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मुख्यमंत्री जी! खतरा है, असलहा चाहिए

Fri, 21 Oct 2016 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Fri, 21 Oct 2016 12:49 AM IST
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Demonds of weapons to cm
बंदूक
विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही असलहे को लेकर एक बार फिर सिफारिशों का दौर तेज हो गया है। आवेदन करने के महीनों बाद भी जिला स्तर पर कोई उम्मीद नहीं बनती देख कई असलहा प्रेमियों ने डीएम को छोड़ सीधे सीएम तक सिफारिश कर डाली। सभी ने जान को खतरा बताते हुए लाइसेंस मांगा है ताकि वे असलहा खरीद सकें। किसी ने अपने साथ हुई घटना का जिक्र किया है तो किसी ने खुद को किसी घटना का गवाह बताया है। इनमें से ज्यादातर ने सुरक्षा के लिए पिस्टल पर भरोसा जताया है।
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इन सिफारिशों से जुड़े दो दर्जन मामलों में सीएम दफ्तर से जवाब मांगा गया है। चूंकि मामला सीएम संदर्भ का है लिहाजा प्रशासन भी इनके आवेदनों को निरस्त करने की वजहों को सहेजने में जुट गया है। जिन आवेदनों में कोई वाजिब वजह नहीं है, उन मामलों में वजहें तैयार की जा रही हैं। इसमें पुलिस महकमे की भी मदद ली जी रही है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर असलहा लाइसेंस को लेकर सख्ती होने की वजह से जिला प्रशासन भी आश्वस्त है कि लाइसेंस को लेकर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होने जा रही।
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धूल फांक रहे हजारों आवेदन

थाने से लेकर डीसीआरबी, एसपी, एसएसपी और डीएम स्तर पर शस्त्र लाइसेंस के दो हजार से अधिक आवेदन धूल फांक रहे हैं। जिले में करीब पांच साल से लाइसेंस पर रोक लगी होने के बावजूद असलहे के शौकीनों को उम्मीद रहती है कि जल्द ही यह रोक हट सकती है। ऐसे में विलंब न हो, इसलिए वे आवेदन पत्रों की जांच आदि की कार्रवाई पूरी रखना चाहते हैं। यही वजह है कि छह महीने में आवेदन निरस्त होने के बाद भी तमाम लोग दोबारा आवेदन कर देते हैं। 
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एनजी ने शुरू की थी सख्ती, फार्म तक बंद करा दिए

करीब चार साल पहले मथुरा से तबादला होकर आए पूर्व डीएम रवि कुमार एनजी ने यहां जिम्मेदारी संभालते ही सबसे पहला काम शस्त्र लाइसेंस पर रोक लगाने का किया था। उन्होंने इस कदर सख्ती दिखाई थी कि लोगों को लाइसेंस के फार्म तक मिलने बंद हो गए। उनके करीब दो साल के कार्यकाल के दौरान सिर्फ 13 लाइसेंस जारी हुए, उनमें भी आठ विरासत के थे। उन्होंने अभी सख्ती जारी ही रखी थी कि हाईकोर्ट ने भी शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर सख्ती कर दी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी किसुरक्षा कर्मियों से ज्यादा असलहे निजी हाथों में हो गए हैं जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं।

80 फीसदी गोलियों का देना होगा खोखा

हाईकोर्ट में दाखिल एक रिट का हवाला देते हुए डीएम संध्या तिवारी ने सभी शस्त्र विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे जितनी भी गोलियां बेचते हैं, उसका 80 फीसदी खोखा प्रशासन के पास जमा करना होगा। यानी अब लाइसेंसी असलहे रखने वालों को गोलियों का हिसाब भी देना होगा। हालांकि हिसाब देने का निर्देश पहले से है मगर इसका कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा था।
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