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बंदी रक्षक भी जेल अधीक्षक के खिलाफ बगावत पर उतरे
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 14 Oct 2016 01:16 AM IST
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जेल के अंदर जाते पुलिसकर्मी।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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बंदियों द्वारा बंधक बनाए गए बंदी रक्षकों को मुक्त कराने के लिए अधिकारियों की तरफ से पहल न होने से नाराज साथी बंदीरक्षकों ने भी जेल अधीक्षक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बंदियों की गिरफ्त में साथियों के होने का हवाला देते हुए बंदी रक्षक छुड़ाने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके शर्मा सरकारी काम से बुधवार को लखनऊ गए थे। सुबह बवाल के बाद डीएम और एसएसपी फोर्स के साथ जेल पहुंचे और उनसे फोन पर बात की। जेल अधीक्षक ने आकर स्थिति संभाल लेने का भरोसा दिया। चार घंटे इंतजार के बाद वह दोपहर करीब 1:20 बजे जेल पहुंचे और आते ही बंदियों के पास जाकर बातचीत की। उन्होंने लौटकर डीएम, एसएसपी को बंदियों के फोर्स हटाने की मांग की जानकारी दी और कहा कि इसके बाद स्थिति को वह खुद संभाल लेंगे। जेल अधीक्षक से बातचीत के बाद डीएम और एसएसपी फोर्स के साथ दोपहर करीब 1:45 बजे बाहर निकल गए। बातचीत में डीएम संध्या तिवारी ने बवाल खत्म होने की जानकारी दे दी।
उन्होंने बताया कि बंदी खराब भोजन के साथ ही जेलर और कुछ बंदीरक्षकों के खराब व्यवहार करने की शिकायत कर रहे थे, जिसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने किसी भी बंदी रक्षक को बंधक बनाए जाने की बात से इन्कार किया। अफसरों के बाहर निकलने के दौरान ही जेल के भीतर मौजूद बंदी रक्षक अफसरों से साथियों को छुड़ाने की गुहार लगाने लगे लेकिन उनकी बात को नजरदांज कर अफसर निकल गए।
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डीएम, एसएसपी के जाने के 30 मिनट बाद भी साथियों के न छूटने पर बंदीरक्षकों ने जेल अधीक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और बंदियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बवाल का जिम्मेदार भी ठहराने लगे। दोपहर करीब 2:45 बजे जेल के गेट पर 50 की संख्या में पहुंचे बंदी रक्षकों ने जेल अधीक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। चार बजे के करीब डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ल मौके पर पहुंचे और अफसरों से बातचीत कर घटना की जानकारी ली।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके शर्मा सरकारी काम से बुधवार को लखनऊ गए थे। सुबह बवाल के बाद डीएम और एसएसपी फोर्स के साथ जेल पहुंचे और उनसे फोन पर बात की। जेल अधीक्षक ने आकर स्थिति संभाल लेने का भरोसा दिया। चार घंटे इंतजार के बाद वह दोपहर करीब 1:20 बजे जेल पहुंचे और आते ही बंदियों के पास जाकर बातचीत की। उन्होंने लौटकर डीएम, एसएसपी को बंदियों के फोर्स हटाने की मांग की जानकारी दी और कहा कि इसके बाद स्थिति को वह खुद संभाल लेंगे। जेल अधीक्षक से बातचीत के बाद डीएम और एसएसपी फोर्स के साथ दोपहर करीब 1:45 बजे बाहर निकल गए। बातचीत में डीएम संध्या तिवारी ने बवाल खत्म होने की जानकारी दे दी।
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उन्होंने बताया कि बंदी खराब भोजन के साथ ही जेलर और कुछ बंदीरक्षकों के खराब व्यवहार करने की शिकायत कर रहे थे, जिसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने किसी भी बंदी रक्षक को बंधक बनाए जाने की बात से इन्कार किया। अफसरों के बाहर निकलने के दौरान ही जेल के भीतर मौजूद बंदी रक्षक अफसरों से साथियों को छुड़ाने की गुहार लगाने लगे लेकिन उनकी बात को नजरदांज कर अफसर निकल गए।
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डीएम, एसएसपी के जाने के 30 मिनट बाद भी साथियों के न छूटने पर बंदीरक्षकों ने जेल अधीक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और बंदियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बवाल का जिम्मेदार भी ठहराने लगे। दोपहर करीब 2:45 बजे जेल के गेट पर 50 की संख्या में पहुंचे बंदी रक्षकों ने जेल अधीक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। चार बजे के करीब डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ल मौके पर पहुंचे और अफसरों से बातचीत कर घटना की जानकारी ली।