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बांसगांव में हिस्ट्रीशीटर की गोली मारकर हत्या
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 15 May 2016 12:37 AM IST
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सुभाष सिंह
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बांसगांव में शुक्रवार की रात दुकान के बाहर सो रहे हिस्ट्रीशीटर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शनिवार सुबह ताड़ी उतारने पहुंचे मजदूरों ने लाश देखकर घटना की जानकारी घरवालों को दी। पुलिस को मौके पर एक बाइक, काले रंग की पैंट और बेल्ट मिली है। बाइक बांसगांव कस्बे के रहने वाले एक हिस्ट्रीशीटर की है। घटना के बाद से वह फरार है। पूर्व प्रधान के बड़े भाई ने अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज कराया है।
बांसगांव प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के वार्ड नंबर सात, मरवटिया उत्तरी निवासी सुभाष सिंह धुसुना गांव के पूर्व प्रधान थे। सात भाइयों में वह दूसरे नंबर के थे। पूर्व प्रधान सुभाष सिंह ने क्षेत्र में ताड़ी बिक्री का ठेका लिया था। कस्बे से सटे सांवर गांव के बाग में स्थित झोपड़ी में वह दुकान चलाते थे। शुक्रवार की रात वह झोपड़ी के बाहर तख्ते सो रहे थे, जब बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। शनिवार की सुबह ताड़ी उतारने पहुंचे मजदूरों ने बिस्तर पर खून से सना शव देखकर घटना की जानकारी उनके घरवालों को दी।
बदमाशों ने उनके सिर में पीछे से गोली मारी थी। सुभाष सिंह एक पुलिस अधिकारी के नजदीकी रिश्तेदार थे। उनके खिलाफ बांसगांव के अलावा जिले के कई थानों में आपराधिक मामले दर्ज थे। उनकी हत्या की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर एसपी ग्रामीण ब्रजेश सिंह, सीओ बांसगांव राजेश भारती मौके पर पहुंचे।
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पुरानी रंजिश में पूर्व प्रधान की हत्या की आशंका जताई जा रही है। सुभाष के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे और तीन बेटियां हैं। दोपहर बाद घर पहुंचे बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान ने परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया।
झोपड़ी के पास मिली बाइक
सुभाष के बेटे गौरव के साथ गांव के लोग मौके पर पहुंचे तो एक बाइक मिली। पुलिस की छानबीन में पता चला कि बाइक बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर सात निवासी हिस्ट्रीशीटर अरुण सिंह की है। झोपड़ी के पास बाइक खड़ी होने की वजह जानने के लिए पुलिस ने अरुण की तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। गांव के लोगों ने पुलिस को बताया कि अरुण सिंह और सुभाष में खूब पटती थी। लेकिन दोनों के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया था। अरुण के फरार होने के कारण पुलिस उसी पर संदेह जता रही है।
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बांसगांव प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के वार्ड नंबर सात, मरवटिया उत्तरी निवासी सुभाष सिंह धुसुना गांव के पूर्व प्रधान थे। सात भाइयों में वह दूसरे नंबर के थे। पूर्व प्रधान सुभाष सिंह ने क्षेत्र में ताड़ी बिक्री का ठेका लिया था। कस्बे से सटे सांवर गांव के बाग में स्थित झोपड़ी में वह दुकान चलाते थे। शुक्रवार की रात वह झोपड़ी के बाहर तख्ते सो रहे थे, जब बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। शनिवार की सुबह ताड़ी उतारने पहुंचे मजदूरों ने बिस्तर पर खून से सना शव देखकर घटना की जानकारी उनके घरवालों को दी।
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बदमाशों ने उनके सिर में पीछे से गोली मारी थी। सुभाष सिंह एक पुलिस अधिकारी के नजदीकी रिश्तेदार थे। उनके खिलाफ बांसगांव के अलावा जिले के कई थानों में आपराधिक मामले दर्ज थे। उनकी हत्या की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर एसपी ग्रामीण ब्रजेश सिंह, सीओ बांसगांव राजेश भारती मौके पर पहुंचे।
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पुरानी रंजिश में पूर्व प्रधान की हत्या की आशंका जताई जा रही है। सुभाष के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे और तीन बेटियां हैं। दोपहर बाद घर पहुंचे बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान ने परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया।
झोपड़ी के पास मिली बाइक
सुभाष के बेटे गौरव के साथ गांव के लोग मौके पर पहुंचे तो एक बाइक मिली। पुलिस की छानबीन में पता चला कि बाइक बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर सात निवासी हिस्ट्रीशीटर अरुण सिंह की है। झोपड़ी के पास बाइक खड़ी होने की वजह जानने के लिए पुलिस ने अरुण की तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। गांव के लोगों ने पुलिस को बताया कि अरुण सिंह और सुभाष में खूब पटती थी। लेकिन दोनों के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया था। अरुण के फरार होने के कारण पुलिस उसी पर संदेह जता रही है।