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मुआयने में कुछ अटके, कुछ भटके-दो को हिदायत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 09 Dec 2016 01:17 AM IST
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कलेक्ट्रेट का निरीक्षण करते कमिश्नर। साथ में डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट व अन्य अधिकारी।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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मुआयने के दौरान कमिश्नर के सवालों पर जहां कलेक्ट्रेट के कुछ पटलों पर संबंधित कर्मचारी अटक गए वहीं कुछ के जवाब संतोषजनक नहीं रहे। अभिलेखागार में कमिश्नर के एक सवाल पर जब एक कर्मचारी के साथ अफसर भी बगले झांकने लगे तो स्थिति भांपते हुए डीएम संध्या तिवारी ने तत्काल जवाब दे दिया। हालांकि कमिश्नर ने डीएम को टोका और कहा अगर संबंधित पटल सहायक के अलावा दूसरा कोई जवाब देगा तो मुआयने की उपयोगिता ही नहीं रह जाएगी। सही जवाब न देने और फाइलों के रखरखाव में खामियां मिलने पर कमिश्नर ने आरआरके और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को चेताया कि कमियों को जल्द सुधारा नहीं गया तो कार्रवाई भी होगी।
करीब चार साल बाद कमिश्नर ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट का मुआयना किया। इसके पहले तत्कालीन कमिश्नर के. रविंद्र नायक ने मुआयना किया था। उनके बाद तीन कमिश्नर की तैनाती हुई मगर मुआयने को लेकर शासन के निर्देशों को पूरा करना किसी को भी मुनासिब नहीं लगा। तीन घंटे तक चले इस मुआयने के दौरान कमिश्नर ने सबसे पहले नजारत और संयुक्त कार्यालय के कार्यों को देखा। नोटिस तामिला का प्रारूप बनाने तथा अधिकारी एवं कर्मचारियों के कार्य आवंटन की जानकारी ली। संयुक्त कार्यालय के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पटल सहायकों को पेंडिंग रजिस्टर बनाने का निर्देश दिया।
अभिलेखागार में फ ाइलों के दाखिल दफ्तर की स्थिति जांचते हुए उन्होंने कहा कि खतौनी एवं लेखपाल की रिपोर्ट देखे बिना फ ाइलों का दाखिल दफ्तर न किया जाए। इसके बाद कमिश्नर ने डीएम के चेंबर में विभिन्न पटलों और वहां के कार्यों की बिंदुवार गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एडीएम (सिटी) को अपने कोर्ट की फ ाइलों को और व्यवस्थित ढंग से रखवानेे को कहा। इसी तरह सभी एडीएम को कोर्ट में नियमित बैठने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन में जितने मुकदमों की सुनवाई संभव हो उतने ही मुकदमे लगाएं। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द पट्टे की कार्रवाई पूरी नहीं की गई तो संबंधित को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। उन्होंने उन लोगों के लाइसेंस निरस्त करने को कहा जिन्होंने शस्त्र नहीं खरीदा है।
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करीब चार साल बाद कमिश्नर ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट का मुआयना किया। इसके पहले तत्कालीन कमिश्नर के. रविंद्र नायक ने मुआयना किया था। उनके बाद तीन कमिश्नर की तैनाती हुई मगर मुआयने को लेकर शासन के निर्देशों को पूरा करना किसी को भी मुनासिब नहीं लगा। तीन घंटे तक चले इस मुआयने के दौरान कमिश्नर ने सबसे पहले नजारत और संयुक्त कार्यालय के कार्यों को देखा। नोटिस तामिला का प्रारूप बनाने तथा अधिकारी एवं कर्मचारियों के कार्य आवंटन की जानकारी ली। संयुक्त कार्यालय के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पटल सहायकों को पेंडिंग रजिस्टर बनाने का निर्देश दिया।
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अभिलेखागार में फ ाइलों के दाखिल दफ्तर की स्थिति जांचते हुए उन्होंने कहा कि खतौनी एवं लेखपाल की रिपोर्ट देखे बिना फ ाइलों का दाखिल दफ्तर न किया जाए। इसके बाद कमिश्नर ने डीएम के चेंबर में विभिन्न पटलों और वहां के कार्यों की बिंदुवार गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एडीएम (सिटी) को अपने कोर्ट की फ ाइलों को और व्यवस्थित ढंग से रखवानेे को कहा। इसी तरह सभी एडीएम को कोर्ट में नियमित बैठने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन में जितने मुकदमों की सुनवाई संभव हो उतने ही मुकदमे लगाएं। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द पट्टे की कार्रवाई पूरी नहीं की गई तो संबंधित को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। उन्होंने उन लोगों के लाइसेंस निरस्त करने को कहा जिन्होंने शस्त्र नहीं खरीदा है।
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