से घायल और मौत के बाद बाद गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। अब तक की विवेचना में सामने आया है कि पिटाई में कतवारू के दांत तक टूट गए थे, लेकिन मौत के बाद जब पोस्टमार्टम कराया गया तो चौंकाने वाली रिपोर्ट आ गई। पुलिस को मिली रिपोर्ट में डॉक्टर ने लिखा है कि कतवारू के शरीर पर गंभीर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए। मौत की वजह स्पष्ट न होने से बिसरा सुरक्षित रख लिया गया। अब यही रिपोर्ट पुलिस अफसरों को खटक रही है। डीआईजी का कहना है कि ऐसा कैसे हो सकता है। जो शख्स अस्पताल में गंभीर रूप से घायल होकर भर्ती हुआ हो, उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट का न आना समझ से परे है, जबकि बिसरा जहर या फिर संदिग्ध हाल में मौत होने पर ही सुरक्षित रखा जाता है।
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यह था मामला
चौरीचौरा इलाके में 19 अप्रैल को कतवारू यादव को प्रधान की चुनावी रंजिश में मारा-पीटा गया था। घरवालों ने उसे स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। वहां 25 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद घरवालों ने केस दर्ज कराने को शव रखकर हाइवे जाम कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
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कतवारू को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी मौत अस्पताल में ही हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मामूली चोट की बात आई है। सीएमओ को पत्र लिखकर इस मामले की जांच कराने को कहा गया है क्योंकि रिपोर्ट में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। 
- नीलाब्जा चौधरी, डीआईजी
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