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अधूरा निर्माण कर फरार संस् था पर मुकदमा
Updated Sat, 14 Oct 2017 09:50 PM IST
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गोरखपुर।
अग्निशमन विभाग के दफ्तर और आवास का अधूरा निर्माण कर पूरा भुगतान लेकर फरार हुई कार्यदायी संस्था के खिलाफ शनिवार को केस दर्ज हो गया। एसएसपी के प्रधान लिपिक ज्ञानेंद्र सिंह की तहरीर पर कैंट पुलिस ने यह कार्रवाई की। सीओ चारु निगम की जांच में विभागीय अफसरों की मिलीभगत से कार्यदायी संस्था की धांधली सामने आई थी।
इस आवासीय भवन के निर्माण का जिम्मा उप्र प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड ने लिया था। इसके लिए वर्ष 2013 में टेंडर निकाला गया था। कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 89.06 लाख रुपये का बजट, अन्य निर्माण कार्य के लिए 4.10 करोड़ रुपये का बजट शासन ने स्वीकृत किया था। भवन निर्माण में टाइप वन श्रेणी के 37 आवास, टाइप टू के 13 और टाइप थ्री के 7 आवासों के साथ ही बैरक, गैरज और मेस बनाए जाने थे। कार्यालय भवन में ही दूसरी मंजिल पर अधिकारियों के लिए दो आवास बनाए जाने थे। कार्यदायी संस्था ने निर्माण के लिए स्वीकृत पूरी रकम काफी पहले ले लिया था लेकिन चार साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका।
संस्था की ओर से चार साल में केवल टाइप वन श्रेणी के 16 और टाइप टू श्रेणी के सिर्फ एक आवास का ही निर्माण कराया गया। दफ्तर भवन तो बना लेकिन ऊपरी मंजिल पर अधिकारियों का आवास नहीं बनाया गया है।
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विभागीय रिपोर्ट पर भुगतान, कार्रवाई तय
संस्था को पूरे बजट का भुगतान विभागीय रिपोर्ट के बाद ही हुआ है। पूर्व के अफसरों ने काम पूरा हुए बिना ही 85 से 89 फीसदी काम पूरा होने की रिपोर्ट शासन को दी थी। इसी आधार पर कार्यदायी संस्था को निर्माण के लिए स्वीकृत रकम का भुगतान किया गया। अब मामला उजागर होने के बाद एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने कैंट थाने में केस दर्ज करा दिया है। केस की जांच में कई अफसरों और कर्मचारियों का फंसना तय माना जा रहा है।
अग्निशमन विभाग के दफ्तर और आवास का अधूरा निर्माण कर पूरा भुगतान लेकर फरार हुई कार्यदायी संस्था के खिलाफ शनिवार को केस दर्ज हो गया। एसएसपी के प्रधान लिपिक ज्ञानेंद्र सिंह की तहरीर पर कैंट पुलिस ने यह कार्रवाई की। सीओ चारु निगम की जांच में विभागीय अफसरों की मिलीभगत से कार्यदायी संस्था की धांधली सामने आई थी।
इस आवासीय भवन के निर्माण का जिम्मा उप्र प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड ने लिया था। इसके लिए वर्ष 2013 में टेंडर निकाला गया था। कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 89.06 लाख रुपये का बजट, अन्य निर्माण कार्य के लिए 4.10 करोड़ रुपये का बजट शासन ने स्वीकृत किया था। भवन निर्माण में टाइप वन श्रेणी के 37 आवास, टाइप टू के 13 और टाइप थ्री के 7 आवासों के साथ ही बैरक, गैरज और मेस बनाए जाने थे। कार्यालय भवन में ही दूसरी मंजिल पर अधिकारियों के लिए दो आवास बनाए जाने थे। कार्यदायी संस्था ने निर्माण के लिए स्वीकृत पूरी रकम काफी पहले ले लिया था लेकिन चार साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका।
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संस्था की ओर से चार साल में केवल टाइप वन श्रेणी के 16 और टाइप टू श्रेणी के सिर्फ एक आवास का ही निर्माण कराया गया। दफ्तर भवन तो बना लेकिन ऊपरी मंजिल पर अधिकारियों का आवास नहीं बनाया गया है।
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विभागीय रिपोर्ट पर भुगतान, कार्रवाई तय
संस्था को पूरे बजट का भुगतान विभागीय रिपोर्ट के बाद ही हुआ है। पूर्व के अफसरों ने काम पूरा हुए बिना ही 85 से 89 फीसदी काम पूरा होने की रिपोर्ट शासन को दी थी। इसी आधार पर कार्यदायी संस्था को निर्माण के लिए स्वीकृत रकम का भुगतान किया गया। अब मामला उजागर होने के बाद एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने कैंट थाने में केस दर्ज करा दिया है। केस की जांच में कई अफसरों और कर्मचारियों का फंसना तय माना जा रहा है।