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आठ माह बाद डॉक्टरों की गिरफ्तारी के विरोध में आया आईएमए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 09 Apr 2018 09:15 PM IST
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प्रेस कांफ्रेंस करते आईएमए के पदाधिकारी।
- फोटो : Amar Ujala
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आठ माह पहले हुए ऑक्सीजन कांड में हुई डॉक्टरों की गिरफ्तारी अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को अनुचित लगने लगी है। पहले खामोश रहे आईएमए के पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. सतीश और डॉ. कफील खान की गिरफ्तारी को साजिश बताया।
आईएमए के सचिव डॉ. आरपी शुक्ल ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी प्रशासनिक उदासीनता, असंवेदनशीलता व संभावति भ्रष्टाचार के कारण हुई। इसके लिए लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक के सभी अधिकारी दोषी हैं। इनके पास समस्या से निपटने के पर्याप्त अधिकार थे। लेकिन सीमित साधन और अधिकार के साथ व्यवस्था संभाल रहे डॉक्टरों को दोषी बताकर उन्हें जेल में डाल दिया गया।
सरकार की दोहरी बात पर सवाल उठाए
पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार एक तरफ मौतों के पीछे ऑक्सीजन की कमी को कारण नहीं मान रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। आठ महीनों से दोषी डॉक्टरों को जमानत भी नहीं दी जा रही है। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। डॉ. शुक्ल ने प्रदेश के बाहर की उच्चस्तरीय समित से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।
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‘छुट्टी पर होने की बावजूद भी मदद को पहुंचे थे डॉ. कफील’
डॉ. कफील खान की पत्नी डॉ. शबिस्ता खान ने कहा कि घटना वाले दिन वह छुट्टी पर थे। डॉ. कफील एनएचएम के नोडल ऑफिसर थे। उनका ऑक्सीजन सप्लाई से लेना-देना नहीं था। इसके बाद भी 10 अगस्त की रात अस्पताल में व्हाट्सएप पर ऑक्सीजन की कमी होने से जुड़े मैसेज पर वह हालात देखने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कई सीनियर डॉक्टरों को इसकी सूचना भी दी। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल को पहले ही ऑक्सीजन की कमी की सूचना दी थी, लेकिन उन्होंने भी संज्ञान नहीं लिया। घटना के बाद विभागाध्यक्ष छुट्टी लेकर चली गईं। इसके बाद सारा दोष डॉ. कफील पर आ गया।
सरकार से पूछे सवाल
- सरकार स्पष्ट करे कि बच्चों की मौत स्वाभाविक थी या ऑक्सीजन की कमी से हुई?
- अगर बच्चों की मृत्यु स्वाभाविक थी तो डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद क्यों किया गया?
- इतने गंभीर विषय पर आठ महीने में कोई जांच बैठाकर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई?
- ऑक्सीजन सप्लाई व भुगतान का निर्णय लखनऊ में बैठे मंत्री और अधिकारी करते हैं। ऐसे में अत्यधिक देरी के लिए उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- गैस एजेंसी द्वारा कई बार चेतावनी देने और बीआरडी के प्राचार्य के कई बार अनुरोध के बाद भी डीएम से लेकर लखनऊ सचिवालय तक लोगों ने चुप्पी क्यों साधे रखी?
- आरोपी डॉक्टरों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास न होने के बाद भी उन्हें जमानत क्यों नहीं दी जा रही?
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आईएमए के सचिव डॉ. आरपी शुक्ल ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी प्रशासनिक उदासीनता, असंवेदनशीलता व संभावति भ्रष्टाचार के कारण हुई। इसके लिए लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक के सभी अधिकारी दोषी हैं। इनके पास समस्या से निपटने के पर्याप्त अधिकार थे। लेकिन सीमित साधन और अधिकार के साथ व्यवस्था संभाल रहे डॉक्टरों को दोषी बताकर उन्हें जेल में डाल दिया गया।
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सरकार की दोहरी बात पर सवाल उठाए
पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार एक तरफ मौतों के पीछे ऑक्सीजन की कमी को कारण नहीं मान रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। आठ महीनों से दोषी डॉक्टरों को जमानत भी नहीं दी जा रही है। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। डॉ. शुक्ल ने प्रदेश के बाहर की उच्चस्तरीय समित से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।
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‘छुट्टी पर होने की बावजूद भी मदद को पहुंचे थे डॉ. कफील’
डॉ. कफील खान की पत्नी डॉ. शबिस्ता खान ने कहा कि घटना वाले दिन वह छुट्टी पर थे। डॉ. कफील एनएचएम के नोडल ऑफिसर थे। उनका ऑक्सीजन सप्लाई से लेना-देना नहीं था। इसके बाद भी 10 अगस्त की रात अस्पताल में व्हाट्सएप पर ऑक्सीजन की कमी होने से जुड़े मैसेज पर वह हालात देखने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कई सीनियर डॉक्टरों को इसकी सूचना भी दी। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल को पहले ही ऑक्सीजन की कमी की सूचना दी थी, लेकिन उन्होंने भी संज्ञान नहीं लिया। घटना के बाद विभागाध्यक्ष छुट्टी लेकर चली गईं। इसके बाद सारा दोष डॉ. कफील पर आ गया।
सरकार से पूछे सवाल
- सरकार स्पष्ट करे कि बच्चों की मौत स्वाभाविक थी या ऑक्सीजन की कमी से हुई?
- अगर बच्चों की मृत्यु स्वाभाविक थी तो डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद क्यों किया गया?
- इतने गंभीर विषय पर आठ महीने में कोई जांच बैठाकर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई?
- ऑक्सीजन सप्लाई व भुगतान का निर्णय लखनऊ में बैठे मंत्री और अधिकारी करते हैं। ऐसे में अत्यधिक देरी के लिए उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- गैस एजेंसी द्वारा कई बार चेतावनी देने और बीआरडी के प्राचार्य के कई बार अनुरोध के बाद भी डीएम से लेकर लखनऊ सचिवालय तक लोगों ने चुप्पी क्यों साधे रखी?
- आरोपी डॉक्टरों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास न होने के बाद भी उन्हें जमानत क्यों नहीं दी जा रही?