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हृदय रोग विभाग में सेवा निवृत्त कर्मचारी की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Thu, 21 Jul 2016 07:28 PM IST
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हृदय रोग विभाग में सेवा निवृत्त कर्मचारी की मौत
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अब इसे प्रधानमंत्री के आने का स्वास्थ्य विभाग पर दबाव कहें अथवा स्वाभाविक लापरवाही, जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में सेवानिवृत्त एक स्वास्थ्य कर्मी की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए एसआईसी से शिकायत की है।
कैंट क्षेत्र के बिलंदपुर निवासी 76 वर्षीय पलकधारी स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। बुधवार को अचानक उनके सीने में दर्द उठा। परिवार वालों ने उन्हें जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भर्ती कराया। रात में करीब साढ़े बारह बजे उनकी तबियत बिगड़ने लगी। परिजनों ने डॉ. एके श्रीवास्तव को फोन किया तो उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल आफिसर को फोन कर यथास्थिति से अवगत कराया। पुत्री गुड़िया का आरोप है कि फोन करने के बाद भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आए। ईएमओ ने दवा देने या गंभीर हालत होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर करने की बात कहकर पल्ला झाड़ दिया।
रात डेढ़ उनकी मौत हो गई। अगर डॉक्टर समय पर इलाज करते तो पिता बच जाते। मृतक के बेटे विनोद ने बताया कि डॉक्टर को रात के समय बहुत फोन किया गया। मगर उन्होेंने गंभीरता से नहीं लिया और न ही अस्पताल आने की जहमत उठाई। इतना ही नहीं मौत के बाद करीब दो बजे एसआईसी को फोन किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। बाद में उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया। विनोद ने डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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- पीड़ित परिवार ने अभी तक किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत लिखित में आएगी तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एचआर यादव, एसआईसी
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कैंट क्षेत्र के बिलंदपुर निवासी 76 वर्षीय पलकधारी स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। बुधवार को अचानक उनके सीने में दर्द उठा। परिवार वालों ने उन्हें जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भर्ती कराया। रात में करीब साढ़े बारह बजे उनकी तबियत बिगड़ने लगी। परिजनों ने डॉ. एके श्रीवास्तव को फोन किया तो उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल आफिसर को फोन कर यथास्थिति से अवगत कराया। पुत्री गुड़िया का आरोप है कि फोन करने के बाद भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आए। ईएमओ ने दवा देने या गंभीर हालत होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर करने की बात कहकर पल्ला झाड़ दिया।
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रात डेढ़ उनकी मौत हो गई। अगर डॉक्टर समय पर इलाज करते तो पिता बच जाते। मृतक के बेटे विनोद ने बताया कि डॉक्टर को रात के समय बहुत फोन किया गया। मगर उन्होेंने गंभीरता से नहीं लिया और न ही अस्पताल आने की जहमत उठाई। इतना ही नहीं मौत के बाद करीब दो बजे एसआईसी को फोन किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। बाद में उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया। विनोद ने डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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- पीड़ित परिवार ने अभी तक किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत लिखित में आएगी तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एचआर यादव, एसआईसी