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दो नेपाली महिलाएं मुक्त होकर नेपाल पहुंचीं
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:25 AM IST
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बनारस के लिए विशेष
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बनारस में बंधक दो नेपाली महिलाएं
पुलिस के सहयोग से छूटकर घर पहुंचीं
- नेपाल के गुलरिया थाने में दोनों महिलाओं ने रिपोर्ट दर्ज कराई
- महिलाओं की गुहार पर राहगीर ने पुलिस को सूचना दी थी
- महिलाओं के मुताबिक अभी भी 150 नेपाली महिलाएं बनारस में बंधक हैं
- प्रमुख जिलाधिकारी ने कहा बंधक महिलाओं को छुड़ाने के लिए एक दल शीघ्र बनारस जाएगा
ऩवलपरासी (नेपाल)। बनारस में बंधक बनाई गई 150 नेपाली महिलाओं में से दो महिलाएं पुलिस की मदद से छूटकर वापस नेपाल अपने घर पहुंच गई हैं। इन दोनों महिलाओं को खाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर 12 दिन पहले बनारस से ले जाया गया था। इन महिलाओं के मुताबिक अन्य नेपाली लड़कियां अलग-अलग मकानों में तीन महीने से बंधक हैं। महिलाओं ने धोखे से ले जाने वाले दलाल के खिलाफ नेपाल के गुलरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कुरुङमाङ के प्रमुख जिलाधिकारी राम बहादुर ने बताया कि अन्य महिलाओं को छुड़ाने के लिए जल्दी ही एक दल बनारस जाएगा और वहां के प्रशासन के सहयोग से उन्हें मुक्त कराएगा।
दोनों महिलाओं ने बताया कि उन्हें बनारस में हनुमान मंदिर के पास स्थित किसी बाजार के एक मकान में रखा गया था। मकान के जंगले से वह लोग कई दिनों से सड़क पर आते-जाते लोगों से छुड़ाने की गुहार कर रही थीं। मंगलवार 17 जुलाई को किसी राहगीर ने पास स्थित पुलिस चौकी पर सूचना दी। दोपहर में दो पुलिस वालों ने उन्हें वहां से निकाला। महिलाओं ने बताया कि वह इतनी घबराई हुई थीं कि छूटने के बाद सीधे बस अड्डे गईं और रूपैडिहा वाली बस में बैठकर नेपाल सीमा तक आई। बस टिकट के पैसे उनके पास थे। उसके बाद बुधवार सुबह नेपालगंज होते हुए गुलरिया पहुंचीं। इनमें से मधुवनी नगर पालिका क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने बताया कि बनारस में अभी भी धादिङ, झापा, ईलाम, सुनसरी, बांके, दाङ सहित अन्य जिलों की लगभग 150 नेपाली महिलाएं तीन महीने से बंधक हैं। इन्हें अलग-अलग पांच मकानों में रखा गया है। दलाल के आदमी दिन-रात इन मकानों की निगरानी करते हैं।
दोनों महिलाओं ने बताया कि खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के बहाने छह जुलाई को बनारस ले जाया गया था। दोनों ने आरोप लगाया कि संदीप नाम का भारतीय एजेंट उन्हें गुमराह करके बनारस ले गया था। नेपाल प्रशासन ने फिलहाल दोनों महिलाओं को महिला सेवा केन्द्र में रखा है। माईती नेपाल नेपालगंज के संयोजक केशव कोइराला ने बताया कि माईती नेपाल व भारतीय उद्धार संस्था के सदस्य बंधक बनाई गई अन्य महिलाओं का पता लगा रहे हैं।
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बनारस में बंधक दो नेपाली महिलाएं
पुलिस के सहयोग से छूटकर घर पहुंचीं
- नेपाल के गुलरिया थाने में दोनों महिलाओं ने रिपोर्ट दर्ज कराई
- महिलाओं की गुहार पर राहगीर ने पुलिस को सूचना दी थी
- महिलाओं के मुताबिक अभी भी 150 नेपाली महिलाएं बनारस में बंधक हैं
- प्रमुख जिलाधिकारी ने कहा बंधक महिलाओं को छुड़ाने के लिए एक दल शीघ्र बनारस जाएगा
ऩवलपरासी (नेपाल)। बनारस में बंधक बनाई गई 150 नेपाली महिलाओं में से दो महिलाएं पुलिस की मदद से छूटकर वापस नेपाल अपने घर पहुंच गई हैं। इन दोनों महिलाओं को खाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर 12 दिन पहले बनारस से ले जाया गया था। इन महिलाओं के मुताबिक अन्य नेपाली लड़कियां अलग-अलग मकानों में तीन महीने से बंधक हैं। महिलाओं ने धोखे से ले जाने वाले दलाल के खिलाफ नेपाल के गुलरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कुरुङमाङ के प्रमुख जिलाधिकारी राम बहादुर ने बताया कि अन्य महिलाओं को छुड़ाने के लिए जल्दी ही एक दल बनारस जाएगा और वहां के प्रशासन के सहयोग से उन्हें मुक्त कराएगा।
दोनों महिलाओं ने बताया कि उन्हें बनारस में हनुमान मंदिर के पास स्थित किसी बाजार के एक मकान में रखा गया था। मकान के जंगले से वह लोग कई दिनों से सड़क पर आते-जाते लोगों से छुड़ाने की गुहार कर रही थीं। मंगलवार 17 जुलाई को किसी राहगीर ने पास स्थित पुलिस चौकी पर सूचना दी। दोपहर में दो पुलिस वालों ने उन्हें वहां से निकाला। महिलाओं ने बताया कि वह इतनी घबराई हुई थीं कि छूटने के बाद सीधे बस अड्डे गईं और रूपैडिहा वाली बस में बैठकर नेपाल सीमा तक आई। बस टिकट के पैसे उनके पास थे। उसके बाद बुधवार सुबह नेपालगंज होते हुए गुलरिया पहुंचीं। इनमें से मधुवनी नगर पालिका क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने बताया कि बनारस में अभी भी धादिङ, झापा, ईलाम, सुनसरी, बांके, दाङ सहित अन्य जिलों की लगभग 150 नेपाली महिलाएं तीन महीने से बंधक हैं। इन्हें अलग-अलग पांच मकानों में रखा गया है। दलाल के आदमी दिन-रात इन मकानों की निगरानी करते हैं।
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दोनों महिलाओं ने बताया कि खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के बहाने छह जुलाई को बनारस ले जाया गया था। दोनों ने आरोप लगाया कि संदीप नाम का भारतीय एजेंट उन्हें गुमराह करके बनारस ले गया था। नेपाल प्रशासन ने फिलहाल दोनों महिलाओं को महिला सेवा केन्द्र में रखा है। माईती नेपाल नेपालगंज के संयोजक केशव कोइराला ने बताया कि माईती नेपाल व भारतीय उद्धार संस्था के सदस्य बंधक बनाई गई अन्य महिलाओं का पता लगा रहे हैं।
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