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राम सहाय के मौत की जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 03 Jun 2017 01:31 AM IST
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करंट से रामसहाय की मौत के बाद लोगों ने रास्ता जामकर प्रदर्शन किया था।
- फोटो : Amar Ujala
रुस्तमपुर सब स्टेशन से जुड़े महुई सुघरपुर पोखरा टोला में गुरुवार को करंट से हुई राम सहाय की मौत की जांच शुरू हो गई है। जांच के लिए एसडीओ प्रथम प्रमोद जायसवाल ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय को सूचना भेजी है। तीन-चार दिन में जांच पूरी होने की उम्मीद है।
शुक्रवार दोपहर में विद्युत सुरक्षा निदेशालय के दफ्तर में हादसे की जांच के लिए पत्र पहुंचा। अवर अभियंता एके वर्मा ने बताया कि मामले की जांच तीन से चार दिन में पूरी कर ली जाएगी। एसडीओ प्रथम प्रमोद जायसवाल के मुताबिक हादसे का कारण उपभोक्ता की ओर से बिना सूचना दिए सर्विस केबल में आए फॉल्ट को दुरुस्त करना बताया गया है। मुहल्ले के लोगों का कहना है कि जिस तार के कारण दुर्घटना हुई वह तीन दिन पहले से गिरा हुआ था।
आंधी के बाद गिरे इस तार की मरम्मत करने किसी के न पहुंचने पर रामसहाय खुद ठीक करने लगे। इसी के कारण हादसा हुआ और उनकी जान चली गई। अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में बिजली विभाग की लापरवाही उजागर होती है तो पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल सकती है। दो लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाती है।
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ये था मामला
महुई सुघरपुर निवासी रामसहाय के घर के पास तीन दिन पहले आंधी-पानी के कारण पोल से तार टूट कर गिर गया था। लोगों के मुताबिक बिजली विभाग को इसकी सूचना दी गई, मगर विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। राम सहाय ने गुरुवार को तार ठीक करने की कोशिश की। इसमें करंट से उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद नाराज घर वाले और क्षेत्रीय लोग सड़क पर उतर आए। दो फीडर की बिजली काटकर सड़क जाम कर दी। इसके बाद युवक के पिता पंचम की तहरीर पर खोराबार पुलिस ने बिजली विभाग के खिलाफ केस दर्ज किया था और जाम खुलवाया था।
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शुक्रवार दोपहर में विद्युत सुरक्षा निदेशालय के दफ्तर में हादसे की जांच के लिए पत्र पहुंचा। अवर अभियंता एके वर्मा ने बताया कि मामले की जांच तीन से चार दिन में पूरी कर ली जाएगी। एसडीओ प्रथम प्रमोद जायसवाल के मुताबिक हादसे का कारण उपभोक्ता की ओर से बिना सूचना दिए सर्विस केबल में आए फॉल्ट को दुरुस्त करना बताया गया है। मुहल्ले के लोगों का कहना है कि जिस तार के कारण दुर्घटना हुई वह तीन दिन पहले से गिरा हुआ था।
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आंधी के बाद गिरे इस तार की मरम्मत करने किसी के न पहुंचने पर रामसहाय खुद ठीक करने लगे। इसी के कारण हादसा हुआ और उनकी जान चली गई। अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में बिजली विभाग की लापरवाही उजागर होती है तो पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल सकती है। दो लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाती है।
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ये था मामला
महुई सुघरपुर निवासी रामसहाय के घर के पास तीन दिन पहले आंधी-पानी के कारण पोल से तार टूट कर गिर गया था। लोगों के मुताबिक बिजली विभाग को इसकी सूचना दी गई, मगर विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। राम सहाय ने गुरुवार को तार ठीक करने की कोशिश की। इसमें करंट से उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद नाराज घर वाले और क्षेत्रीय लोग सड़क पर उतर आए। दो फीडर की बिजली काटकर सड़क जाम कर दी। इसके बाद युवक के पिता पंचम की तहरीर पर खोराबार पुलिस ने बिजली विभाग के खिलाफ केस दर्ज किया था और जाम खुलवाया था।