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जल निगम के कर्मचारी की गोली मारकर हत्या
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:46 AM IST
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गोरखपुर। चिलुआताल के मिर्जापुर में बुधवार की रात जल निगम के कर्मचारी हरिश्चंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घरवालों ने संपत्ति के विवाद में हत्या करने का आरोप लगाया है।
पुलिस जल निगम कर्मचारी के मामा की बहू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।
चिलुआताल प्रतिनिधि के अनुसार महराजगंज कोतवाली के अहमदपुर हड़हवां निवासी हरिश्चंद्र यादव (55) जल निगम प्रथम खंड के मैकेनिकल में कर्मचारी थे।
वह चिलुआताल, मिर्जापुर में बोरिंग नंबर तीन के पास रहते थे। बेलीपार के गुरौली में रहने वाले उनके मामा के बेटे महीपत ने दो साल पहले आत्महत्या कर ली थी। घटना के कुछ दिन बाद महीपत की पत्नी बिंदू बच्चों को छोड़कर चली गई। हरिश्चंद्र ही महीपत की बेटी साधना (17), बेटे सूरज (13), धीरेंद्र (11) और बेटी आराधना (8) का पालन-पोषण करते थे।
गुरौली में महीपत के हिस्से की 50 डिस्मिल जमीन उसके बच्चों के नाम वसीयत करने के लिए उन्होंने कोर्ट में आवेदन भी किया था। इसकी जानकारी जब बिंदू को हुई तो उसने विरोध शुरू कर दिया।
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हरिश्चंद्र को कई बार फोन कर इस मामले में अड़ंगा डालने का आरोप लगाकर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस बीच बुधवार की रात 12 बजे घर पहुंचे तीन बदमाशों ने बरामदे में महीपत के बेटे सूरज और बेटी आराधना के साथ सोए हरिश्चंद्र के सीने और कनपटी के पास गोली मार दी।
बच्चों के शोर मचाने पर जुटे आसपास के लोगों ने गंभीर हाल में उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार की सुबह हरिश्चंद्र के बेटे रामनिवास ने चिलुआताल थाने में बिंदू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी।
घर पर नहीं थीं पत्नी और बेटा
हरिश्चंद्र की पत्नी गुजराती देवी महराजगंज में अपने गांव गई थीं। बेटा रामनिवास बेलीपार के गुरौली में स्थित महीपत के खेत में गया था। घर पर हरिश्चंद्र के अलावा महीपत की मां तीजा देवी और उनके बच्चे थे। एसओ चिलुआताल रामपाल यादव ने बताया कि संपत्ति के विवाद में ही जल निगम के कर्मचारी की हत्या की गई है।
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पुलिस जल निगम कर्मचारी के मामा की बहू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।
चिलुआताल प्रतिनिधि के अनुसार महराजगंज कोतवाली के अहमदपुर हड़हवां निवासी हरिश्चंद्र यादव (55) जल निगम प्रथम खंड के मैकेनिकल में कर्मचारी थे।
वह चिलुआताल, मिर्जापुर में बोरिंग नंबर तीन के पास रहते थे। बेलीपार के गुरौली में रहने वाले उनके मामा के बेटे महीपत ने दो साल पहले आत्महत्या कर ली थी। घटना के कुछ दिन बाद महीपत की पत्नी बिंदू बच्चों को छोड़कर चली गई। हरिश्चंद्र ही महीपत की बेटी साधना (17), बेटे सूरज (13), धीरेंद्र (11) और बेटी आराधना (8) का पालन-पोषण करते थे।
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गुरौली में महीपत के हिस्से की 50 डिस्मिल जमीन उसके बच्चों के नाम वसीयत करने के लिए उन्होंने कोर्ट में आवेदन भी किया था। इसकी जानकारी जब बिंदू को हुई तो उसने विरोध शुरू कर दिया।
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हरिश्चंद्र को कई बार फोन कर इस मामले में अड़ंगा डालने का आरोप लगाकर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस बीच बुधवार की रात 12 बजे घर पहुंचे तीन बदमाशों ने बरामदे में महीपत के बेटे सूरज और बेटी आराधना के साथ सोए हरिश्चंद्र के सीने और कनपटी के पास गोली मार दी।
बच्चों के शोर मचाने पर जुटे आसपास के लोगों ने गंभीर हाल में उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार की सुबह हरिश्चंद्र के बेटे रामनिवास ने चिलुआताल थाने में बिंदू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी।
घर पर नहीं थीं पत्नी और बेटा
हरिश्चंद्र की पत्नी गुजराती देवी महराजगंज में अपने गांव गई थीं। बेटा रामनिवास बेलीपार के गुरौली में स्थित महीपत के खेत में गया था। घर पर हरिश्चंद्र के अलावा महीपत की मां तीजा देवी और उनके बच्चे थे। एसओ चिलुआताल रामपाल यादव ने बताया कि संपत्ति के विवाद में ही जल निगम के कर्मचारी की हत्या की गई है।