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अक्टूबर से यूनिवर्सिटी परिसर में होगी कामर्स की फेकेल्टी

Sat, 13 Aug 2016 08:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Sat, 13 Aug 2016 08:08 PM IST
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Commerce faculty will shift in university campus till october
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन करते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लोग। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
कॉमर्स फेकेल्टी को गोरखपुर यूनिवर्सिटी परिसर में लाने के लिए एबीवीपी के कार्यकर्ता शनिवार को सड़क पर उतर गए। कॉमर्स फेकेल्टी के विद्यार्थी भी उनके साथ थे। कार्यकर्ता और विद्यार्थी नारेबाजी करते प्रशासनिक भवन पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे। कुलपति ने उन्हें आश्वस्त किया कि अक्टूबर तक कॉमर्स फेकेल्टी परिसर में बने नए भवन में होगी। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन पर विराम लगा दिया।
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प्रदर्शन के लिए एबीवीपी कार्यकर्ता सुबह 11 बजे कॉमर्स फेकेल्टी पहुंचे। नेतृत्व कर रहे मयंक राय ने कहा कि कॉमर्स फेकेल्टी के जर्जर भवन, पुस्तकालय की दुर्दशा, पानी की कमी और शौचालय की समस्या से निजात पाना है तो विद्यार्थियों को आगे आना ही होगा। दुर्व्यवस्था से आजिज विद्यार्थी एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ हो लिए और नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंचकर धरने पर बैठ गए।
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जानकारी मिलने पर कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि अक्टूबर तक फेकेल्टी नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। विद्यार्थियों ने कुलपति के सामने परिसर में गंदगी की समस्या भी रखी, जिसे कुलपति ने गंभीरता से लिया और इसे दूर करने का आश्वासन भी दिया। प्रदर्शन करने वालों में योगेश्वर नाथ पांडेय, गोलू, नेहा राव, हिमांशु चंद, कोणार्क श्रीवास्तव, दीपक यादव, अनुपम सिंह, संजीव, पवन, संजना सिंह, सपना, ममता, शिवम आदि मौजूद रहे। 
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बजट के फेर में नहीं बन सकी बिल्डिंग

अक्टूबर तक कॉमर्स फेकेल्टी के नए भवन में शिफ्टिंग के आश्वासन के बाद जब मौके पर जाकर भवन की पड़ताल की गई तो पता चला कि बिल्डिंग का अभी 70 फीसदी कार्य ही हो सका है। तय समय पर काम पूरा न होने की वजह रिवाइज बजट का फेर है। 2013 में चार करोड़ की लागत से भवन बनाने की मंजूरी के बाद राजकीय निर्माण निगम को इसकी जिम्मेदारी दी गई। 70 फीसदी कार्य के बाद 2015 में बजट कम पड़ने से भवन का निर्माण निगम ने रोक दिया। मामला यूनिवर्सिटी की विकास समिति के सामने रखा गया। समिति ने पीडब्ल्यूडी से पड़ताल कराकर बढ़े बजट की मंजूरी दी। तब जाकर साल भर ठप रहा काम एक सप्ताह पहले फिर शुरू हो सका। कुलपति के आश्वासन के बाद अब दो महीने में 30 फीसदी काम पूरा करने की निर्माण निगम के सामने चुनौती है।
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