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रंगदारी मांगने वाले संजय और शक्ति तनहाई बैरक में
Updated Wed, 05 Jul 2017 08:20 PM IST
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गोरखपुर जेल।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिव शंकर शाही और व्यापारियों से रंगदारी मांगने वाले संजय यादव व उसके सहयोगी शक्ति को तनहाई बैरक में डाल दिया गया है। जेल प्रशासन ने यह कार्रवाई बुधवार को डीआईजी नीलाब्जा चौधरी की सख्ती के बाद की। बुधवार की सुबह डीआईजी ने जेल अफसरों को कार्यालय में तलब कर कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई की। अब दोनों अलग-अलग तनहाई बैरक में अकेले रहेंगे। उधर, डीआईजी नीलाब्जा चौधरी ने पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है।
इधर, करीब एक हफ्ते से जेल में बंद संजय यादव शातिर अपराधी रामश्रय यादव के नाम पर रंगदारी मांग रहा था। सूचना के बाद भी पुलिस ने पहले सक्रियता नहीं दिखाई। बाद में जब सीएम के करीबी डॉ. शिव शंकर शाही से रंगदारी मांगी गई और डॉक्टर ने सीएम से शिकायत की तो पुलिस हरकत में आई। जांच शुरू हुई तो 24 घंटे के अंदर ही पता चल गया कि जेल से संजय ही रंगदारी मांग रहा है। मंगलवार की देर रात पुलिस और प्रशासनिक टीम ने जब जेल में छापेमारी की तो बैरक नंबर 14 से एक मोबाइल और दो सिम कार्ड मिले थे। पूछताछ में पता चला कि मोबाइल शक्ति का है। सच्चाई उजागर होने के बाद भी जेल प्रशासन ने बुधवार की सुबह तक कोई कार्रवाई नहीं की। डीआईजी नीलाब्जा चौधरी ने जब वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, सीओ कैंट, इंस्पेक्टर कैंट को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई तो जेल प्रशासन ने दोनों शातिर अपराधियों की बैरक बदल दी। डीआईजी के आदेश पर जेल प्रशासन के अफसरों की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है।
संजय के बताने पर ही जेल में मिला मोबाइल
मंगलवार की रात डीएम के आदेश पर जेल में जांच करने पहुंचे एसपी सिटी विनय सिंह ने संजय से कड़ाई से पूछताछ की थी। संजय के बताने पर ही पुलिस शक्ति के पास गई और उसी की बैरक से मोबाइल और सिम कार्ड बरामद हुआ। पुलिस अफसरों ने दोनों अपराधियाें से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की थी।
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गिरोहबंद दस बंदी के बैरक बदले
मंगलवार की जांच में यह भी सामने आया कि जेल में बंद दस बंदी रोजाना मारपीट करते हैं। यह गिरोहबंदी कर आम बंदियों से काम कराते हैं। इनके भी बैरक बदले गए हैं। हालांकि जेल प्रशासन अभी इनके नाम नहीं बता रहा है।
जेल प्रशासन के अफसरों की भूमिका की जांच होगी। जो अफसर पहले यहां रहे हैं, उनकी भी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
- नीलाब्जा चौधरी, डीआईजी
शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिव शंकर शाही और व्यापारियों से रंगदारी मांगने वाले संजय यादव व उसके सहयोगी शक्ति को तनहाई बैरक में डाल दिया गया है। जेल प्रशासन ने यह कार्रवाई बुधवार को डीआईजी नीलाब्जा चौधरी की सख्ती के बाद की। बुधवार की सुबह डीआईजी ने जेल अफसरों को कार्यालय में तलब कर कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई की। अब दोनों अलग-अलग तनहाई बैरक में अकेले रहेंगे। उधर, डीआईजी नीलाब्जा चौधरी ने पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है।
इधर, करीब एक हफ्ते से जेल में बंद संजय यादव शातिर अपराधी रामश्रय यादव के नाम पर रंगदारी मांग रहा था। सूचना के बाद भी पुलिस ने पहले सक्रियता नहीं दिखाई। बाद में जब सीएम के करीबी डॉ. शिव शंकर शाही से रंगदारी मांगी गई और डॉक्टर ने सीएम से शिकायत की तो पुलिस हरकत में आई। जांच शुरू हुई तो 24 घंटे के अंदर ही पता चल गया कि जेल से संजय ही रंगदारी मांग रहा है। मंगलवार की देर रात पुलिस और प्रशासनिक टीम ने जब जेल में छापेमारी की तो बैरक नंबर 14 से एक मोबाइल और दो सिम कार्ड मिले थे। पूछताछ में पता चला कि मोबाइल शक्ति का है। सच्चाई उजागर होने के बाद भी जेल प्रशासन ने बुधवार की सुबह तक कोई कार्रवाई नहीं की। डीआईजी नीलाब्जा चौधरी ने जब वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, सीओ कैंट, इंस्पेक्टर कैंट को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई तो जेल प्रशासन ने दोनों शातिर अपराधियों की बैरक बदल दी। डीआईजी के आदेश पर जेल प्रशासन के अफसरों की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है।
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संजय के बताने पर ही जेल में मिला मोबाइल
मंगलवार की रात डीएम के आदेश पर जेल में जांच करने पहुंचे एसपी सिटी विनय सिंह ने संजय से कड़ाई से पूछताछ की थी। संजय के बताने पर ही पुलिस शक्ति के पास गई और उसी की बैरक से मोबाइल और सिम कार्ड बरामद हुआ। पुलिस अफसरों ने दोनों अपराधियाें से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की थी।
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गिरोहबंद दस बंदी के बैरक बदले
मंगलवार की जांच में यह भी सामने आया कि जेल में बंद दस बंदी रोजाना मारपीट करते हैं। यह गिरोहबंदी कर आम बंदियों से काम कराते हैं। इनके भी बैरक बदले गए हैं। हालांकि जेल प्रशासन अभी इनके नाम नहीं बता रहा है।
जेल प्रशासन के अफसरों की भूमिका की जांच होगी। जो अफसर पहले यहां रहे हैं, उनकी भी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
- नीलाब्जा चौधरी, डीआईजी