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बेसिक एफओ पर केस दर्ज होगा
Updated Thu, 08 Jun 2017 09:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सीजेएम विष्णु कुमार अग्रवाल ने राजघाट थाना प्रभारी को बीएसए दफ्तर के वित्त एवं लेखाधिकारी आलोक कुमार राय और लेखाकार इंद्रहास सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों पर महिला शिक्षक से वेतन भुगतान के बदले रिश्वत मांगने और प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा कर झूठी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगा है।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस लघु उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षक अन्नपूर्णा राय सीजीएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उनका का कहना है कि दो जुलाई 2016 को उन्होंने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था। शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन भी विभाग ने करा लिया। आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त लेखाधिकारी एवं सहायक लेखाकार ने वेतन भुगतान के लिए उनसे 23 अगस्त 2016 को 1.80 लाख रुपये रिश्वत मांगी। असमर्थता जताने पर उनके टीईटी प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ कर 2013-14 की जगह वर्ष 2015 अंकित कर दिया गया। इसे सही कराने के लिए बार-बार उन्हें दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े। जब इसकी ऑनलाइन जांच हुई तो पता चला कि 2015 में प्रार्थनी की जगह संध्या सिंह पुत्री देवदत्त सिंह का नाम दर्ज है। मामले को संज्ञेय प्रवृत्ति का पाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राजघाट के थानेदार को मुकदमा कायम करने का आदेश दिया।
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गोरखपुर। सीजेएम विष्णु कुमार अग्रवाल ने राजघाट थाना प्रभारी को बीएसए दफ्तर के वित्त एवं लेखाधिकारी आलोक कुमार राय और लेखाकार इंद्रहास सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों पर महिला शिक्षक से वेतन भुगतान के बदले रिश्वत मांगने और प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा कर झूठी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगा है।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस लघु उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षक अन्नपूर्णा राय सीजीएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उनका का कहना है कि दो जुलाई 2016 को उन्होंने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था। शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन भी विभाग ने करा लिया। आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त लेखाधिकारी एवं सहायक लेखाकार ने वेतन भुगतान के लिए उनसे 23 अगस्त 2016 को 1.80 लाख रुपये रिश्वत मांगी। असमर्थता जताने पर उनके टीईटी प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ कर 2013-14 की जगह वर्ष 2015 अंकित कर दिया गया। इसे सही कराने के लिए बार-बार उन्हें दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े। जब इसकी ऑनलाइन जांच हुई तो पता चला कि 2015 में प्रार्थनी की जगह संध्या सिंह पुत्री देवदत्त सिंह का नाम दर्ज है। मामले को संज्ञेय प्रवृत्ति का पाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राजघाट के थानेदार को मुकदमा कायम करने का आदेश दिया।
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